4 राज्यों में भाजपा की जीत: प्रधानमंत्री मोदी का भाजपा मुख्यालय में पुष्प वर्षा से स्वागत हुआ, बोले- आज का उत्सव भारत के लोकतंत्र के लिए है

नई दिल्ली। पांच में से चार राज्यों में जीत की शाम गुरुवार को दिल्ली भाजपा कार्यालय में गुलजार हुई। प्रधानमंत्री मोदी सिर से पांव तक फूलों की पंखुड़ियों और मालाओं के बीच दफ्तर पहुंचे। चारों ओर एक जैसी ही आवाज थी भाजपा, भारत और मोदी…
और फिर स्वागत है, स्वागत है, स्वागत है। इनके, उनके सबके बोल लेने के बाद मोदी आए और कहते गए। कई सारी बातें…

भारत माता की जय, भारत माता की जय। आज उत्साह का दिन है। उत्सव का दिन है। ये उत्सव भारत के लोकतंत्र के लिए है। मैं इन चुनाव में हिस्सा लेने वाले सभी मतदाताओं को बधाई देता हूं। हमारी माताओं, बहनों और युवाओं ने जिस तरह भाजपा को भरपूर समर्थन दिया है, वो अपने आप में बहुत बड़ा संकेत है। मुझे इस बात का भी संतोष है कि फर्स्ट टाइम वोटर्स ने बढ़चढ़कर मतदान में हिस्सा लिया और भाजपा की जीत पक्की की। चुनाव के दौरान भाजपा के कार्यकर्ताओं ने मुझसे वादा किया था कि इस बार होली 10 मार्च से ही शुरू हो जाएगी। हमारे कार्यकर्ताओं ने ये विजय ध्वज फहराकर इस वायदे को पूरा कर दिखाया है। उनकी भूरि-भूरि प्रशंसा करता हूं, जिन्होंने दिन रात देखे बिना इन चुनावों में काम किया और जनता का विश्वास जीतने में सफल रहे। कार्यकर्ताओं का जिन्होंने मार्गदर्शन किया, ऐसे हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष का भी अभिनंदन।

आज हमारे कार्यकर्ताओं ने जीत का चौका लगाया है। उत्तर प्रदेश ने देश को अनेक प्रधानमंत्री दिए थे, लेकिन 5 साल का कार्यकाल पूरा करने वाले किसी मुख्यमंत्री के दोबारा चुने जाने का ये पहला उदाहरण है। अभी नड्डा जी ने विस्तार से बताया कि उत्तर प्रदेश में 37 साल बाद कोई सरकार लगातार दूसरी बार सत्ता में आई है। तीन राज्य यूपी, गोवा और मणिपुर में सरकार में होने के बावजूद भाजपा के वोट शेयर में बढ़ोतरी हुई है।

गोवा में सारे एग्जिट पोल गलत निकल गए और वहां की जनता ने हमें फिर से सेवा का मौका दिया। 10 साल सत्ता में रहने के बाद भी राज्य में भाजपा की सीटों की संख्या बढ़ी है। उत्तराखंड में भी भाजपा ने नया इतिहास रचा है। राज्य में पहली बार कोई पार्टी लगातार दूसरी बार सत्ता में आई है। सीमा से सटा एक पहाड़ी राज्य, एक समुद्र तटीय राज्य और एक मां गंगा का विशेष आशीर्वाद प्राप्त राज्य और पूर्वोत्तर सीमा पर एक राज्य… भाजपा को चारों दिशाओं से आशीर्वाद मिला है।

इन राज्यों की चुनौतियां भिन्न हैं। सबकी विकास की यात्रा का मार्ग भिन्न है। लेकिन, एक सूत्र है भाजपा पर विश्वास, भाजपा की नीति, भाजपा की नीयत और भाजपा के निर्णयों पर अपार विश्वास। ये नतीजे भाजपा की प्रो पुअर, प्रो एक्टिव गवर्नेंस पर एक प्रकार से बड़ी मुहर है।

