पेट्रोल डीजल पड़ रहा भारी, एक वर्ष में पेट्रोलियम पदार्थ की कीमतों में भारी उछाल, समझे तेल के खेल की पूरी गणित..

पेट्रोलियम कंपनियों के द्वारा आमजन की जेब काटने का दौर जारी है। पिछले एक वर्ष से जारी वृद्धि आज भी पेट्रोल-डीजल को तेजी से 100 की तरफ धकेल रही है।

जयपुर@जागरूक जनता । पेट्रोलियम कंपनियों के द्वारा आमजन की जेब काटने का दौर जारी है। पिछले एक वर्ष से जारी वृद्धि आज भी पेट्रोल-डीजल को तेजी से 100 की तरफ धकेल रही है। कोरोना जैसी महामारी के बीच पिछले 1 वर्ष में पेट्रोल पर 18 रुपए 48 पैसे और डीजल पर 16 रुपए 43 पैसे की जबरदस्त वृद्धि हुई है। पेट्रोलियम कंपनियों की मनमानी के बीच आमजन त्राहिमाम कर रही है।

– एक वर्ष में पेट्रोल, डीज़ल की दर में जबरदस्त उछाल
– एक वर्ष में पेट्रोल में 18.48 रुपए लीटर की वृद्धि
– जबकि डीज़ल के दाम 16.43 रुपए लीटर बढ़े
– 11 फरवरी 2020 को पेट्रोल था 76.07 रुपए लीटर
– अब हो गया 94.55 रुपए प्रति लीटर
– 11 फरवरी 2020 को डीज़ल था 70.22 रुपए लीटर
– अब डीज़ल की दर पहुंची 86.65 रुपए प्रति लीटर

पेट्रोलियम के भाव बढ़ते घटते रहे हैं लेकिन कोरोना महामारी से त्रस्त वर्ष 2020 मे पेट्रोलियम कंपनियों ने आम जनता की कमर तोड़ कर ही रख दी है। पिछले तीन दशकों का रिकॉर्ड तोड़ते हुए पेट्रोलियम कंपनी में कंपनियों ने वर्ष 2020 में पेट्रोलियम के दामों में अभूतपूर्व वृद्धि की है। आज तक किसी 1 वर्ष में पेट्रोलियम के दाम कभी भी ₹5 से ज्यादा नहीं बड़े लेकिन वर्ष 2020 में यह वृद्धि पेट्रोल में 18 रुपए 48 पैसे और डीजल में 16 रुपए 43 पैसे रही। इस वृद्धि का असर कितना भयंकर और पीड़ादायक रहा उसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।

माल भाड़े में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिली

आंकड़ों में इस वृद्धि को देखें तो कमरतोड़ महंगाई का असल चेहरा सामने आता है। पेट्रोलियम के दामों में 1 वर्ष में ₹18 से अधिक वृद्धि होने से माल भाड़े में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिली, जिसका सीधा असर आम आदमी की जरूरत यानी रोटी, कपड़ा और मकान पर पड़ा। सब्जी, दाल, अनाज और खाद्य तेल महामारी में गुजरे वर्ष 2020 में सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गए। अधिकांश सब्जियों के भाव ₹100 के आंकड़े तक रहे, दालों में ₹20 से ₹50 तक की वृद्धि हुई, गेहूं सहित अन्य अनाज 5 से ₹10 महंगा हुआ और खाद्य तेल भी डेढ़ सौ के आंकड़े तक पहुंचा। कच्चे माल से लेकर रेडीमेड कपड़ों की कीमतों में वृद्धि हो गई और निर्माण सामग्री इतनी महंगी हो गई कि आम आदमी के लिए अपनी छत तैयार करना मुश्किल हो गया। पत्थर, बजरी, लोहा, सीमेंट, मार्बल सभी माल भाड़ा बढ़ने से काफी महंगे हो गए और आम आदमी की पकड़ से बाहर निकलते देख रहे हैं।

केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम पर 14 फ़ीसदी तक सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी बढ़ा दी
कोरोना काल में केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम पर 14 फ़ीसदी तक सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी बढ़ा दी। इधर राज्य सरकार ने भी पेट्रोल पर 8 और डीजल पर 6 फ़ीसदी वैट बढ़ाया, ₹76 पर बिकने वाला पेट्रोल 1 वर्ष में 94 रुपए 55 पैसे के स्तर पर पहुंच गया और तेजी से 100 का आंकड़ा सौ का आंकड़ा छूता दिखाई दे रहा है। ₹70 पर बिकने वाला डीजल 86 रुपए 55 पैसे के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया है । हालत इतनी खराब है कि पड़ोसी राज्यों से राजस्थान में पेट्रोलियम की दरों में 10 से ₹15 तक का अंतर है। ट्रांसपोर्टर अपने वाहनों में पड़ोसी राज्यों से पेट्रोल-डीजल भरवा रहे हैं। इसका नतीजा यह रहा कि प्रदेश में पेट्रोलियम की बिक्री में 30 से 50 फ़ीसदी तक की कमी आई है. आम जनता से लेकर पेट्रोलियम डीलर तक इससे परेशान है।

रसोई गैस की कीमतों में भी दो बार वृद्धि की जा चुकी
रसोई गैस की कीमतों में भी दो बार वृद्धि की जा चुकी है।हालांकि राज्य सरकार ने 28 जनवरी को पेट्रोल और डीजल पर वैट में 2 फ़ीसदी की कमी की है। लेकिन कोरोना काल में बढ़ाई गई वैट की दर पूरी तरह से वापस नहीं ली।इधर केंद्र सरकार ने भी एक्साइज ड्यूटी में कमी नहीं की है।पेट्रोलियम डीलर्स की पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग को भी अनसुना किया गया है। ऐसे में आशंका इस बात की है कि नया वित्त वर्ष शुरू होने से पहले पेट्रोल ₹100 के स्तर पर पहुंच जाएगा।

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