सिद्धू ने कृषि कानूनों के खिलाफ अपने घर पर काला झंडा लगाया

चंडीगढ़। पंजाब सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने किसान आंदोलन के मसले पर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को खुली चुनौती दे दी है। सिद्धू ने मंगलवार को अपने अमृतसर और पटियाला स्थित आवास पर काला झंडा फहराया। सिद्धू ने सोशल मीडिया पोस्ट में सभी लोगों से काले झंडे लगाने की गुजारिश की है।

इससे पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने रविवार को भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) से आग्रह किया था कि वे 28 मई से पटियाला में होने वाला तीन दिन का धरना न दें। इससे पंजाब में संक्रमण तेजी से फैल सकता है। CM की इस राय से उलट सिद्धू ने काला झंडा लगाकर उन्हें चुनौती दे दी।

सिद्धू ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है कि लोग अपनी छतों पर तब तक काला झंडा लगाए रखें, जब तक कि काले कानून रद्द नहीं किए जाते या फिर राज्य सरकार फसलों की खरीद और MSP को भरोसे लायक बनाने का कोई विकल्प नहीं देती।

26 मई को किसानों को तीन कृषि कानूनों के खिलाफ धरने पर बैठे 6 महीने पूरे हो जाएंगे। तीनों कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार और संयुक्त किसान मोर्चा के बीच चल रही बातचीत 4 महीनों से बंद है। इसके चलते किसानों ने 26 को काला दिवस मनाने का ऐलान किया है। पंजाब के 32 किसान संगठन इसकी तैयारियों में जुटे हैं।

दो साल से चल रहा है सिद्धू और कैप्टन का टकराव
दो साल पहले स्थानीय निकाय विभाग बदले जाने पर इस्तीफा देने वाले पूर्व कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू लगातार मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पर हमलावर हैं। सिद्धू पहले भाजपा नेता थे। लेकिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ट्यूनिंग बिगड़ने के कारण उन्होंने इस्तीफा दे दिया था और कांग्रेस में शामिल हो गए थे।

दो बार सुलह की कोशिश हुई, लेकिन कामयाबी नहीं मिली
कांग्रेस नेतृत्व CM अमरिंदर और सिद्धू के बीच दो बार सुलह की कोशिश करा चुका है, लेकिन दोनों ही कोशिशें नाकाम रहीं। 25 नवंबर 2020 को कैप्टन अमरिंदर के साथ सिद्धू की लंच के दौरान मीटिंग हुई थी। बैठक में CM के अलावा हरीश रावत मौजूद थे। वहीं, 17 मार्च 2021 को भी चाय पर चर्चा हुई, इसमें सिद्धू की नई पारी को लेकर सियासी हलकों में कई तरह की चर्चाएं होने लगी थीं। लेकिन, इस बार भी बात नहीं बनी थी।

डिप्टी CM बनना चाहते थे सिद्धू
कैप्टन मंत्रिमंडल में शामिल सिद्धू से स्थानीय निकाय विभाग छीन लिया गया था, इससे वे नाराज हो गए थे। उन्होंने कहा था कि वे अपना काम पूरी ईमानदारी से कर रहे थे तो बदलाव क्यों? बाद में यह चर्चा चली कि सिद्ध् डिप्टी CM पद चाहते हैं, जिसके लिए CM तैयार नहीं। अब विधानसभा चुनाव में महज एक साल से कम समय बचा है, ऐसे में सिद्धू को मनाने में पार्टी कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

चुनाव में हार या जीत में सिद्धू के प्रचार का अहम रोल हो सकता है। पंजाब ही नहीं, देश के अन्य राज्यों में होने वाले चुनाव में भी नवजोत सिद्धू पार्टी के स्टार प्रचारक हैं।

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