दिल्ली से असम तक बारिश और बाढ़ का कहर, दुविधा में फंसे हजारों लोग, जनजीवन हुआ प्रभावित

दिल्ली से लेकर बिहार और असम तक भारी बारिश ने जनजीवन को अस्त व्यस्त कर दिया है। कहीं बाढ़ ने तबाही मचा रखी है तो कहीं बाढ़ को लेकर पहले से तैयारियां की जा रही है। असम में लाखों लोगों के जीवन पर बाढ़ ने असर डाला है।

बिहार में बाढ़ के दीर्घकालिक समाधान के लिए केंद्र सरकार द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय समिति ने शुक्रवार को बिहार के जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की और केंद्र द्वारा राज्य में बाढ़ से निपटने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर चर्चा की। जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी) द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, ‘‘पांच सदस्यीय समिति ने मंत्री और विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की और राज्य में केंद्र द्वारा उठाए जा रहे कई उपायों पर चर्चा की।’’ समिति के सदस्यों ने मंत्री को बाढ़ प्रबंधन एवं नियंत्रण के लिए केन्द्र सरकार द्वारा तैयार की गई विभिन्न परियोजनाओं के बारे में भी अवगत कराया। बैठक में बिहार के दो अन्य मंत्री अशोक चौधरी और बिजेन्द्र प्रसाद यादव भी शामिल हुए। इससे पहले दिन में समिति के सदस्यों ने जद (यू) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा से मुलाकात की। झा वर्तमान में पार्टी के राज्यसभा सदस्य हैं और पहले राज्य में जल संसाधन मंत्री थे।

हिमाचल प्रदेश, असम और उत्तराखंड में भारी बारिश
वहीं हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सहित उत्तर भारत के बड़े हिस्से में शुक्रवार को भारी बारिश के कारण आम जीवन प्रभावित रहा जबकि असम में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। पूर्वोत्तर राज्य की प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं व बाढ़ से करीब 22 लाख लोग प्रभावित हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने डिब्रूगढ़ में बाढ़ प्रभावित कई इलाकों का दौरा किया। डिब्रूगढ़ राज्य के बाढ़ प्रभावित 29 जिलों में से एक है। असम हाल के वर्षों में सबसे भीषण बाढ़ से जूझ रहा है। उत्तराखंड में पिछले कुछ दिनों से भारी बारिश हो रही है। देहरादून में बारिश के पानी से भरे गड्ढे में पांच साल का बच्चा डूब गया जबकि हरिद्वार में एक किशोर की नाला में डूबने से मौत हो गई। पहाड़ी राज्य में बारिश और कई स्थानों पर भूस्खलन से आम जनजीवन प्रभावित रहा जबकि बद्रीनाथ जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग सहित प्रमुख सड़कें अवरुद्ध हो गईं। पिछले 24 घंटों में हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश हुई जिससे 64 सड़कें बंद हो गईं। क्षेत्रीय मौसम कार्यालय ने अगले 24 घंटों में कांगड़ा, कुल्लू, किन्नौर, मंडी, सिरमौर और शिमला जिलों के कुछ इलाकों में अचानक बाढ़ आने की चेतावनी दी है।

राजस्थान में भी बारिश जारी
बता दें कि राजस्थान में भारी बारिश का दौर जारी है और टोंक जिले के मालपुरा में 24 घंटे में 176 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। असम में बाढ़ की स्थिति गंभीर है और 29 जिलों में लगभग 22 लाख लोग प्रभावित हैं और सभी प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। एक अधिकारी ने बताया कि असम में शुक्रवार तक 77 जंगली जानवरों की मौत हो गई है जबकि जलमग्न काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से 94 जानवरों को बचा लिया गया है। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने पिछले आठ दिनों से जलमग्न डिब्रूगढ़ शहर की स्थिति की समीक्षा की। राज्य में इस साल बाढ़, भूस्खलन और तूफान में मरने वालों की संख्या बढ़कर 62 हो गई है जबकि तीन लोग लापता हैं। राज्य में सबसे अधिक धुबरी जिला में 6.48 लाख लोग प्रभावित हैं। दरांग में 1.90 लाख और कछार में 1.45 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। इस बीच, दिल्ली सरकार ने हथिनीकुंड बैराज के वास्तविक समय के आंकड़ों की निगरानी के लिए 24 घंटे कार्यरत रहने वाले बाढ़ नियंत्रण कक्ष की स्थापना की है। यहीं से यमुना में दिल्ली के लिए पानी छोड़ा जाता है।

