सिरोही में गौरव पथ तोड़ने का मामला: रिपोर्ट के बावजूद FIR नहीं, राजनीतिक दबाव के आरोप

  • – 60 लाख की लागत से बनी सड़क को बिना अनुमति तोड़ने का आरोप
  • – PWD की रिपोर्ट पर दो दिन बाद भी मामला दर्ज नहीं

सिरोही । जिले के पिण्डवाड़ा तहसील के रोहिड़ा थाना क्षेत्र के वाटेरा ग्राम पंचायत में मुख्यमंत्री गौरव पथ योजना के तहत बनी सड़क को बिना सक्षम स्वीकृति तोड़े जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) की ओर से थाने में रिपोर्ट देने के बावजूद दो दिन बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं होने से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं। आखिर दो दिन तक थाने में मामला दर्ज नहीं होने के पीछे क्या रहस्य है।

60 लाख की सड़क तोड़कर शुरू किया सीवरेज कार्य

जानकारी के अनुसार राज्य सरकार के निर्देश पर करीब 60 लाख रुपये की लागत से वाटेरा ग्राम पंचायत में गौरव पथ सड़क का निर्माण किया गया था। आरोप है कि ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों ने बिना PWD विभाग की स्वीकृति के सड़क को तोड़कर सीधे सीवरेज पाइपलाइन डालने का कार्य शुरू कर दिया। मामले की जानकारी मिलने पर पिण्डवाड़ा के सहायक अभियंता (AEN) कमलेश बिश्नोई मौके पर पहुंचे। उन्होंने मौके का निरीक्षण कर फोटो और वीडियोग्राफी करवाई तथा इसे गैरकानूनी कृत्य बताया। इसके बाद उच्च अधिकारियों के निर्देश पर 18 फरवरी को रोहिड़ा थाने में लिखित रिपोर्ट सौंप दी गई। पर पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया।

रिपोर्ट के बाद भी FIR नहीं

चौंकाने वाली बात यह है कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और बिना स्वीकृति निर्माण तोड़ने जैसे गंभीर आरोपों के बावजूद दो दिन बीत जाने के बाद भी रोहिड़ा पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया। थानाधिकारी अमराराम खोखर का कहना है कि “मामले की जांच की जा रही है।” हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि बिना एफआईआर दर्ज किए पुलिस किस आधार पर जांच कर रही है और इसकी वैधानिक स्थिति क्या है। पुलिस मामला दर्ज करके जांच करने संकोच क्यों कर रही है। आखिर मामला दर्ज नहीं करने के पीछे क्या राज है। यह भी बड़ा सवाल है। क्या पर्दे कें पीछे दोषियों को बचाने की योजना चल रही यह भी बड़ा सवाल है.

उठ रहे गंभीर सवाल

मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा है कि क्या पुलिस किसी राजनीतिक दबाव में कार्रवाई करने से बच रही है? जब एक सरकारी विभाग के अधिकारी की लिखित रिपोर्ट पर भी मामला दर्ज नहीं हो रहा, तो आमजन को न्याय मिलने की स्थिति क्या होगी—यह सवाल भी उठने लगा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों में भी तत्परता नहीं दिखाई जाएगी तो कानून व्यवस्था की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।
यह भी चर्चा है कि क्या जिला पुलिस अधीक्षक इस मामले में हस्तक्षेप कर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश देंगे या मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा।

PWD अधिकारियों ने जताई सख्ती

PWD विभाग के उच्च अधिकारियों का कहना है कि विभाग द्वारा निर्मित गौरव पथ सड़क को बिना सक्षम स्वीकृति तोड़ना स्पष्ट रूप से गैरकानूनी कृत्य है। यदि स्थानीय पुलिस स्तर पर कार्रवाई नहीं होती है तो मामला उच्च स्तर तक ले जाया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार विभाग इस संबंध में जोधपुर रेंज आईजी तथा जयपुर स्थित डीजी स्तर तक शिकायत दर्ज कराने की तैयारी में है।

कानूनी पहलू भी महत्वपूर्ण

कानूनी जानकारों के अनुसार सरकारी संपत्ति को क्षति पहुंचाना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में संबंधित विभाग की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर विधिसम्मत जांच करना आवश्यक माना जाता है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि रोहिड़ा पुलिस जांच के नाम पर लंबित इस मामले में कब तक निर्णय लेती है और क्या आरोपित पक्ष के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई होती है या नहीं।
फिलहाल पूरे प्रकरण ने प्रशासनिक कार्यशैली और कानून व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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