अरब देशों में उगने वाले खजूर को रास आयी रेगिस्तान की आबोहवा, ADP-1 की बंपर पैदावार से किसान हो रहे मालामाल

खाड़ी के देशों में उगाई जानेवाली खजूर की एक खास किस्म इन दिनों राजस्थान में भी उगाई जा रही है जिससे किसानों को काफी मुनाफा हो रहा है.

कृषि के क्षेत्र में लगातार कहीं नवाचार हो रहे हैं वहीं खाड़ी देशों में तैयार होने वाली एडीपी-1 किस्म की खजूर की अब पश्चिमी राजस्थान के शुष्क क्षेत्र की विपरीत परिस्थितियों में भी बंपर पैदावार हुई है जो किसानों के लिए भी काफी उपयोगी मानी जा रही है. जोधपुर स्थित केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान यानी काजरी कई नवाचार कर रहा है. इसी कड़ी में खाड़ी के देशों में तैयार होने वाली खजूर की एडीपी-1 किस्म को राजस्थान में उगाया गया है जिससे किसान मालामाल हो रहे हैं.

काजरी के वैज्ञानिकों ने गुजरात से वर्ष 2014 में खजूर की एडीपी-1 किस्म के 200 पौधे लाकर संस्थान में शोध आरम्भ किया था. ये पौधे टिश्यू कल्चर तकनीक से तैयार किए गए थे. काजरी के निर्देशक ड़ॉ. एच. एस जाट ने बताया कि खजूर की यह बहुत विशेष किस्म होती है और जिसका चयन किया जाता है. इस किस्म की बहुत सारी खूबियां हैं जिसमें विशेष रूप से इसकी खूबी है कि यह बारिश और मानसून आने से पहले ही पक जाती है.

किसानों को हो रहा मुनाफा
साथ ही, 7 से 8 वर्ष पुराने खजूर के पेड़ में भी 120 से 130 किलोग्राम के करीब खजूर की पैदावार होती है. करीब एक हेक्टेयर में 55 से 60 पौधे लगाए जा सकते हैं. किसानों को इससे अच्छा मुनाफा भी मिलता है. पश्चिमी राजस्थान और यहां की जलवायु खजूर की इस किस्म के लिए अनुकूल नहीं होने के बावजूद इस वर्ष इसकी अच्छी पैदावार हुई है.

इस अनोखे नवाचार और लगातार किसानों की मेहनत के जरिए पश्चिमी राजस्थान के किसानों को बेहतर आमदनी देने के लिए भी यह कारगर साबित हो रही है. इस एडीपी-1 किस्म के खजूर की खेती करनेवाले किसानों ने भी कहा कि इससे उनको ज्यादा फायदा हुआ है.

इस प्रोजेक्ट के प्रभारी और वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर धीरज कुमार सिंह ने बताया कि रिसर्च के परिणाम बहुत ही सफल सकारात्मक व उत्साहवर्धक मिले इसका उत्पादन बढते क्रम में मिल रहा है. इस किस्म के फल का रंग लाल सुर्ख होता है तथा उसमें भरपूर मिठास होती है. खजूर के पौधे से 30 वर्ष तक उपज ली जा सकती है. एक पेड़ पर सात से दस तक गुच्छे लगते हैं. प्रति पेड़ 60 से 180 किलो की उपज हो रही है.

पानी और गर्मी जरूरी
एडीपी-1 किस्म के खजूर में पुष्पण होने पर नर के पौधों से पराग लेकर मादा पौधों के फूलों में हाथों द्वारा परागण क्रिया करना जरूरी है. यह प्रक्रिया हर वर्ष करनी होती है. एक हैक्टर में लगभग 7 नर के पौधे होने चाहिए. इसकी खेती शुष्क और अर्धशुष्क जलवायु तथा 7 से 8.5 पीएच वाली मिट्टी में की जा सकती है. खजूर के पांव पानी में और सिर धूप में रहता है. यानी पानी के साथ-साथ इसको तेज गर्मी भी चाहिए.

रिएक्ट करें
♥️  👍 👎 😊 🌸      

https://whatsapp.com/channel/0029VabCX4VDOQIUcf0b4w14
https://www.facebook.com/jagrukjantanews/
https://www.instagram.com/jagruk_janta/
https://chat.whatsapp.com/I7ImEiiBWrJIRP9LTTv2hG
https://www.youtube.com/@jagrukjantahindinewspaper7414

Date:

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (NIA) की ओपीडी में ‘ब्रेस्टफीडिंग कक्ष’ का शुभारंभ

विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान सप्ताहभर चले जनजागरूकता, प्रशिक्षण...

खेत गन्ने और पपीते का, खेती हो रही थी नशे की! 1555 पौधे जब्त

आरोपी ने खेत में गन्ने और पपीते इस तरह...