विज्ञान को समाज से जोड़ने की दिशा में पहल: राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में आईएसएएस–2026 का शुभारंभ

जयपुर. भारतीय कृषि सांख्यिकी सोसायटी (ISAS) का 76वाँ वार्षिक सम्मेलन “डेटा-ड्रिवन डिसीज़न्स फ़ॉर कनेक्टिंग साइंस विद सोसाइटी टुवर्ड्स विकसित भारत @ 2047” विषय पर आज राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय परिसर में विधिवत रूप से प्रारंभ हुआ। तीन दिवसीय इस राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर से प्रतिष्ठित सांख्यिकीविद्, कृषि वैज्ञानिक, शोधकर्ता एवं नीति-निर्माता एकत्रित हुए हैं। सम्मेलन का उद्देश्य सांख्यिकीय एवं संगणकीय उपकरणों के प्रभावी उपयोग पर विमर्श करना है, जिससे साक्ष्य-आधारित निर्णय-निर्माण को सशक्त बनाया जा सके और विकसित भारत @ 2047 के राष्ट्रीय संकल्प में योगदान दिया जा सके।

उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि श्री भगीरथ चौधरी, माननीय केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री ने ऑनलाइन माध्यम से उपस्थित होकर कृषि को सुदृढ़ बनाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने में डेटा-आधारित अंतर्दृष्टियों की अहम भूमिका पर प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि डॉ. संजय कुमार, माननीय अध्यक्ष, कृषि वैज्ञानिक भर्ती बोर्ड (ASRB) ने उन्नत मौसम पूर्वानुमान एवं उपग्रह-आधारित प्रणालियों द्वारा कृषि क्षेत्र में आ रहे सकारात्मक परिवर्तनों पर चर्चा की, जो किसानों को जलवायु जोखिमों से निपटने हेतु समयबद्ध एवं व्यवहारिक जानकारी प्रदान कर रही हैं।

डॉ. अमृत कुमार पॉल ने सम्मेलन के उद्देश्यों एवं भारतीय कृषि सांख्यिकी सोसायटी की विभिन्न पहलों पर विस्तार से जानकारी दी। वहीं डॉ. बी. वी. एस. सिसोदिया ने भी अपने विचार साझा किए।
उद्घाटन सत्र का एक प्रमुख आकर्षण गणमान्य अतिथियों द्वारा जनगणना अनुसंधान कार्यस्थान (Census Research Workstation) का उद्घाटन रहा। यह अत्याधुनिक सुविधा शोधकर्ताओं को सूक्ष्म-स्तरीय जनगणना आँकड़ों तक पहुँच एवं विश्लेषण का अवसर प्रदान करेगी, जिससे जनगणना आँकड़ों की गणना एवं सुदृढ़ विकास रणनीतियों के निर्माण में सहायता मिलेगी। यह पहल क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. आनंद भालेराव ने कहा कि आज कृषि डेटा, प्रौद्योगिकी और सामाजिक उत्तरदायित्व के संगम पर खड़ी है। उन्होंने कहा कि डेटा-आधारित निर्णय-निर्माण अब विकल्प नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा, जलवायु सहनशीलता और सतत ग्रामीण विकास के लिए अनिवार्यता बन चुका है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ISAS-2026 के अंतर्गत होने वाले विमर्श और निष्कर्ष साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण को सशक्त करेंगे तथा किसानों को समय पर उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध होंगे।

इससे पूर्व दीप प्रज्ज्वलन एवं विश्वविद्यालय गीत के पश्चात प्रो. ममता रानी, अधिष्ठाता, गणित, सांख्यिकी एवं संगणकीय विज्ञान संकाय ने स्वागत भाषण देते हुए इस राष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी पर गर्व व्यक्त किया। सम्मेलन संयोजक प्रो. जितेंद्र कुमार ने कार्यक्रम की महत्ता एवं व्यापकता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर अतिथियों को शॉल, स्मृति-चिह्न एवं श्रीमद्भगवद्गीता भेंट कर सम्मानित किया गया।
तीन दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन दिवस का समापन उद्देश्यपूर्ण वातावरण के साथ हुआ, जिसने कृषि सांख्यिकी एवं डेटा विज्ञान में उभरते रुझानों पर केंद्रित तकनीकी सत्रों एवं शोध-पत्र प्रस्तुतियों के लिए सशक्त आधार प्रदान किया। अंत में डॉ. दीपेश भाटी, विभागाध्यक्ष, सांख्यिकी विभाग ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

सम्मेलन के दूसरे दिन बैंक ऑफ इंडिया के सहयोग से एक विशेष किसान संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है, जो शोध और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के बीच की खाई को पाटने में सहायक होगी। सम्मेलन का समापन डेटा-आधारित नीति-निर्माण पर एक पैनल चर्चा के साथ होगा, जिसमें जलवायु सहनशीलता एवं उत्पादन अनुकूलन जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियों पर मंथन किया जाएगा। सम्मेलन में 200 से अधिक प्रतिनिधियों—जिसमें शिक्षाविद्, शोधकर्ता, सांख्यिकीविद् एवं उद्योग विशेषज्ञ की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है, जो डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में कृषि सांख्यिकी की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है।

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