दिल्ली में बारिश और बाढ़ की संभावना
इस बीच मौसम विभाग ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शनिवार को आमतौर पर बादल छाए रहने और हल्की बारिश के साथ-साथ गरज और बिजली गिरने का अनुमान जताया है। विभाग ने अगले चार से पांच दिनों के दौरान भारी बारिश का भी अनुमान जताया है। उत्तराखंड में राज्य आपात अभियान केंद्र ने बताया कि भूस्खलन के कारण 88 ग्रामीण सड़कें, दो सीमा सड़कें, एक राज्य राजमार्ग और बदरीनाथ मंदिर की ओर जाने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध हो गया है। केंद्र के मुताबिक भूस्खलन की वजह से ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग लामबगड़ में अवरुद्ध हो गया है। देहरादून में लगातार रुक-रुक कर हो रही भारी बारिश के कारण कई सड़कें जलमग्न हो गईं हैं। इस बीच हिमाचल प्रदेश में जुलाई में सामान्य 27.2 मिलीमीटर के मुकाबले 43.2 मिमी बारिश हुई है जो सामान्य से 59 प्रतिशत अधिक है। आपात अभियान केंद्र ने बताया कि भारी बारिश के कारण राज्य की 64 सड़कें यातायात के लिए बंद हैं। शिमला स्थित मौसम कार्यालय ने शनिवार को अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश, आंधी और बिजली गिरने का ‘येलो’ अलर्ट जारी किया है।

राजस्थान में भारी बारिश
राजस्थान के साजनगढ़ (बांसवाड़ा) में 116 मिलीमीटर, तिजारा में 107 मिमी, दानपुर में 101 मिमी, नैनवां (बूंदी) में 102 मिमी, थानागाजी में 97 मिमी, पीपल्दा (कोटा) में 90 मिमी, टपूकड़ा में 88 मिमी और जयपुर के फागी में 82 मिमी बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने बताया कि 24 घंटे की अवधि में कई हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश हुई। रविवार और सोमवार को उत्तर-पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में बारिश की संभावना है और नौ व दस जुलाई को इसमें वृद्धि हो सकती है। मौसम विभाग ने कहा कि बीकानेर संभाग और जोधपुर संभाग के पूर्वी और उत्तरी हिस्सों में भी अगले दो से तीन दिनों में बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने कहा कि उत्तरी पश्चिम बंगाल में नौ जुलाई तक बारिश होने की संभावना है। अधिकारियों ने बताया कि मेघालय में पिछले एक महीने में 44 प्रतिशत अधिक बारिश हुई। पुडुचेरी और उसके उपनगरों में शुक्रवार को भारी बारिश हुई जिससे केंद्र शासित प्रदेश के कई हिस्सों में जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो गई।

हिमंत विश्व शर्मा ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का किया दौरा
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने शुक्रवार को डिब्रूगढ़ जिले के शहरी इलाकों समेत कई बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया और तटबंधों में दरारों से हुए नुकसान का जायजा। शर्मा ने बाढ़ से प्रभावित लोगों से भी बातचीत की और उन्हें राहत प्रयासों और चिकित्सा सुविधाओं के माध्यम से सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने अपने दौरे की शुरुआत पिछले नौ दिनों से बिजली की गंभीर कमी से जूझ रहे डिब्रूगढ़ शहर में बाढ़ की स्थिति का आकलन करके किया। मुख्यमंत्री ने शहर में बाढ़ग्रस्त एच एस रोड और महालया रोड पर बाढ़ प्रभावित लोगों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि नालियों के जाम होने के कारण शहर में बाढ़ की समस्या है और ब्रह्मपुत्र नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर होने के कारण पानी की निकासी में दिक्कतें आ रही हैं। प्रभावित लोगों ने मुख्यमंत्री से बिजली आपूर्ति बहाल करने का आग्रह किया, जबकि उन्होंने बिजली से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए बिजली आपूर्ति बंद किए जाने की बात कही।

सीएम हिमंत विश्व सरमा ने नुकसान का किया आकलन
हालांकि मुख्यमंत्री ने जिला आयुक्त को सार्वजनिक घोषणा करके बिजली आपूर्ति बहाल करने का निर्देश दिया ताकि लोग सावधान रहें और इस अवधि के दौरान घर के अंदर रहें। मुख्यमंत्री ने खोवांग में तटबंध टूटने का निरीक्षण किया और क्षेत्र में हुए नुकसान का आकलन किया। उन्होंने लोगों को भरोसा दिलाया कि तटबंधों की मरम्मत के अलावा उन्हें मजबूत करने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे। विपक्षी कांग्रेस द्वारा तटबंधों के टूटने के आरोपों पर पलटवार करते हुए शर्मा ने कहा कि ये तटबंध उनके (कांग्रेस) शासन के दौरान बनाए गए थे। उन्होंने कहा, ‘अगर हम आंकड़े बताना शुरू करें तो 2004 में 350 से अधिक तटबंध टूटे थे। यह राजनीति करने का समय नहीं है।’ मुख्यमंत्री ने तेंगाखाट में एक राहत शिविर का भी दौरा किया और लोगों को आश्वासन दिया कि विस्थापित लोगों को हरसंभव मदद मुहैया कराई जाएगी।

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