पहले जनता अपने ही हक के लिए सरकार के दरवाजे खटखटाकर थक जाती थी। बिजली, पानी, टेलीफोन जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे, पैसे देने पड़ते थे। कुछ साधन संपन्न लोगों तक सुविधा के रास्ते अलग थे और पहुंच जाती थीं। देश में गरीबों के नाम पर बहुत योजनाएं बनी, लेकिन उनका जो हकदार था, जिस गरीब का उस पर हक था, उसे बिना परेशानी के लिए ये हक मिले.. इसके लिए गुड गवर्नेंस और डिलिवरी का महत्व होता है। भाजपा इस बात को समझती है। मैं लंबे अरसे तक मुख्यमंत्री का काम करके आया हूं। मुझे पता है कि आखिरी इंसान की सुख सुविधा के लिए कितनी मेहनत करनी चाहिए।

हमने गवर्नेंस डिलिवरी सिस्टम बेहतर किया। भाजपा गरीब को भरोसा देती है कि प्रत्येक गरीब तक सरकार की दी गई सुविधाएं जरूर पहुंचेगी। मैं गरीब के घर तक उसका हक पहुंचाए बिना चैन से बैठने वाला इंसान नहीं हूं। दो दशक से ज्यादा समय तक हेड ऑफ द गवर्मेंट के तौर पर सेवा का अवसर मिला है। सरकार और गवर्नेंस में कितनी दिक्कतें होती हैं, इसे जानता हूं। इसके बावजूद ऐसी हिम्मत की है, जो शायद कोई न कर पाए। वो हिम्मत मैंने 15 अगस्त के भाषण में व्यक्त की थी। मैंने कहा था कि भाजपा को जहां-जहां सेवा का मौका मिलेगा, हम हकदारों के लिए 100 परसेंट सेचुरेशन करेंगे। हर गरीब तक सरकार की योजनाओं को सौ फीसदी तक पहुंचाने की हिम्मत की थी। जब ईमानदारी होती है, नीयत साफ होती है, गरीबों के लिए करुणा होती है, देश के कल्याण का मंत्र होता है तो ऐसी हिम्मत पैदा होती है।

आज मैं महिलाओं, बहन, बेटियों को विशेष नमन करता हूं। चुनाव में उनका बड़ा योगदान है। ये हमारा सौभाग्य है कि भाजपा को बहनों, बेटियों और माताओं ने इतना स्नेह दिया, इतना आशीर्वाद मिला है, जहां-जहां महिला मतदाताओं ने पुरुषों के मुकाबले ज्यादा मतदान किया है, वहां भाजपा को बंपर जीत मिली है। हमारी माताएं, बहनें, बेटियां, स्त्री शक्ति भाजपा की जीत की साक्षी बनी हैं।

मैं जब गुजरात में था, तब कभी-कभी ऐसी घटनाएं हो जाती थीं कि लोग चिंता करते थे कि मोदी जी आपकी सुरक्षा का क्या, अपने आपको संभालते क्यों नहीं हैं। मैं एक ही जवाब देता था कि कोटि-कोटि माताओं का, स्त्री शक्ति का सुरक्षा कवच मुझे मिला हुआ है। भारत की माताएं बेटियां निरंतर भाजपा पर विश्वास कर रही हैं। उनको पहली बार विश्वास मिला है कि सरकार उनकी छोटी से छोटी जरूरत को भी ध्यान में रखती है।

मैं सभी ज्ञानियों को कहता हूं कि देश की भलाई के लिए पुरानी घिसी-पिटी चीजें छोड़कर नई चीजें सोचना शुरू कीजिए। इस देश के लिए बड़े दुख की बात है। मैं भी यह अनुभव करता था, जब ये ज्ञानी लोग यूपी की जनता को सिर्फ और सिर्फ जातिवाद के तराजू से तौलते थे और उसी दृष्टि से देखते थे। यूपी के नागरिकों को जातिवाद की बाड़ेबंदी में बांधकर उन नागरिकों और उत्तर प्रदेश का अपमान करते थे। कुछ लोग यूपी को यह कहकर बदनाम करते हैं कि यूपी में जाति ही चलती है। 2014, 2017, 2019 और 2022… हर बार यूपी के लोगों ने सिर्फ विकासवाद की राजनीति को ही चुना है। यूपी के लोगों ने इन लोगों को ये सबक दिया है। ये सबक उनको सीखना होगा। यूपी के गरीब से गरीब व्यक्ति ने, हर नागरिक ने सबक दिया है कि जाति की गरिमा, जाति का मान, देश को जोड़ने के लिए होना चाहिए, तोड़ने के लिए नहीं। ये चार-चार चुनावों में करके दिखाया है।

