भारत का विरोध पड़ा भारी, थाईलैंड के राजदूत की WTO मीटिंग से हुई वापसी, जानें इनसाइड स्टोरी

भारत के चावल खरीद के मामले को विश्व व्यापार संगठन में विवादित टिप्पणी करना थाइलैंड की राजदूत को भारी पड़ गया। भारत ने इस पर आपत्ति जताई। आखिरकार विरोध दर्ज कराने के बाद बाद थाईलैंड ने अपनी राजदूत पिमचानोक वॉनकोर्पोन पिटफील्ड को वापस बुला लिया। पिटफील्ड ने भारत पर वैश्विक बाजार में कब्जा करने के प्रयास का आरोप लगाया था।

  • भारत की चावल खरीद लेकर थाईलैंड की राजदूत ने की थी टिप्पणी
  • राजदूत पिटफील्ड की टिप्पणी पर भारत ने जताया था कड़ा विरोध
  • थाईलैंड ने अपनी राजदूत को मंत्रिस्तरीय सम्मेलन से वापस बुलाया

ऐसे तैयार हुई वापसी की भूमिका
इस पूरे मामले में भारतीय अधिकारियों ने थाई प्रतिनिधि की मौजूदगी वाली मंत्रिस्तरीय बैठक का बहिष्कार किया था। साथ ही सरकार ने इस मामले को थाईलैंड के साथ भी उठाया था। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अपने अमेरिकी और यूरोपीय संघ के समकक्षों के साथ-साथ संयुक्त अरब अमीरात के व्यापार मंत्री थानी बिन अहमद अल जायौदी और डब्ल्यूटीओ प्रमुख न्गोजी ओकोन्जो-इवेला के साथ मीटिंग के दौरान इस मुद्दे पर बात की थी। भारतीय प्रतिनिधिमंडल कृषि व्यापार में सुधार, विशेष रूप से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए खाद्यान्न की खरीद के लिए सरकार को लचीलापन प्रदान करने पर एक बंद दरवाजे की बैठक की। इस मीटिंग के दौरान भारत पिटफील्ड के हस्तक्षेप वाले आक्रामक स्वर से नाराज था। इसके अलावा, अमीर देशों के कुछ प्रतिनिधियों ने थाई राजदूत के बयान की सराहना की। भारत ने इसे अधिकारियों ने तथ्यात्मक रूप से गलत बताया। एक अधिकारी ने बताया कि उन्होंने सरकार पर पीडीएस के लिए खरीदे गए चावल का 40% निर्यात करने का आरोप लगाया था।

विकसित देशों ने मिलकर रचा मामला?
एक अन्य अधिकारी ने कहा, ऐसा प्रतीत होता है कि पूरा मामला कुछ विकसित देशों के साथ मिलकर रचा गया है। जिनेवा में डब्ल्यूटीओ की बैठकों के दौरान कुछ देशों ने इसी तरह का शोर मचाया था, सरकार ने भी इसे एक कहानी बनाने के प्रयास के रूप में देखा। इसके अनुसार भारत की तरफ से वैश्विक बाजारों में सब्सिडी वाले चावल की बाढ़ ला दी गई है, जो वैश्विक व्यापार नियमों के अनुरूप नहीं है। सरकारी अधिकारी के अनुसार हकीकत यह है कि उनके तथ्य गलत थे, क्योंकि सरकार खाद्य सुरक्षा प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए धान की उपज का केवल 40 प्रतिशत ही खरीदती है। उन्होंने बताया कि बाकी हिस्से को सरकारी स्वामित्व वाली एजेंसियां नहीं खरीदती हैं। इसे भारत से बाजार कीमतों पर निर्यात किया जाता है।

चावल का बड़ा निर्यातक है भारत
सरकार ने हाल ही में घरेलू कीमतों को कम करने के लिए गैर-बासमती चावल के निर्यात को प्रतिबंधित कर दिया है। भारत सब्सिडी सीमा के मुद्दे का समाधान तलाश रहा है, जिसकी गणना 1986-88 के स्तर पर तय कीमतों पर की गई है। इसमें 10% की सीमा का उल्लंघन किया है। भारत की तरह थाईलैंड भी एक प्रमुख चावल एक्सपोर्ट करने वाला देश है। विभिन्न मंचों पर कुछ विकसित और विकासशील देशों ने आरोप लगाया है कि भारत की तरफ से चावल जैसी जिंसों का सार्वजनिक भंडारण वैश्विक बाजार में रेट खराब कर देता है। भारत 2018 से 2022 तक दुनिया का सबसे बड़ा चावल एक्सपोर्ट करने वाला देश था। उसके बाद थाईलैंड और वियतनाम का स्थान था।

Date:

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

दशानन का कुनबा खाक, दशहरा मेले में Japan, चीन और ब्रिटेन के पर्यटक भी पहुंचे

राजस्थान में मंगलवार को दशहरे का पर्व धूमधाम से...

Jagruk Janta Hindi News Paper 21 October 2026

Jagruk Janta 21 October 2026Download रिएक्ट करें♥️ 👍 👎 😊...

PM मोदी ने किया रावण दहन, बोले- राम के आदर्शों से विकसित और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प होगा पूरा

नई दिल्ली: विजयादशमी के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी...