श्री कृष्ण जन्माष्टमी : सूना रहेगा गोविंद दरबार, गोविंद देवजी मंदिर भक्तों के लिए कल से तीन दिन तक बंद रहेगा, नहीं खुलेगा मंदिर परिसर

जयपुर @ jagruk janta। कोरोना की तीसरी लहर के खतरे को देखते हुए इस बार भी जयपुर में जन्माष्टमी पर आराध्य देव गोविंद देव जी मंदिर भक्तों के बगैर सूना रहेगा। जन्माष्टमी मंदिर में विधि विधान से गोविंदजी की तमाम झांकियां सजेंगी, पूजा-पाठ होंगे और अगले दिन नन्दोत्सव भी मनेगा, लेकिन भक्तगण भाग नहीं ले सकेंगे। मंदिर के द्वार अगले तीन दिन 29 से 31 अगस्त तक आमजन के लिए बंद रहेंगे। इसी तरह 10 सितंबर को गणेश चतुर्थी पर भी शहर के प्रमुख बड़े मंदिरों पर मेले के आयोजन नहीं होंगे।

जिला कलेक्टर अंतर सिंह नेहरा ने बताया कि मंदिरों के कार्यक्रम को लेकर कोई अलग से गाइडलाइन जारी नहीं की है। राज्य सरकार के गृहविभाग ने जो गाइडलाइन जारी कर रखी है उसके अनुरूप पर्व मना सकेंगे। सोशल डिस्टेंसिंग बनी रहे और भीड़-भाड़ न जुटे इस तरह की व्यवस्था के साथ मंदिरों में श्रद्धालुओं के आने-जाने की छूट है, लेकिन धार्मिक आयोजन पर जो रोक है व बरकरार रहेगी। गली-मोहल्लों में छोटे-मोटे आयोजन होते हैं तो वह भी गाइडलाइन के अनुरूप हो सकेंगे।

इसे देखते हुए आराध्य गोविंद देव जी मंदिर के साथ-साथ गोपीनाथ जी, राधा-दामोदर जी, सरस निकुंज, ब्रजनिधि जी, आनंद कृष्ण बिहारी जी, श्रीकृष्ण-बलराम, श्रीकृष्ण-दाऊ जी सहित सभी मंदिरों जन्माष्टमी की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इन मंदिरों में गोविंद भक्त पिछले साल की तरह इस साल भी ठाकुर जी के दरबार में हाजरी नहीं लगा सकेंगे। गोविंद देव जी मंदिर में भक्तों की सुविधा के लिए ऑनलाइन झांकियों के दर्शन की व्यवस्था रहेगी।

जन्माष्टमी पर ये रहेगा झांकियों का समय

  • झांकी समय
  • मंगला सुबह 5 से 5.15 बजे तक
  • धूप सुबह 7.45 से 9 बजे तक
  • शृंगार सुबह 9.30 से 10.15 बजे तक
  • राजभोग सुबह 11 बजे स 11.30 बजे तक
  • ग्वाल शाम 5 बजे से 5.30 बजे तक
  • संध्या शाम 6 बजे से 7 बजे तक
  • शयन रात 8 बजे से 8.15 बजे तक
  • तिथि पूजा व जन्माभिषेक रात 12 बजे से 12.30 बजे तक

गली-मोहल्लों में हो सकेंगे आयोजन
जन्माष्टमी पर्व पर भले ही बड़े मंदिरों में धूमधाम से नहीं मनाया जाएगा, लेकिन गली-मोहल्लों में इसका उल्लास देखने को मिल सकता है। छोटे स्तर पर पिछले साल की तरह इस बार भी लोग मंदिरों में सजावट के साथ ही छोटे-मोटे कार्यक्रम का आयोजन कर सकेंगे। जहां लोगों की भीड़ कम रहे और कोविड गाइडलाइन की पालना भी हो सके।

गणेश चतुर्थी पर इस बार भी मोती डूंगरी मंदिर पर नहीं भरेगा लक्खी मेला
प्रथम पूज्य गणेशजी के जन्मोत्सव गणेश चतुर्थी इस बार 10 सितंबर को है। पिछले साल की तरह इस बार भी मोती डूंगरी गणेशजी महाराज का लक्खी मेला नहीं भरेगा। दूसरे दिन शोभायात्रा भी नहीं निकाली जाएगी। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार बड़े धार्मिक आयोजनों और मेलों पर रोक लगा रखी है। वहीं मोती डूंगरी मंदिर प्रबंधन की ओर से भी यह निर्णय लिया है कि जन्मोत्सव के दौरान होने वाले कार्यक्रम सिंजारा, मोदक झांकी, पंचामृत अभिषेक आदि यथावत रहेंगे, लेकिन भक्तजनों का प्रवेश मंदिर में नहीं हो सकेगा।

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