आज मैं यह भी कहूंगा कि 2019 के चुनाव नतीजों के बाद कुछ पॉलिटिकल ज्ञानियों ने कहा था कि 2019 की जीत में क्या है, ये तो 2017 में ही तय हो गई थी, क्योंकि 2017 में यूपी का रिजल्ट आया था। मैं मानता हूं कि इस बार भी ये ज्ञानी जरूर कहने की हिम्मत करेंगे कि 2022 के नतीजों ने 2024 के नतीजे तय कर दिए हैं।

मैं आज पंजाब के भाजपा कार्यकर्ताओं की भी विशेष प्रशंसा करूंगा। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में जिस प्रकार पार्टी का झंडा बुलंद किया है, वो आने वाले समय में पंजाब में भाजपा की मजबूती और देश की मजबूती को विकसित करेंगे। पंजाब में भाजपा एक शक्ति के रूप में उभरनी है, ये मैं अपनी आंखों के सामने देख रहा हूं। सीमावर्ती राज्य होने के नाते उस राज्य को अलगाववादी राजनीति से सतर्क रखना भाजपा का कार्यकर्ता जान की बाजी लगाकर करेगा। आने वाले 5 सालों में भाजपा का हर कार्यकर्ता वहां इस दायित्व को जोर-शोर से निभाने वाला है, ये विश्वास मैं पंजाब की जनता को देना चाहता हूं।

ये चुनाव ऐसे समय में हुए हैं, जब पूरी दुनिया 100 साल की सबसे बड़ी कोरोना महामारी से लड़ रही है। ये कम था तो युद्ध ने भी विश्व की चिंताएं बढ़ाई हैं। इन परिस्थितियों में दुनियाभर की सप्लाई चेन छिन्न-भिन्न हो गई हैं। 2 साल से सप्लाई चेन पर बहुत विपरीत प्रभाव हुआ है और युद्ध ने उसे और बदतर कर दिया। इन चुनौतियों से निपटने के लिए भारत ने जो कदम उठाए, आर्थिक स्तर पर जो फैसले लिए, गरीब कल्याण के जो फैसले लिए, भारत को संभलकर आगे बढ़ने में बहुत मदद की है। भारत बच पाया है, क्योंकि हमारी नीतियां जमीन से जुड़ी रहीं। हमारे प्रयास निष्ठा और नीयत की पटरी पर अविरत आगे बढ़ते रहे।

जहां जहां डबल इंजन की सरकार रही, वहां पर जनता के हितों की सुरक्षा हुई। जो युद्ध चल रहा है, उसका प्रभाव प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से दुनिया के हर देश पर पड़ रहा है। भारत शांति के पक्ष में है। बातचीत से हर समस्या को सुलझाने के पक्ष में है, जो देश सीधे जंग लड़ रहे हैं, भारत का उनसे आर्थिक, सुरक्षा, शिक्षा, राजनीतिक दृष्टि से नाता है। भारत की बहुत सारी जरूरतें इन देशों से जुड़ी हुई हैं। भारत बाहर से जो कच्चा तेल, पाम ऑयल, सन फ्लॉवर ऑयल मंगाता है, उसकी कीमत भी बढ़ रही है।

उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने अपनी दूरदृष्टि का परिचय दिया है। भारत के मतदाताओं ने जिस तरह इन चुनावों में स्थिर सरकारों के लिए वोट दिया, वो इस बात का प्रतीक है कि लोकतंत्र भारतीयों की रगों में है। भाइयों और बहनों आज इस अवसर पर मैं देश के सामने अपनी कुछ चिंताएं भी रखना चाहता हूं। देश का नागरिक तो बहुत जिम्मेदारी के साथ देश के हित में अपना काम कर रहा है। जब भी उसको अवसर मिलता है, वो जिम्मेदारी के साथ पेश आता है। देश का सामान्य नागरिक राष्ट्र निर्माण में जुटा है, लेकिन हमारे यहां कुछ लोग लगातार राजनीति का स्तर गिराते जा रहे हैं। कोरोना के इस समय में भी हमने देखा है कि लोगों ने देशवासियों को गुमराह करने की लगातार कोशिश की है। वैक्सीनेशन के हमारे प्रयासों की दुनिया प्रशंसा कर रही है, लेकिन इस पवित्र और मानवता के कार्य पर, भारत की वैक्सीन पर भी सवाल उठाए गए। जब यूक्रेन में हजारों भारतीय छात्र और नागरिक फंसे हुए थे, तब भी देश का मनोबल तोड़ने की बातें हो रही थीं। जो वहां फंसे थे, उनकी चिंता बढ़ाने का काम हो रहा था। ये लोग उन बच्चों में असुरक्षा की भावना बढ़ा रहे थे। इन लोगों ने ऑपरेशन गंगा को भी प्रदेशवाद की बेड़ियों में बांधने की कोशिश की। हर योजना, हर काम को क्षेत्रवाद, प्रदेशवाद, जातिवाद का रंग देने का प्रयास भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिए चिंता का विषय है।

