इंदिरा गांधी की सुरक्षा का जिम्मा संभाला, अब बनेंगे मिजोरम के CM, जानिए कौन हैं लालदुहोमा

जोरम पीपुल्स मूवमेंट को मिजोरम की जनता ने चुनाव में प्रचंड बहुमत दिया है जिसके बाद पार्टी चीफ लालदुहोमा का सीएम बनाना तय है। आइये जानते हैं लालदुहोमा के राजनीतिक जीवन के बारे में…

नई दिल्ली. मिजोरम में जोरम पीपुल्स मूवमेंट को मिली शानदार जीत के बाद यह लगभग तय हो गया है कि पार्टी चीफ लालदुहोमा ही प्रदेश का अगले सीएम बनेंगे। आईपीएस अधिकारी से नेता बने लालदुहोमा अपने नेतृत्व में 40 सदस्यीय मिजोरम विधानसभा में 27 सीटें जिताने के बाद हर जगह सुर्ख़ियों में छाए हुए हैं। बहुकोणीय मुकाबले में लालदुहोमा ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी जे. माल्सावमजुआला वानचावंग जो एमएनएफ के उम्मीदवार थे, उनको 2,983 मतों के अंतर से हराकर अपनी सेरछिप सीट बरकरार रखी। प्रचंड जनादेश मिलने के बाद उन्होंने मीडिया को बताया कि मंगलवार या बुधवार को राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति से मिलकर वह सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।

इंदिरा गांधी से प्रभावित होकर राजनीति में आए

पूर्व आईपीएस अधिकारी रह चुके लालदुहोमा ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सुरक्षा प्रभारी के रूप में काम किया और 1982 एशियाई खेलों की आयोजन समिति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इंदिरा गांधी से प्रभावित होकर लालदुहोमा 1984 में कांग्रेस में शामिल हो गए।

मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) को मुख्यधारा में लाने और मिजोरम में शांति स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले लालदुहोमा ने कहा, “इंदिरा गांधी ने मुझे लालडेंगा के नेतृत्व वाले मिज़ो नेशनल फ्रंट के नेतृत्व वाले विद्रोह को हल करने का काम सौंपा था। मेरी मुलाकात लालडेंगा से लंदन में हुई जहां वह स्व-निर्वासन में थे। मैंने उन्हें उग्रवाद को खत्म करने के लिए आगे आने के लिए राजी किया।”

लालदुहोमा के कारण ही मिज़ो शांति समझौते पर हस्ताक्षर हुआ

लालदुहोमा के अथक प्रयासों के कारण और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की पहल पर जून 1986 में मिज़ो शांति समझौते पर हस्ताक्षर किया गया। इस कारण ही मिज़ोरम में दो दशकों से चला आ रहा संघर्ष और विद्रोह का अंत हुआ। लालदुहोमा को कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया और मिजोरम की एकमात्र लोकसभा सीट से वो सांसद चुने गए, लेकिन जब 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या हुई उसके बाद कांग्रेस पार्टी के साथ उनकी तालमेल बिगड़ गई और उन्होंने पार्टी छोड़ दी। इसके बाद 1988 में दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित कर दिए गए।

अपनी पार्टी बनाई और लोगों का विश्वास जीता

कुछ वर्ष संघर्ष करने के बाद 1997 में लालदुहोमा ने ज़ोरम नेशनलिस्ट पार्टी बनाई और 2003 में वह रातू सीट से एमएलए चुने गए। पिछले विधानसभा चुनाव से पहले 2018 में जेडएनएम ने छह स्थानीय पार्टियों के साथ मिलकर जेडपीएम का गठन किया, एक गठबंधन समूह जिसने उन्हें मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश किया।

पिछले कुछ वर्षों के दौरान, जेडपीएम ने कई स्थानीय चुनावों में बेहतर प्रदर्शन किया है और मिजोरम में पारंपरिक रूप से दोहरे दल की चुनावी लड़ाई में एक चुनौतीपूर्ण तीसरे मोर्चे के रूप में उभरा है। कांग्रेस और एमएनएफ मिजोरम पर निशाना साधते हुए लालदुहोमा ने कहा कि दोनों पार्टियां लगभग चार दशकों से सत्ता में हैं, लेकिन उन्होंने मिजो लोगों और राज्य की बेहतरी के लिए कुछ नहीं किया है।

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