जीएसटी 5 से बढ़ाकर 12 प्रतिशत: कपड़े और जूते पर जीएसटी खत्म कर देगा कपड़ा कारोबार

सरकार की ओर से कपड़ा ( garments ) और जूता ( shoes and sandals ) पर जीएसटी ( GST ) 5 से बढ़ाकर 12 प्रतिशत किए जाने का पुरजोर विरोध शुरू हो गया है। इसी कड़ी में राजस्थान प्रदेश कान्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ( cait ) की ओर से शुक्रवार को धरने का आयोजन किया गया, जिसमें व्यापारियों ने जीएसटी वृद्धि का पूरजोर विरोध किया।

जयपुर। सरकार की ओर से कपड़ा और जूता पर जीएसटी 5 से बढ़ाकर 12 प्रतिशत किए जाने का पुरजोर विरोध शुरू हो गया है। इसी कड़ी में राजस्थान प्रदेश कान्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स की ओर से शुक्रवार को धरने का आयोजन किया गया, जिसमें व्यापारियों ने जीएसटी वृद्धि का पूरजोर विरोध किया। व्यापारियों ने कहा कि हम सबने किसान आंदोलन होते देखा है।अभी वह आंदोलन खत्म भी नहीं हुआ है, उस पर दूसरा आंदोलन कराने की तैयारी सरकार कर रही है।

पेट्रोल-डीजल के दाम बढऩे के कारण ट्रांसपोटेशन का खर्चा बढ़ा, जिसके कारण विभिन्न कंपनियों ने फुटवियर व कपड़ों के दाम छह माह में 15 फीसदी तक बढ़ा दिए है। सात फीसद जीएसटी बढऩे पर कीमत ओर बढ़ जाएंगी। 700 का जूता 850 का हो चुका है, जो 1000 रुपए का हो जाएगा। यह बढ़ी हुई कीमतें जहां व्यापारियों लिए परेशानी का कारण बनेंगी, क्योंकि सेल घट जाएगी। वहीं सबसे बड़ी परेशान गरीब व मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए होगी। क्योंकि बढ़े हुए कर का वास्तविक भार तो उन्हीं के ऊपर होगा।

केंद्र सरकार ने कपड़ा एवं जूता (1000 से कम मूल्य पर) पर जीएसटी की दर पांच से बढ़ाकर 12 प्रतिशत किए जाने का फैसला लिया है। यह बढ़ी हुई दरें एक जनवरी 2022 से लागू की जाएंगी। जिसे लेकर व्यापारियों ने अभी से विरोध शुरू कर दिया है।

राजस्थान कपड़ा साड़ी व्यवसाय संघ के उपाध्यक्ष विरेन्द्र राणा का कहना है कि लोग 1000 से कम के ही जूते चप्पल पहनते हैं। महंगाई बढऩे से आमजन की मुश्किलो में अत्याधिक वृद्घि हो जाएगी। कपड़े पर महंगाई पहले से ही 25 प्रतिशत हो चुकी है। ग्राहक कपड़ा लेने में हिचकता है कि कपड़े के दाम इतने कैसे बढ़ गए। इस कर बढ़ोत्तरी से कपड़ा 37 से 40 प्रतिशत तक महंगा हो जाएगा। रोटी, कपड़ा, मकान व्यक्ति की मूलभूत आवश्यकता है, सरकार भी यह मानती है। फिर भी इस पर कर बढ़ोतरी की जा रही है। हमें इस पर लड़ाई लडऩी होगी। जनता को होर्डिंग लगाकर यह बताना होगा कि, कर वृद्घि आमजन के खिलाफ है।

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