उपचुनाव: परिवारवाद, नया काम नहीं है अपवाद भी नहीं हैं। परिवार के लोग चुनाव लड़ते रहे हैं-पूनियां

प्रदेश की तीन सीटों पर होने वाले उप चुनाव के लिए भाजपा ने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। तीनों ही प्रत्याशी 30 मार्च को नामांकन दाखिल करेंंगे। तीनों के साथ पार्टी के प्रमुख नेता उपस्थित रहेंगे। प्रभारी अरुण सिंह को भी नामांकन दाखिल कार्यक्रम में आने का आग्रह किया गया है।

जयपुर। प्रदेश की तीन सीटों पर होने वाले उप चुनाव के लिए भाजपा ने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। तीनों ही प्रत्याशी 30 मार्च को नामांकन दाखिल करेंंगे। तीनों के साथ पार्टी के प्रमुख नेता उपस्थित रहेंगे। प्रभारी अरुण सिंह को भी नामांकन दाखिल कार्यक्रम में आने का आग्रह किया गया है।

प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां ने टिकट चयन पर कहा कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत टिकट दिए हैं। टिकट मांगने वाले बहुत सारे लोग थे, लेकिन जीतने की संभावना के आधार पर प्रत्याशियों का चयन किया गया है। पार्टी के प्रमुख लोगों ने जो राय दी थी और हमने जो सूची दिल्ली भेजी थी, उसका क्रॉस वेरीफिकेशन कराया गया हैं इसके अलावा दिल्ली ने खुद भी सर्वे कराकर और प्रमुख लोगों से विचार-विमर्श करने के बाद ही नाम घोषित किए हैं।

कर्जामाफी, बिगड़ी कानून-व्यवस्था और बेरोजगारी होंगे उप चुनाव के प्रमुख मुद्दे

पूनियां ने कहा कि हम जीत के लिए आश्वस्त हैं। जिस पार्टी की सरकार होती है तो उसे लाभ होता है। सरकार की ओर से सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया जाएगा, लेकिन सरकार के खिलाफ जो एंटी इनकमबेंसी पिछले कई दिनों में उभरी है, उसका लाभ हमें मिलेगा। इसके अलावा कर्जामाफी, बेरोजगारी और बिगड़ी कानून व्यवस्था ये तीन प्रमुख मुद्दे चुनाव में रहने वाले हैं। पंचायती राज में इन तीनों वजह से ही कांग्रेस को हार का सामना कना पड़ा है। लोगों का भाजपा के पक्ष में सकारात्मक और कांग्रेस के पक्ष में नकारात्मक माहौल है।

पेट्रोल-डीजल कांग्रेस का सेट मुद्दा है

पेट्रोल-डीजल के दामों को लेकर पूनियां ने कहा कि ये कांग्रेस के स्थायी मुद्दे हैं, जो पहले भी उठते रहे हैं। पेट्रोल—डीजल के दामों में उनकी सरकार के समय भी बढ़ोतरी हुई है। मगर इन तीनों विधानसभा क्षेत्रों में अवैध खनन, चौरी, डकैती के साथ ही ग्रामीण विकास का पैसा रोकने से रुका गांवों का विकास और बेरोजगारी भी लोकल इश्यू रहेंगे।

सभा, जुलूस नहीं जनसंपर्क पर फोकस

पूनियां ने कहा कि कोरोना की मर्यादा है, इसलिए सभा, जुलूस, रैली का मंजर नहीं दिखेगा। जनसंपर्क पर फोकस ज्यादा रहेगा। सीनियर लोगों को चुनाव प्रचार के लिए आग्रह करेंगे। पूनियां ने कहा कि चुनाव में आंगे जाति बड़ा फैक्टर नहीं है। उम्मीवार का चेहरा और नीति के साथ भविष्य की उम्मीद के आधार पर लोग वोट देंगे। आरएलपी की जहां तक बात है तो राजस्थान में तीसरा प्रयोग आज तक सफल नहीं हुआ है।

परिवार के लोग लड़ते रहे हैं चुनाव

टिकट में परिवारवाद के सवाल पर पूनियां ने कहा कि परिवार का तब होता है जब मां भी होती और बेटी भी होती। नया काम नहीं है अपवाद भी नहीं हैं। परिवार के लोग चुनाव लड़ते रहे हैं। रतन लाल जाट के उम्र के क्राइटेरिया पर पूनियां ने कहा कि 75 वर्ष की उम्र का क्राइटेरिया है और जाट की उम्र अभी 72 ही है।

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