डॉ. जे.एल. चौधरी को राष्ट्रीय स्तर पर नई जिम्मेदारी, अनुसंधान सलाहकार समिति में सदस्य के रूप में मनोनयन

उदयपुर। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के महानिदेशक एवं डीएआरई सचिव द्वारा डॉ. जे.एल. चौधरी, पशुधन उत्पादन प्रबंधन (एलपीएम), एमेरिटस प्रोफेसर, एमपीयूएटी, उदयपुर को आईसीएआर-महात्मा गांधी एकीकृत कृषि अनुसंधान संस्थान (एमजीआईएफआरआई), पिपरकोठी, मोतिहारी, बिहार की अनुसंधान सलाहकार समिति (आरएसी) के सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया है। यह मनोनयन 20 अप्रैल 2026 से 19 अप्रैल 2029 तक तीन वर्ष की अवधि के लिए प्रभावी रहेगा। डॉ. चौधरी का पशुधन उत्पादन प्रबंधन, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षण क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान रहा है। उन्होंने अपने दीर्घ अनुभव और विशेषज्ञता से कृषि एवं पशुपालन आधारित अनुसंधान को नई दिशा प्रदान की है।

डॉ. जे. एल. चौधरी पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान के क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद्, शोधकर्ता एवं प्रशासक हैं। उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है, जिनमें विभागाध्यक्ष, लाइजन अधिकारी, आईसीएआर-एमेरिटस प्रोफेसर, अधिकारी प्रभारी तथा कॉलेज ऑफ वेटरिनरी एंड एनिमल साइंस, नवानिया (वल्लभनगर) के कार्यवाहक अधिष्ठाता शामिल हैं। वे महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी), उदयपुर में योजना एवं अनुश्रवण निदेशालय के निदेशक भी रह चुके हैं।

वे शैक्षणिक प्रशासन में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जैसे एसआर यूनिवर्सिटी, तेलंगाना में पीआरटी सदस्य, कृषि विश्वविद्यालय, कोटा में बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट सदस्य तथा वेटरिनरी एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, जोबनेर के सदस्य।

डॉ. चौधरी ने 6 एम.एससी. एवं 8 पीएच.डी. विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया है। उनके नाम 100 से अधिक शोध पत्र, 12 पुस्तकें, 8 प्रायोगिक पुस्तिकाएं, 8 तकनीकी बुलेटिन एवं 66 लोकप्रिय लेख प्रकाशित हैं। उनके नाम 6 पेटेंट भी प्रकाशित हैं तथा साथ ही, उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक अनुभव प्राप्त है और उन्होंने केन्या, थाईलैंड, ओमान, चीन, फ्रांस एवं यूएई जैसे देशों में अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए हैं। वे अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के आजीवन सदस्य हैं तथा उन्हें विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।

अनुसंधान सलाहकार समिति में उनकी भूमिका संस्थान की अनुसंधान गतिविधियों को सुदृढ़ बनाने, नई अनुसंधान प्राथमिकताओं को निर्धारित करने तथा वैज्ञानिक कार्यों को प्रभावी दिशा देने में महत्वपूर्ण होगी। इस उपलब्धि पर एमपीयूएटी, उदयपुर के शिक्षकों, वैज्ञानिकों एवं सहयोगियों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।

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