‘कान के नीचे बजाने’ का बयान : नारायण राणे गिरफ्तार, कुछ घंटे के बवाल के बाद देर रात मिल गई बेल

सवाल: कोई राज्य सरकार कैसे किसी कैबिनेट मंत्री को गिरफ्तार कर सकती है?

मुंबई। केंद्रीय मंत्री नारायण राणे को मंगलवार को महाराष्ट्र पुलिस ने गिरफ्तार किया। कुछ घंटे के बवाल के बाद देर रात उन्हें बेल भी मिल गई। 23 अगस्त को उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के ‘कान के नीचे बजाने’ का बयान दिया था। इसके बाद पूरे महाराष्ट्र में शिवसैनिकों ने उग्र प्रदर्शन किया। कई जिलों में राणे के खिलाफ FIR भी दर्ज हुई। नासिक में भाजपा कार्यालय पर पत्थरबाजी भी की गई, तो वहीं मुंबई में राणे के घर के बाहर प्रदर्शन कर रहे शिवसैनिकों पर पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। राणे हाल ही में कैबिनेट मंत्री बनाए गए हैं और उनके पास सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय है। इस वजह से सवाल उठते हैं कि क्या किसी राज्य की पुलिस किसी कैबिनेट मंत्री को आम लोगों की तरह गिरफ्तार कर सकती है? क्या संसद सदस्यों को कोई विशेषाधिकार नहीं हैं?

संसद सदस्यों की गिरफ्तारी कैसे और कब-कब हो सकती है?

जब संसद सत्र नहीं चल रहा हो तो संसद सदस्यों को किसी भी क्रिमिनल केस में अरेस्ट किया जा सकता है। हालांकि, पुलिस को राज्यसभा के अध्यक्ष को गिरफ्तारी का कारण, अगर नजरबंद किया जा रहा है तो नजरबंदी की जगह और जेल भेजे जाने की स्थिति में जेल के बारे में जानकारी देनी होती है। हालांकि, सिविल मामलों में किसी भी संसद सदस्य को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता।

तो क्या संसद सदस्यों को कोई विशेषाधिकार नहीं है?

बिल्कुल है। संसद सदस्यों को संविधान के तहत कई विशेषाधिकार हैं। संसद सत्र चल रहा होता है तो सिविल मामलों में किसी भी सदस्य को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। संसद सत्र शुरू होने के 40 दिन पहले और खत्म होने के 40 दिन बाद तक सदस्यों को ये विशेषाधिकार रहता है। हालांकि, क्रिमिनल और नजरबंदी के मामलों में ये लागू नहीं होता है।

क्या किसी को संसद या संसद के पास से गिरफ्तार किया जा सकता है?

नहीं। संसद सीमा से किसी सांसद को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। हालांकि, लोकसभा स्पीकर या राज्यसभा अध्यक्ष की अनुमति हो तो गिरफ्तारी संभव है। संसद सत्र चल रहा हो, या न चल रहा हो ये शर्त दोनों स्थिति में लागू होती है। गिरफ्तारी के समय पुलिस या किसी भी कानूनी एजेंसी को गिरफ्तारी के संबंध में गृह मंत्रालय के बताए दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।

इससे पहले कब कब ऐसा हुआ है?

इससे पहले 2001 में तमिलनाडु में कैबिनेट मंत्रियों की गिरफ्तारी हुई थी। केंद्रीय मंत्री मुरासोली मारन और टीआर बालू को उस समय गिरफ्तार किया गया था। मारन उस समय केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री थे और बालू केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्री थे।

दरअसल तमिलनाडु के तत्कालीन मुख्यमंत्री एम करुणानिधि पर फ्लाइओवर घोटाले में शामिल होने का आरोप था। जब पुलिस करुणानिधि को गिरफ्तार करने पहुंची, उस वक्त टीआर बालू और मुरासोली मारन भी वहीं थे। उन्होंने करुणानिधि की गिरफ्तारी का विरोध किया। पुलिस ने दोनों को शासकीय कार्य में बाधा डालने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। भारत के इतिहास में ये पहला मामला था जब पद पर रहते हुए केंद्रीय मंत्रियों की गिरफ्तारी हुई थी।

राणे ने उद्धव ठाकरे को लेकर क्या कहा था?

स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भाषण दे रहे थे। भाषण के दौरान उद्धव ठाकरे अमृत महोत्सव या हीरक महोत्सव को लेकर कंफ्यूज दिखे। उन्होंने पीछे खड़े शख्स से पूछा कि हीरक महोत्सव है या अमृत महोत्सव। पीछे वाले शख्स ने जवाब दिया – अमृत महोत्सव। भारत आजादी के 75वें साल में प्रवेश कर चुका है। भारत सरकार इस उपलक्ष्य में अमृत महोत्सव मना रही है।

अब आते हैं सोमवार 23 अगस्त पर। नारायण राणे महाराष्ट्र में जनआशीर्वाद यात्रा निकाल रहे थे। महाड में पत्रकार ने उनसे सवाल पूछा कि स्वतंत्रता दिवस के दिन दिए भाषण में उद्धव ठाकरे अमृत महोत्सव या हीरक महोत्सव को लेकर कंफ्यूज दिखे।

इसका जवाब देते हुए राणे ने कहा कि “उस दिन वे पीछे मुड़कर पूछ रहे थे कि आजाद होकर हमें कितना साल हो चुका है… अरे, इन्हें ऐसे कैसे नहीं पता? मैं होता तो उन्हें वहीं कान के नीचे बजाता…देश को आजाद हुए कितना समय हुआ वो इन्हें पता होना चाहिए था।”

राणे के बयान पर भाजपा ने क्या कहा है?

महाराष्ट्र के पूर्व CM फडणवीस ने कहा है, “मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बारे में नारायण राणे ने जो भी टिप्पणी की है, भारतीय जनता पार्टी उनके बयान का समर्थन नहीं करती है। इसके बाद भी हम व्यक्तिगत तौर पर उनके साथ खड़े हैं और पूरी ताकत के साथ पार्टी उनके साथ खड़ी रहेगी।”

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सोशल मीडिया पर कहा, “महाराष्ट्र सरकार द्वारा केंद्रीय मंत्री नारायण राणे जी की गिरफ्तारी संवैधानिक मूल्यों का हनन है। इस तरह की कार्यवाही से न तो हम डरेंगे, न दबेंगे। भाजपा को जन-आशीर्वाद यात्रा में मिल रहे अपार समर्थन से ये लोग परेशान है। हम लोकतांत्रिक ढंग से लड़ते रहेंगे और यात्रा जारी रहेगी।”

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