बीकानेर : PBM ट्रोमा में भर्ती आठ वर्षीय बच्चा मानवता के नाम पर रो रहा खून के आंसू,फरिश्ते कर रहे मदद, शासन प्रशासन ने मूंदी आंखे!

-नारायण उपाध्याय
बीकानेर@जागरूक जनता। बीकानेर के पीबीएम हॉस्पिटल के ट्रोमा सेंटर में बैड पर लेटे आठ वर्षीय बच्चे की हालत देखकर रूह कांप सी जाती है, क्योंकि जिस तरह से बच्चे के साथ हैवानियत की गई उसको देखकर मानवता शर्मसार हो जाएगी। बच्चे के साथ जबरदस्त तरीके से मारपीट की गई है,जिससे उसके चेहरे पर घाव हो गए है वंही पूरे बदन पर हैवानियत के निशान जम गए है। मारपीट का यह सिलसिला यंही नही रुका, वरन बच्चे की जीभ का एक हिस्सा काट दिया गया । गंभीर रूप से घायल बच्चे को सूरतगढ़ पुलिस ने पीबीएम के ट्रोमा में भर्ती कराया है, जंहा बीते दो दिनों उसका इलाज चल रहा है, इस बच्चे की देखभाल असहाय सेवा संस्थान के राजकुमार खड़गावत व उनकी टीम कर रही है । इस नेक काम मे पीबीएम के वरिष्ठ डॉक्टर भी पर्दे के पीछे से मदद कर रहे है ।

असहाय सेवा संस्थान के राजकुमार खड़गावत ने जागरूक जनता से बातचीत में बताया सूरतगढ़ में होली के दिन जंगल के पास से होकर दो महिलाएं होलिका दहन कार्यक्रम में जा रही थी, तभी उन्होंने लावारिस हालत में हाथ पैर बंधे एक बच्चे को पड़ा देखा तो आसपास के ग्रामीणों को बताया। इसकी सूचना पर पुलिस ने मौके पर जाकर बच्चे की नब्ज को टटोला तो देखा कि बच्चे की सांसें चल रही थी। जिसके बाद उसके हाथ पैर खोलकर उस पर पानी के छींटे दिए गए और तत्काल पुलिस उसे सूरतगढ़ अस्पताल लेकर आई। गंभीर हालत होने के कारण उसे श्रीगंगानगर रेफर कर दिया गया, जंहा से डॉक्टरों ने उसे पीबीएम ट्रोमा रैफर कर दिया। खड़गावत ने बताया उन्हें जैसे ही इस बच्चे के बारे में पता चला वे फौरन अपनी टीम के साथ पीबीएम पहुंच गए, लेकिन जैसे ही पता चला कि इस बच्चे के साथ परिवार का कोई सदस्य नही है, मन बुरी तरह विचलित हो गया, और निश्चय किया कि जब तक इसका पुरी तरह से इलाज नही हो जाता तब तक उसकी देखभाल करेंगे । खड़गावत व उनकी टीम के सदस्य बारी बारी से उसकी देखभाल कर रहे है। वंही ओटी के लिए खड़गावत ने डॉक्टरों को बोल दिया है कि बच्चे के इलाज के लिए बाहर से जो भी मेडिकल उपकरण व दवाइयां लानी पड़े तो बेफिक्र होकर बताये वो उन्हें लाकर देंगे।

राजकुमार खड़गावत के अनुसार बच्चे की हालत स्थिर है, वह बोलने की कोशिश कर रहा है लेकिन पूरे तरीके से बोल नही पा रहा है, बच्चे की टूटी फूटी जुबां से अभी तक केवल यह ही पता चल पाया है कि उसके घर नही है,वह अपने परिवार के साथ सूरतगढ़ के रेलवे जंक्शन के पास रहता था। पता चला है कि किसी बाबा नामक व्यक्ति ने उसके साथ मारपीट की ओर उसकी जुबान काट ली, लेकिन यह अभी तक स्पष्ट नही हो पाया है । बच्चे की हालत देखकर लग रहा है कि उसे कई दिन भूखा रखा गया है। बच्चे से जब परिजनों के पास छोड़ने के कहा जाता है तो वो नर्स व डॉक्टर के पास रहने के लिए बोलता है जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि हो ना हो बच्चा जिसे बाबा कह रहा हो वो शायद उसके परिजन हो, लेकिन अभी कुछ भी स्पष्ट नही हुआ है। खड़गावत ने बताया बच्चा बार बार खाने के लिए बोल रहा है लेकिन डॉक्टरों ने बच्चे की गंभीर स्थिति को देखकर कुछ भी खिलाने से मना किया है । बच्चे को शनिवार को ऑपरेशन के लिए ओटी ले जाया गया था, लेकिन स्थिति सामान्य ना होने कारण अब रविवार को उसका ऑपरेशन किया जाएगा। सूरतगढ़ पुलिस भी  इस मामले में कुछ भी कहने की स्थिति में नही है पुलिस कह रही है कि आरोपियों की धरपकड़ के लिए टीमें गठित की गई है, वंही सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे है।

मानवता में अब रह गया केवल दिखावा!
मानवीय संवेदना को तार तार करने वाली हैवानियत भरी घटना जिस बच्चे के साथ घटित हुई है उसकी सुध लेने शासन प्रशासन का कोई भी उच्चाधिकारी और मंत्री अब तक अस्पताल नही पहुंचे है, जबकि इसकी जगह कोई और मरीज होता तो अब तक ना जाने कितनी गाड़ियां व मंत्री,अधिकारी अखबार के पन्नो पर फलां फलां निर्देश और हिदायतें डॉक्टरों को देते हुए देखे जा रहे होते, बहरहाल यंहा ये सीन कस्टमाइज नही होगा क्योंकि ये एक लावारिश बच्चा है, जिसके परिजनों का अता पता नही या यू कहें कि “हमे तो अपनो ने लूटा गैरों में कंहा दम था, हमारी किश्ती ही वंहा डूबी जंहा पानी कम था” । यानि कि जब परिजनों ने मुंह मोड़ लिया है तो भला जिम्मेदारों से क्या उम्मीद रखी जा सकती है ।फिलहाल बच्चे की देखभाल असहाय सेवा संस्थान के राजकुमार खड़गावत, अशोक कुमार कच्छावा, रमजान व त्रिलोक कर रहे है।

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