वैज्ञानिक अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए समाज के विकास में योगदान दें- Dr. शर्मा

“खाद्य उत्पादन प्रणालियों में पर्यावरण संरक्षण हेतु प्रकृति आधारित समाधान” का समापन

जोबनेर। श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तत्वावधान में आयोजित 21 दिवसीय शीतकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम “खाद्य उत्पादन प्रणालियों में पर्यावरण संरक्षण हेतु प्रकृति आधारित समाधान” का समापन समारोह आज भव्य रूप से संपन्न हुआ। समापन समारोह में राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, जोबनेर के कुलगुरु प्रोफेसर डॉ. त्रिभुवन शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह चौहान ने ऑनलाइन माध्यम से समारोह की अध्यक्षता की।

मुख्य अतिथि प्रोफेसर डॉ. त्रिभुवन शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि देश की कृषि को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में कृषि का योगदान बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने प्राकृतिक खेती को पुनः अपनाने पर जोर देते हुए गिर गाय के महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि वे अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए समाज के विकास में योगदान दें और आने वाली पीढ़ी की आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकों का प्रसार करें।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि किसी भी तकनीक की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। उन्होंने बायोगैस एवं सौर ऊर्जा के उदाहरण देते हुए प्रतिभागियों को 21 दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान को अपनी-अपनी संस्थाओं में लागू करने की सलाह दी तथा प्राकृतिक खेती आधारित परियोजनाओं को प्रारंभ करने पर विशेष बल दिया।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के निदेशक अनुसंधान डॉ. उम्मेद सिंह ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया।

निदेशक (मानव संसाधन विकास) डॉ. ए.सी. शिवरान ने अपने उद्बोधन में कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम वैज्ञानिकों एवं शिक्षाविदों को व्यावहारिक और नवाचार आधारित सोच विकसित करने की दिशा में प्रेरित करते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे अर्जित ज्ञान को किसानों के खेतों तक पहुँचाकर सतत एवं प्राकृतिक कृषि को मजबूती प्रदान करें।

इस अवसर पर अधिष्ठाता एवं संकाय सदस्य प्रोफेसर डॉ. डी.के. गोठवाल ने प्रतिभागियों को ज्ञान अर्जन पर बधाई देते हुए प्रशिक्षण के उपरांत इसे खेत स्तर पर अपनाने का आग्रह किया।
प्रतिभागियों ने अपने विचार साझा कर प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान को किसानों तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता जताई। पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. रोशन चौधरी ने बताया कि कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से 70 वैज्ञानिक शामिल हुए। इसमें 49 व्याख्यान, 10 प्रायोगिक सत्र, 5 शैक्षणिक भ्रमण आयोजित हुए। विशेष फोकस रहा कृषि के अतीत-वर्तमान-भविष्य, वर्मीवॉश, वर्मी कम्पोस्ट, प्राकृतिक एवं सतत कृषि पर।अंत में डॉ. बी.एस. चन्द्रवत ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। जबकि मंच संचालन डॉ हिना सहीवाला ने किया। इस प्रशिक्षण के समापन समारोह में लगभग 70 वैज्ञानिकों एवं विश्वविद्यालय अधिकारियों ने सहभागिता की।

जागरूक जनता व्हाट्सएप चैनल को फॉलो करें
https://whatsapp.com/channel/0029VabCX4VDOQIUcf0b4w14
जागरूक जनता WhatsApp Group को Join करें…
https://chat.whatsapp.com/I7ImEiiBWrJIRP9LTTv2hG

www.jagrukjanta.net

Date:

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसन्धान संस्थान मे पश्चिस क्षेत्रीय स्पोर्ट टूर्नामेंट 31 से

अविकानगर . भारतीय क़ृषि अनुसन्धान परिषद के संस्थान केंद्रीय...

अतिरिक्त मुख्य सचिव अपर्णा Aroda ने विभागीय जिला स्तरीय अधिकारियों से वीसी के जरिए किया संवाद

विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर दिया...

Media टायकून वी बी जैन ने विकलांग बच्चों संग झण्डा फहरा रचा इतिहास

प्रथम वूमेंस ओलिंपिक्स में स्कूल छात्रों की माताओं ने...