हाई कोर्ट ने राजस्थान सरकार को भी आदेश दिया गया कि अवैध मंदिरों के भवन ढहाने और उनकी मूर्तियों को निकटतम वैध मंदिरों में स्थानांतरित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करें.

राजस्थान हाई कोर्ट ने जयपुर शहर में फुटपाथ, सड़क और सार्वजनिक मार्गों पर अवैध रूप से बने मंदिरों को हटाने का सख्त आदेश दिया है. जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की खंडपीठ ने सनी मीणा की जनहित याचिका पर यह फैसला सुनाया. अदालत ने नगर निगम आयुक्त को निर्देश दिए कि अगली सुनवाई पर शपथपत्र प्रस्तुत कर बताएं कि शहर में फुटपाथ व अन्य जगहों पर बने अवैध मंदिरों को हटाने के लिए क्या कदम उठाए गए.
हाई कोर्ट ने राजस्थान सरकार को भी आदेश दिया गया कि अवैध मंदिरों के भवन ढहाने और उनकी मूर्तियों को निकटतम वैध मंदिरों में स्थानांतरित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करें. मामला 4 फरवरी को फिर आएगा.
मंदिर के आड़ में चल रहा व्यापार
याचिका प्रताप नगर सेक्टर-7 के सार्वजनिक मार्ग पर बने अवैध दुकानों व मंदिर से संबंधित थी. याचिकाकर्ता सनी मीणा ने बताया कि कुछ लोगों ने अतिक्रमण कर दुकानें और मंदिर बना लिया और मंदिर की आड़ में व्यापार चला रहे थे. जनहित याचिका के बाद नगर निगम ने दुकानें तो तोड़ दीं, लेकिन मंदिर पर कोई कार्रवाई नहीं की.
निगम पक्ष ने मंदिर को पुराना व आस्था से जुड़ा बताकर बचाने की कोशिश की, मगर याचिकाकर्ता ने हालिया तस्वीरें पेश कीं. कोर्ट ने निगम के डिप्टी आयुक्त को 7 दिनों में मंदिर हटाने व मूर्ति शिफ्ट करने का आदेश दिया.
अतिक्रमण कार्रवाई की जिम्मेदारी निगम की
हाउसिंग बोर्ड के वकील अजय शुक्ला ने बताया कि प्रताप नगर अब नगर निगम को सौंप दिया गया है, इसलिए निर्माण अनुमति व अतिक्रमण कार्रवाई की जिम्मेदारी निगम की है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना अनुमति बने मंदिर के लिए संबंधित अधिकारी भी जिम्मेदार हैं. इसलिए, उनके खिलाफ विभागीय जांच व कार्रवाई हो.
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