- सिरोही में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गुड गवर्नेंस पर अधिकारी लगा रहें पलीता
- पंचायती राज से जुड़ी जानकारी मांगने पर जिला परिषद CEO दुर्गा शंकर मीणा का जवाब चर्चा में, मंत्री और कलेक्टर तक पहुंचा मामला

सिरोही. राजस्थान में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार लगातार गुड गवर्नेंस, पारदर्शिता और जवाबदेह प्रशासन को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करने का संदेश दे रही है,स्वयं मुख्यमंत्री भी इसको लेकर बेहद गंभीर है। ऐसे में सिरोही जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) दुर्गा शंकर मीणा के मीडिया को दिए जवाब ने प्रशासनिक कार्यशैली और सूचना उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दरअसल, पंचायती राज से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण विषयों को लेकर मीडिया की ओर से जिला परिषद के CEO से जानकारी चाही गई थी। आरोप है कि जानकारी उपलब्ध कराने के बजाय CEO ने कहा कि “मेरे पास जानकारी देने का समय नहीं है।” अधिकारी के इस जवाब के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि जिला परिषद के मुखिया स्तर के अधिकारी ही मीडिया के सवालों और जानकारी की मांग को लेकर इस तरह का रवैया अपनाएंगे, तो आम जनता तक सरकारी योजनाओं और पंचायती राज व्यवस्था से जुड़ी जानकारी कैसे पहुंचेगी?2
‘मीडिया सरकार और जनता के बीच सेतु’
लोकतांत्रिक व्यवस्था में मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। मीडिया का काम केवल खबरें प्रकाशित करना नहीं, बल्कि जनता से जुड़े सवालों को सरकार और प्रशासन के सामने रखना भी है। सरकारी योजनाओं, विकास कार्यों, प्रशासनिक निर्णयों और कमियों से जुड़े सवाल पूछना इसी लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।
ऐसे में सिरोही जिला परिषद के जिम्मेदार अधिकारी का मीडिया के प्रति कथित तौर पर इस तरह का रवैया चर्चा का विषय बन गया है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब पंचायती राज विभाग के जिला स्तर के जिम्मेदार अधिकारी ही जानकारी उपलब्ध कराने में रुचि नहीं दिखाएंगे, तो विभाग से जुड़ी आधिकारिक जानकारी आखिर कौन देगा?
मामला मंत्री तक पहुंचा, राज्य मंत्री ने कहा—‘करता हूं बात’
CEO के बयान को लेकर मामला पंचायती राज राज्य मंत्री ओटाराम देवासी के संज्ञान में भी पहुंचा। जानकारी के अनुसार, मंत्री ने मामले को लेकर “करता हूं बात” कहते हुए संज्ञान लेने की बात कही है।
वहीं, सिरोही जिला कलेक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर से जब इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि “CEO से बात करता हूं, जानकारी देंगे।”
कुछ माह बाद प्रस्तावित पंचायती राज चुनाव, ऐसे अधिकारी भाजपा कप पहुंचा सकते है भारी भारी नुकसान.!
इस पूरे घटनाक्रम को आगामी पंचायती राज चुनावों के मद्देनजर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कुछ माह बाद पंचायती राज चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली और जनता से संवाद का सीधा असर सरकार की छवि पर पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार जहां पारदर्शी और जवाबदेह शासन का संदेश दे रही है, वहीं विपक्ष और जनता के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जमीनी स्तर पर सरकारी व्यवस्था में गुड गवर्नेंस कितना प्रभावी है?
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार और पंचायती राज विभाग इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं। क्या अधिकारी को मीडिया और जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएंगे या मामले को महज एक सामान्य घटनाक्रम मानकर छोड़ दिया जाएगा?
फिलहाल, सिरोही जिला परिषद CEO के कथित बयान को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है और ‘गुड गवर्नेंस बनाम अधिकारी की कार्यशैली’ का यह सवाल आने वाले दिनों में और गरमा सकता है।
रिपोर्ट : तुषार पुरोहित सिरोही
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