
अक्षय तृतीया का पावन पर्व इस साल 19 अप्रैल को मनाया जाएगा। ये दिन अत्यंत ही शुभ माना जाता है। कहते हैं इस दिन कोई भी शुभ कार्य बिना मुहूर्त देखे किया जा सकता है क्योंकि इस दिन अबूझ मुहूर्त होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिर्फ अक्षय तृतीया पर ही अबूझ मुहूर्त नहीं होता बल्कि साल में कुल साढ़े तीन दिन ऐसे होते हैं जब बिना पंचांग देखे कोई भी शुभ काम संपन्न किया जा सकता है। चलिए जानते हैं साल में कब-कब अबूझ मुहूर्त होता है और इस दौरान क्या-क्या काम किये जा सकते हैं।
अबूझ मुहूर्त कब-कब होता है?
पंचांग के अनुसार साल में मुख्य रूप से साढ़े तीन दिन अबूझ मुहूर्त या स्वयंसिद्ध मुहूर्त माने जाते हैं जो इस प्रकार है:
- चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी नवरात्रि का पहला दिन
- वैशाख शुक्ल तृतीया यानी अक्षय तृतीया
- आश्विन शुक्ल दशमी यानी विजय दशमी
- कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को आधा श्रेष्ठ मुहूर्त
अबूझ मुहूर्त में क्या करें?
सबसे ज्यादा शादियां इन्हीं दिनों में होती हैं, खासकर उन जोड़ों की जिनकी कुंडली का मिलान मुश्किल होता है।
ये दिन नए घर में प्रवेश करने या नींव रखने के लिए बेहद शुभ माने जाते हैं।
सोना-चांदी, वाहन, जमीन या कीमती चीजों की खरीदारी के लिए ये दिन शुभ होते हैं।
बच्चों से जुड़े संस्कार जैसे अन्नप्राशन, कर्णवेध, विद्यारंभ, नामकरण, मुंडन इत्यादि कार्यों के लिए भी ये दिन बेहद शुभ फलदायी माने जाते हैं।
नए व्यापार की शुरुआत इस दिन कर सकते हैं।
इसके अलावा इन दिनों में दान इत्यादि पुण्य कर्म करने से अक्षय यानी कभी न खत्म होने वाला पुण्य प्राप्त होता है।
क्या होता है अबूझ मुहूर्त
अबूझ मुहूर्त का अर्थ है एक ऐसा समय जो स्वयं सिद्ध हो। ज्योतिष अनुसार इन खास दिन में ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति इतनी अनुकूल होती है कि इस दौरान कोई भी शुभ कार्य बिना पंचांग देखे किये जा सकते हैं। कहते हैं इन दिनों में किये गए कार्य सफल होते हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। जागरूक जनता एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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