जब शिक्षक अपनी कक्षा में गया तब जाके आज चंद्रयान अपनी कक्षा में गया है – कृष्णानंद तिवाड़ी

केकड़ी @ जागरूक जनता (विजेन्द्र पाराशर)।आज देश भर शिक्षक दिवस की धूम है. हर कोई शिक्षकों को बधाई दे रहे है और उनका स्वागत कर रहे है. लेकिन केकड़ी में आज एक विशेष बात देखने को मिली वो है सेवानिवृत शिक्षकों का सम्मान. केकड़ी के भाजपा नेता कृष्णानंद तिवाड़ी द्वारा हर वर्ष क्षेत्र में सभी स्कूल में जाकर शिक्षकों का सम्मान करते आयें है. लेकिन इस वर्ष कृष्णानंद तिवाड़ी द्वारा पूर्व शिक्षकों को निज कार्यालय पर आमंत्रण देकर उनका सम्मान किया गया, यह एक विशेष बात है. इस बात पर कई पूर्व शिक्षकों ने अचंभिता भी जाहिर करी है. शिक्षकों ने कृष्णानंद तिवाड़ी को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहाँ अभी तक सेवा निवृत होने के बाद में किसी भी मंच या व्यक्तिविशेष द्वारा हमें सम्मानित नही किया गया, आज आपके द्वारा किये गए सम्मान से अभिभूत है. समाज में विकास की और अग्रसर नयी पीढ़ी को शिक्षकों द्वारा दिया गया मार्गदर्शन एक सशक्त भारत के निर्माण में सहयोगी रहेगा. उपस्थित सभी सेवा निवृत शिक्षकों ने अपने सेवाकाल में की गई उपलाब्धियों के बारें में विस्तार से चर्चा की एवं समाज में व्याप्त कुरूतियों एवं अवधारणा को दूर करने के लिए प्रन लिया. शिक्षकों के द्वारा भाजपा नेता तिवाड़ी द्वारा किये जा रहे समाज निर्माण पर्यावरण एवं क्षेत्र के विकास कार्यों की मुक्त कण से प्रसंसा की गई. समारोह क्षेत्र के सरवाड़, फतेहगढ़, बोरडा, सराना, तान्तोटी, सावर, जुनिया, क्षेत्र से पधारें शिक्षकों ने भाजपा नेता तिवाड़ी द्वारा लगायें गए पौधे की फोटोयें भी दिखाई.

कृष्णानंद तिवाड़ी ने शिक्षकों को सम्मानित करते हुए कहा है कि ‘एक शिक्षक जब कई अपनी अपनी कक्षा में गया तब जाके आज चंद्रयान अपनी कक्षा में गया है’. कृष्णानंद तिवाड़ी ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि अगर आज कुछ करने के लिए सोचते भी है तो उसमे आपकी देन है. एक शिक्षक ही है जो समाज को बनाता है. मां-पिताजी हमें जन्म देते हैं. लेकिन, सही-गलत का फर्क शिक्षक ही हमें सिखाते है. जिससे हमारा चरित्र निर्माण तो होता ही है साथ ही साथ सही मार्ग का दर्शन भी मिलता है. जो हमारे उज्जवल भविष्य के लिए बेहद जरूरी है. यही कारण है कि शिक्षकों का स्थान माता-पिता से भी ऊपर होते हैं. कोरोना काल में हमारी शिक्षा व्यवस्था पर खासा प्रभाव पड़ा है. बावजूद इसके शिक्षा के बिना हम अपने जीवन की कल्पना नहीं कर सकते हैं. आने वाले समय में शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव होने वाली है. लेकिन, सभी छात्रों को निस्वार्थ भाव से एक शिक्षक ही शिक्षा दे सकती है. वे हमारे अंदर की बुराइयों को दूर कर हमें एक बेहतर इंसान बनाने के लिए काफी मेहनत करते हैं. अत: शिक्षकों के इस योगदान के लिए हमें अपने शिक्षकों का नमन करना चाहिए और उन्हें आदर व सम्मान करना चाहिए. शिक्षक दिवस पर सभी शिक्षकों का आभार व्यक्त करते हुए मैं आप सभी को नमन करता हूँ. कार्यक्रम में गणेश लाल शर्मा, भानु शर्मा, मोहम्मद हुसैन अंसारी, कैलाश शर्मा, भगवत सिंह, कृष्ण गोपाल, ब्रजराज शर्मा, ओम प्रकाश कुमावत, कैलाश पारीक, चंद्र प्रकाश, धर्मचंद जैन, कृष्ण द्विवेदी, प्रेमचंद शर्मा, रामगोपाल पारीक, अशोक व्यास, रूपचंद पांडे, सीता पांडे, अनीता भाटी, पुष्पा व्यास, रामगोपाल सैनी आदि शिक्षकों का सम्मान किया गया।

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