सिरोही के पिण्डवाड़ा तहसील क्षेत्र में प्रस्तावित खनन परियोजना को लेकर ग्रामीणों का फूटा आक्रोश

पर्यावरणीय जनसुनवाई से पहले वाटेरा सहित कई गांवों के लोग लामबंद, कल सामूहिक आपत्ति दर्ज कराने की तैयारी

सिरोही @ जागरूक जनता। सिरोही ज़िले के पिण्डवाड़ा तहसील क्षेत्र में प्रस्तावित चूना पत्थर (Limestone) खनन परियोजना को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। वाटेरा, रोहिड़ा, भारजा, तरुंगी, डोलीफली, पिपेला और खाराडोली सहित आसपास के गांवों के लोग कंपनी के खिलाफ एकजुट हो गए हैं। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि इस परियोजना को मंजूरी नहीं दी जाएगी।

कंपनी के खिलाफ लामबंदी

मैसर्स कमलेश मेटा कास्ट प्रा.लि. को प्रस्तावित 800.9935 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खनन का आवंटन किया जाना है। लेकिन ग्रामीणों ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यदि प्रशासन ने कंपनी को अनुमति दी तो आंदोलन की राह अपनाई जाएगी।

सूचना दबाने का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने पर्यावरणीय जनसुनवाई की सूचना छिपाई है। उनका कहना है कि एक महीने पहले पत्र जारी होने के बावजूद क्षेत्रवासियों को इसकी जानकारी नहीं दी गई। ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए जनसुनवाई को गुप्त तरीके से आयोजित कर रहे हैं। अब देखने वाली महत्वपूर्ण बात यह होंगी सिरोही जिला कलेक्टर व सूबे के मुखिया इसपर क्या एक्शन लेते है। आखिर ग्रामीणों को सूचना नहीं देने के पीछे क्या खास वजह रहीं। प्रशासन गुप्त तरिके से यह सब क्यों करना चाहता है इस पूरे खेल मे कौन कौन लोग शामिल है। इसकी जांच कि मांग उठाई है।

गंभीर खतरे की आशंका

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि खनन शुरू हुआ तो क्षेत्र में भारी पर्यावरणीय असंतुलन होगा।
खेत-खलिहान बंजर होने का खतरा।
ब्लास्टिंग से मकानों को दरकने और नुकसान पहुंचने की आशंका।
धूल और प्रदूषण से लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर।
पहाड़ी क्षेत्र मे निवासरत वन्यजीवों और स्थानीय बस्तियों को भी बड़ा खतरा। साथ हीं ग्रामीण अंचल सड़को को भारी नुकसान होगा। क्षेत्र मे पेयजल कि भारी समस्या उत्पन्न हो सकती है। यानि माइंस स्वीकृत होने के बाद प्रभावित क्षेत्र को निकट भविष्य मे गंभीर नुकसान होना तय है।

कल जनसुनवाई में विरोध

ग्रामीणों ने ऐलान किया है कि कल शुक्रवार को पिण्डवाड़ा तहसील के भीमाना गांव मे होने वाली पर्यावरण स्वीकृति संबंधित जनसुनवाई में सैकड़ों लोग पहुंचकर सामूहिक आपत्ति दर्ज कराएंगे। ग्रामीणों का कहना है कि यह परियोजना उनके जीवन, पर्यावरण और भविष्य के लिए बेहद खतरनाक है, इसलिए इसे किसी भी कीमत पर मंजूरी नहीं मिलने दी जाएगी।

जिम्मेदारों कि कार्यशैली पर उठे सवाल

क्षेत्र में इतनी बड़ी खनन परियोजना की क्षेत्रवासियों को जानकारी न देखकर गुप्त तरीके से जनसुनवाई करने के पीछे जमीदारों की क्या मंशा थी जो कई सवाल खडे करती है। आखिर इस जनसुनवाई कि ग्रामीणों को सूचना क्यों नहीं दी गई। सूचना पत्र को दबाने के पीछे क्या मंशा रहीं यह भी बड़ा सवाल है। क्या पूरे मामले पर सूबे के मुखिया गंभीरता दिखाएंगे और सूचना दबाकर निजी कम्पनी को फायदा देने वाले जिम्मेदार अधिकारियो पर कोई ठोस एक्शन लेगे यह भी अहम सवाल है।

रिपोर्ट
तुषार पुरोहित सिरोही
9785238072

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