महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर राष्ट्रीय मंथन, जयपुर में विशेषज्ञों ने साझा किए नवीन शोध और उपचार के उपाय

जयपुर। इंडियन साइकियाट्रिक सोसायटी के वूमेन मेंटल हेल्थ स्पेशियलिटी सेक्शन और रिसर्च एजुकेशन एंड सर्विस ट्रस्ट ( REAST ) और गौतम अस्पताल के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को जयपुर के होटल गोल्डन ट्यूलिप में 10वीं वार्षिक राष्ट्रीय महिला मानसिक स्वास्थ्य संगोष्ठी-2026 का आयोजन किया गया। देशभर से मनोचिकित्सकों, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और चिकित्सा विद्यार्थियों ने इसमें भाग लिया।

इस वर्ष की संगोष्ठी का विषय “Invisible Burdens, Visible Strengths: Redefining Women’s Mental Health” रखा गया। इसका उद्देश्य महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी अनदेखी चुनौतियों को सामने लाना और उनके समाधान पर वैज्ञानिक चर्चा करना रहा।

दिनभर चले विभिन्न सत्रों में डिजिटल युग में मानसिक स्वास्थ्य, दीर्घकालिक दर्द, किशोरावस्था से रजोनिवृत्ति तक महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य, सहायक प्रजनन (Assisted Reproduction), यौन स्वास्थ्य, ट्रॉमा, माइंडफुलनेस, मेटाबॉलिक स्वास्थ्य और सफल महिलाओं पर बढ़ते मानसिक दबाव जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और नवीन शोध प्रस्तुत किए।

जयपुर की वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. अनीता गौतम ने संगोष्ठी में “महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य में यौन स्वास्थ्य का समावेश : चुनौतियां और अवसर” विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि महिलाओं के संपूर्ण मानसिक स्वास्थ्य के लिए यौन स्वास्थ्य पर खुलकर संवाद, जागरूकता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समय पर परामर्श और उचित उपचार से महिलाओं के जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकता है।

विशेषज्ञों ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। समय पर पहचान, परिवार का सहयोग, सही परामर्श और वैज्ञानिक उपचार से अधिकांश मानसिक समस्याओं का सफलतापूर्वक इलाज संभव है। संगोष्ठी में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक कलंक को समाप्त करने और जरूरत पड़ने पर बिना संकोच विशेषज्ञ से सलाह लेने का भी संदेश दिया गया।

विशेषज्ञों ने संगोष्ठी में बताया कि –

  • लगातार उदासी, चिंता, अनिद्रा या तनाव को सामान्य मानकर नजरअंदाज न करें।
  • प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट व्यायाम, योग या ध्यान करें।
  • 7–8 घंटे की पर्याप्त नींद और संतुलित आहार लें।
  • परिवार और मित्रों से खुलकर अपनी भावनाएं साझा करें।
  • सोशल मीडिया का सीमित और संतुलित उपयोग करें।
  • यदि तनाव, अवसाद, घबराहट या व्यवहार में बदलाव दो सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे, तो मनोचिकित्सक या क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट से परामर्श अवश्य लें।
  • मानसिक बीमारियां उपचार योग्य हैं और समय पर इलाज से सामान्य एवं स्वस्थ जीवन संभव है।

संगोष्ठी में शोध पत्र, पोस्टर प्रस्तुति, कार्यशालाएं और पैनल चर्चाएं भी आयोजित की गईं, जिनमें महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाने पर विस्तृत मंथन किया गया

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