भारजा में कंपनी का पुतला दहन, महिलाओं ने भी जताया आक्रोश — कहा, Kheti की भूमि नहीं बनने देंगे बंजर

  • प्रस्तावित खनन परियोजना के खिलाफ ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
  • खनन परियोजना के खिलाफ फूटा आक्रोश: भारजा में ग्रामीणों ने जलाया कंपनी का पुतला, सरकार व नेताओं पर साधा निशाना
  • “500 करोड़ का सच बताए सरकार” — ग्रामीणों के तीखे सवाल

सिरोही। पिण्डवाड़ा तहसील के वाटेरा, भीमाना, भारजा और रोहिड़ा क्षेत्र में प्रस्तावित चूना पत्थर खनन परियोजना के विरोध में ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार को भारजा गांव में ग्रामीणों ने मेसर्स कमलेश मेटाकास्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का विशालकाय पुतला बनाकर बस स्टैंड पर जलाया और कंपनी के खिलाफ जमकर हाय-हाय के नारे लगाए।
इस दौरान गांव की महिलाएं भी भारी संख्या में मौजूद रहीं। महिलाओं ने छाती पीटकर आक्रोश व्यक्त किया और सिस्टम में बैठे जिम्मेदारों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। ग्रामीणों ने कहा कि अब वे किसी भी कीमत पर इस परियोजना को स्वीकार नहीं करेंगे।

“500 करोड़ का सच बताए सरकार” — ग्रामीणों के तीखे सवाल

ग्रामीणों ने सिरोही भाजपा के जिला मंत्री पवन राठौड़ के 500 करोड़ रुपये के बयान पर भी कड़े सवाल उठाए।
ग्रामीणों ने पूछा— “यह 500 करोड़ रुपये आखिर किन-किन लोगों में बांटे गए? क्योंकि भाजपा जिला महामंत्री ने स्वयं गांव के बीच में माइक पर कहा था की 500 करोड़ रूपये तो केवल मुंह बंद करने के आये है।
वही मुख्यमंत्री इस मामले पर चुप क्यों हैं? खेती की उपजाऊ भूमि को बंजर बताने की रिपोर्ट आखिर किसने तैयार की?”
ग्रामीणों का कहना है कि करीब डेढ़ महीने से क्षेत्रवासी सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन न तो राज्य सरकार और न ही स्थानीय जनप्रतिनिधि उनकी पीड़ा सुनने पहुंचे हैं।

किस बड़े नेता का हाथ ग्रामीणों ने उठाए गंभीर सवाल..?

गांव के लोगों ने आरोप लगाया कि इस खनन परियोजना को गुप्त तरीके से आगे बढ़ाया गया है, जिससे संदेह होता है कि इसके पीछे किसी बड़े नेता या अधिकारी का हाथ तो नहीं है..? “इतनी बड़ी खनन परियोजना को बिना जनसहमति और पारदर्शिता के आगे क्यों बढ़ाया गया?”

मतदान के बहिष्कार की चेतावनी

ग्रामीणों ने साफ कहा कि अगर सरकार ने इस परियोजना को निरस्त नहीं किया, तो वे आगामी समस्त चुनावों में मतदान का बहिष्कार करेंगे।

नेताओं की दोहरी भूमिका पर जनता नाराज

ग्रामीणों ने स्थानीय व जिले के जनप्रतिनिधियों पर भी उपेक्षा और निष्क्रियता के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जब जनता आंदोलन कर रही है, तब नेता मैदान से गायब हैं।
“खेलकूद प्रतियोगिताओं और मंचीय कार्यक्रमों में तो आने का समय है, लेकिन जनता की तकलीफ सुनने का समय नही।
लोगों ने चेतावनी दी कि जब तक परियोजना पूरी तरह रद्द नहीं होती, नेताओं और कंपनी के पुतले जलाने का सिलसिला जारी रहेगा।

800 हेक्टेयर भूमि पर प्रस्तावित परियोजना

जानकारी के अनुसार, पिण्डवाड़ा क्षेत्र के वाटेरा, भीमाना, रोहिड़ा, भारजा, करीब 800.9935 हेक्टेयर भूमि पर चूना पत्थर खनन परियोजना प्रस्तावित है। ग्रामीणों का कहना है कि यह परियोजना खेती, पर्यावरण और जलस्रोतों के लिए घातक सिद्ध होगी। और जल, जमीन और जंगल तबाह हो जायेगे। उनका कहना है कि यह लड़ाई अब अस्तित्व और आने वाली पीढ़ियों की रक्षा की लड़ाई बन चुकी है।
ग्रामीणों ने दो टूक कहा कि जब तक सरकार इस परियोजना को पूर्ण रूप से निरस्त नहीं करती, आंदोलन इसी तरह जारी रहेगा। नेताओं की कार्यशैली और भूमिया पर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाये है।

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