साहित्यिक संस्था द्वारा राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति की ओर से मंगलवार को सृजन पुरस्कार समारोह का आयोजन किया गया

साहित्यिक संस्था द्वारा राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति की ओर से मंगलवार को सृजन पुरस्कार समारोह का आयोजन किया गया

बीकानेर@जागरूक जनता। साहित्यिक संस्था राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति की ओर से मंगलवार को हिन्दी दिवस के अवसर पर  सृजन पुरस्कार समारोह का आयोजन किया गया। इसमें संस्था की सर्वोच्च उपाधि मलाराम माली साहित्यश्री एवं डॉ. नन्दलाल महर्षि हिन्दी, पं.मुखराम सिखवाल स्मृति राजस्थानी साहित्य सृजन, शिव प्रसाद सिखवाल महिला लेखन व रामकिशन उपाध्याय स्मृति समाज सेवा सम्मान से अलंकृत किया गया। इस अवसर पर हिन्दी जन भाषा से राजभाषा की यात्रा पर हिन्दी विषय पर संगोष्ठी भी हुई।
श्रीडूंगरगढ़ महाविद्यालय में हुए इस समारोह में मुख्य अतिथि राजस्थान मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष गोपाल कृष्ण व्यास ने कहा कि हिन्दी देश में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। इसको प्रचारित करने के लिए साहित्यिक संस्थाएं अपना योगदान दे रही हैै। यह भाषा जमीन एवं जन विचारों से निकली हुई भाषा है। अध्यक्षता करते हुए समालोचक मालचन्द तिवाड़ी ने कहा कि साहित्यकार समाज को  दर्पण दिखाता है। हिन्दी व्यक्ति का शरीर है और क्षेत्रीय भाषाएं इसका अंग है। हिन्दी एक विकसित एवं व्यापक भाषा है। हम अपनी भाषा, संस्कृति व अस्मिता को हिन्दी भाषा से ही बचा सकते है। उन्होंने कहा कि हिन्दी बाजारवाद की भाषा है।
समारोह के विशिष्ट अतिथि जोधपुर के साहित्यकार दशरथ सोलंकी ने कहा कि हिन्दी भाषा साहित्य के क्षेत्र में अनेक प्रतिमान स्थापित कर रही है। यह आनन्द की भाषा है और इसमें क्षेत्रीय भाषाओं का समावेश है। विषय प्रवर्तन करते हुए मधुमती के सम्पादक बृजरतन जोशी ने कहा कि राजभाषा व राष्ट्र भाषा के बीच हिन्दी भाषा का शोषण हो रहा है और भाषा के विकास की गति धीमी है। भाषा समाज व संस्कृति का आधार व देश के विकास का आयाम है। साहित्यश्री से पुरस्कृत साहित्यकार राजाराम भादू ने कहा कि लेखक वैचारिक आधार के बिना कालजयी रचना का निर्माण नहीं कर सकता। साहित्य मनोरंजन व स्वान्त सुखाय का साधन नहीं है, बल्कि साहित्य का उद्देश्य होना चाहिए। संस्था के अध्यक्ष श्याम महर्षि ने भाषा के विकास में संस्थागत एवं जन सहयोग की हिमायत करते हुए भाषायी विकास की बात कही। युवा साहित्यकार रवि पुरोहित ने कहा कि यदि कोई साहित्यकार किसी सामाजिक विद्रुप या मू्रल्यगत विचलन के विरूद्ध आवाज नहीं उठाए तो यह सांस्कृतिक  हमले का ही प्रतिरूप है। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रामकृष्ण शर्मा ने अतिथियों का आभार जताया।
इस अवसर पर उपखण्ड अधिकारी दिव्या चौधरी, उप अधीक्षक दिनेश कुमार, पूर्व प्रधान दानाराम भाम्भू, श्याम सुन्दर आर्य, रामचन्द्र राठी, बजरंग शर्मा, डॉ. मदन सैनी, विनोद सिखवाल, महावीर प्रसाद माली, डॉ. चेतन स्वामी, एस.कुमार सिंधी, कान्तिप्रसाद उपाध्याय, करणी सिंह बाना, विजयराज सेठिया, दयाशंकर शर्मा, श्रीगोपाल राठी, राजेन्द्र सोनी, तोलाराम मारू आदि मौजूद थे।
पुरस्कृत हुए साहित्यकार सामाजिक सराकारों के लिए मलाराम माली की स्मृति में दी जाने वाली संस्था की सर्वोच्च उपाधि साहित्यश्री से जयपुर के राजाराम भादू को अलंकृत किया गया। इसी प्रकार डॉ. नन्दलाल महर्षि स्मृति हिन्दी सृजन पुरस्कार श्रीगंगानगर के डॉ.कृष्ण कुमार आशु, पं. मुखराम सिखवाल स्मृति राजस्थानी साहित्य सृजन पुरस्कार बीकानेर की मोनिका गौड़, शिव प्रसाद सिखवाल स्मृति महिला लेखन पुरस्कार जयपुर की उमा व रामकिशन उपाध्याय स्मृति समाज सेवा सम्मान से अलवर के डॉ. वीरेन्द्र विद्रोही को पुरस्कृत किया गया। यह पुरस्कार मानवाधिकार  आयोग के अध्यक्ष गोपाल कृष्ण व्यास, मालचन्द तिवाड़ी, दशरथ सोलंकी, बृजरतन जोशी, डॉ. चेतन स्वामी, संस्था अध्यक्ष श्याम महर्षि, मंत्री बजरंग शर्मा, महावीर माली ने प्रदान किया। इस सम्मान स्वरूप ग्यारह-ग्यारह हजार रुपए, प्रशस्ति पत्र, शॉल एवं प्रतीक चिह्न दिया गया।
कैप्शन : श्रीडूंगरगढ़ में राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति की ओर से पुरस्कृत साहित्यकार एवं उपस्थित विद्वजन।

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