इन चुनावों में मैंने लगातार विकास की बात की है। गरीबों को घर, गरीबों को राशन, वैक्सीन, आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर हर विषय पर भाजपा का विजन लोगों के सामने रखा है। मैंने जिस बात पर सबसे ज्यादा चिंता जताई थी, वो थी परिवारवाद। मैंने लोगों को बताया कि मैं परिवार के खिलाफ नहीं, किसी विशेष का विरोधी नहीं। पर मैं यह कहता हूं कि जरा लोकतंत्र के तराजू पर इसे तौलो। कैसे परिवारवाद ने राज्य का कितना नुकसान किया है और राज्य को पीछे ले गए। मतदाताओं ने इस बात को समझते हुए भी इस चुनाव में अपना वोट दिया है। लोकतंत्र की ताकत को मजबूत किया है।

भारत जैसे लोकतंत्र में ये बहस लगातार होनी जरूरी है। जिन मुद्दों को उठा रहा हूं, उस पर बहस होना जरूरी है। एक न एक दिन ऐसा आएगा, जब भारत में परिवारवादी राजनीति का सूर्यास्त नागरिक करके रहेंगे। इस चुनाव में देश के मतदाताओं ने अपनी सूझ-बूझ का परिचय दिखाते हुए, क्या होने वाला है, इसका इशारा कर दिया है। आज एक और विषय रखना चाहता हूं। भ्रष्टाचार के खिलाफ एक्शन रोकने की साजिश। साथियों हमारे देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों में एक नफरत का भाव रहता है। देश की गाढ़ी कमाई लूटकर तिजोरी भरने की प्रवृत्ति कुछ लोगों की पहचान के साथ जुड़ गई है। भाजपा 2014 में ईमानदार सरकार का वादा करके जीती थी। 2019 में जनता ने हमें और ज्यादा आशीर्वाद दिया।

पहले हजारों करोड़ रुपए का भ्रष्टाचार करते हैं, फिर जांच भी नहीं होने नहीं देते, जांच हो तो उस पर दबाव बनाना इन लोगों की प्रवृत्ति है। ये लोग किसी भ्रष्टाचारी पर कार्रवाई होते ही उसे धर्म का रंग देते है, प्रदेश का रंग दे देेते हैं, जाति का रंग दे देते हैं। ये नए तरीके शुरू हुए हैं। किसी माफिया के खिलाफ अदालत कोई फैसला सुना देती है तो भी ये लोग उसे धर्म से जोड़ देते हैं। मैं भारत के सभी संप्रदायों, जातियों पर गर्व करने वाले ईमानदारों से आग्रह करता हूं कि ऐसे भ्रष्टाचारियों, माफियाओं को अपने समाज, संप्रदाय और जाति से दूर करने की हिम्मत करें। इससे समाज भी मजबूत होगा, संप्रदाय भी मजबूत होगा। यूपी में हमारी विजय का एक कारण ये भी है कि उन लोगों ने ऐसी राजनीति ने बहुत नुकसान सहा है। मैं बनारस का सांसद हूं। यूपी के लोगों के प्यार और आशीर्वाद से मुझे भी यूपीवाला बना दिया। बनारस का सांसद होने के नाते अनुभव से कह सकता हूं कि यूपी के लोग समझ चुके हैं कि जाति को बदनाम करने वालों से दूर रहना है। राज्य के विकास को ही सर्वोच्च प्राथमिकता देनी है।

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