कर्नाटक में कांग्रेस विजय के 5 कारण, कैसे फेल हुई मोदी-शाह की रणनीति?

Karnataka Assembly Election Result 2023: कर्नाटक में कांग्रेस पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाती नजर आ रही है। कर्नाटक के नतीजों के साथ-साथ अब रिजल्ट पर विश्लेषण भी शुरू हो गया है। कर्नाटक में कांग्रेस की जीत के कारणों पर मंथन जारी है। आइए जानते हैं कर्नाटक में कांग्रेस की जीत के पांच बड़े कारण क्या रहे?

बेंगलुरु। कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 में कांग्रेस स्पष्ट बहुमत से जीत हासिल कर लेने की दहलीज पर खड़ी है। अभी तक गिनती में 224 सीट वाले कर्नाटक में कांग्रेस ने 135 सीटों पर बढ़त बना रखी है। नतीजों से उत्साहित कांग्रेस अब राज्य में पूर्ण बहुमत के साथ स्थायी सरकार बनाने की कवायद में जुटी है। कर्नाटक में कांग्रेस की जीत देश की सियासी दिशा को बदलने वाली है। भाजपा के ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ के नारे के बीच 2024 लोकसभा चुनाव से पहले कर्नाटक में मिली जीत कांग्रेस के लिए संजीवनी जैसा काम करेगी। 2024 के लोकसभा चुनाव में थर्ट फ्रंड बनाने की कोशिश में जुटे विपक्षी दलों के लिए अब कांग्रेस को इग्नोर करना मुश्किल होगा। पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की चुनावी रणनीति और धुआंधार प्रचार के बाद भी कर्नाटक में कांग्रेस ने जिस तरीके से जीत हासिल की है, वह अपने आप में बहुत बड़ी बात है।

कर्नाटक की जीत का आगामी चुनाव पर पड़ेगा असर
कर्नाटक की जीत का असर इसी साल होने वाले मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के विधानसभा चुनाव पर देखने को मिलेगा। कर्नाटक का किला फतह करने के बाद कांग्रेस अब आगामी चुनावों में और आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरेगी। कर्नाटक के नतीजों के बाद अब रिजल्ट पर विश्लेषण हो रहा है।
कर्नाटक में कांग्रेस की जीत और भाजपा की हार के कारणों पर मंथन किया जा रहा है। आइए जानते हैं कर्नाटक में कांग्रेस की जीत के पांच बड़े कारण क्या रहे?

कर्नाटक में कांग्रेस की जीत के पांच बड़े कारण

  1. करप्शन, क्राइम और महंगाई के मुद्दे पर फोकस
    कर्नाटक में कांग्रेस ने भ्रष्टाचार का मुद्दा जोर-शोर से उछाला। भाजपा की बोम्मई सरकार में कथित भ्रष्टाचार को निशाना बनाते हुए उसने ’40 परसेंट की सरकार’ का अभियान चलाया। चुनावी रैलियों में भी राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी सहित कांग्रेस के अन्य नेता लगातार इस मुद्दे पर सरकार पर हमलावर रहे। साथ ही कांग्रेस ने कर्नाटक के क्राइम पर भी फोकस बनाए रखा। क्राइम-करप्शन से जुड़े सवालों को कांग्रेस लगातार चुनावी मुद्दे के रूप में उठाती रही।
    इसके अलावा कांग्रेस ने चुनाव के दौरान महंगाई के मुद्दे को भी खूब उठाया। वोटिंग के दिन कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने वोटिंग से पहले गैस सिलेंडर की कीमत देखने की अपील की। जगह-जगह कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने सिलेंडर की पूजा की। ये सब वैसे मसले हैं, जिससे हर किसी का सीधा संबंध होता है। आम जनों की आवाज बनने का असर आज कर्नाटक में कांग्रेस को जीत के रूप में मिली है।
  2. पुरानी पेंशन, फ्री बिजली, बेरोजगारी भत्ता जैसे पांच लुभावनी वायदे
    कांग्रेस नेता ने कर्नाटक चुनाव के लिए पांच वायदे किए। जिनमें पुरानी पेंशन बहाल करने, 200 यूनिट तक बिजली फ़्री देने, 10 किलो अनाज मुफ़्त देने, बेरोजग़ारी भत्ता देने और परिवार चलाने वाली महिला मुखिया को आर्थिक मदद की बात कही गई। ये सभी ऐसी घोषणाएं हैं, जिनसे अधिकांश लोगों का जुड़ाव है। इन लोक लुभावनी का वायदों को कर्नाटक की जनता पर असर पड़ा।
  3. सही चुनावी प्रबंधन, आक्रमक प्रचार
    कर्नाटक के लिए इस बार कांग्रेस ने चुनावी प्रबंधन काफी तगड़ी की थी। पार्टी के तेज-तर्रार नेता रणदीप सिंह सुरेजवाला को चुनाव से काफी पहले कर्नाटक का प्रभारी बनाकर भेज दिया था। जहां उन्होंने बेंगलुरु सहित अन्य क्षेत्रों में कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट किया।
    कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार, पूर्व सीएम सिद्धारमैया के साथ मिलकर उन्होंने चुनावी प्रबंधन की पूरी बागडोर संभाली। इस दौरान कांग्रेस ने भाजपा के कई बागी नेताओं को भी अपने पाले में किया। साथ ही कांग्रेस की एकता को बनाए रखा।
  4. भारत जोड़ो यात्रा और पार्टी आलाकमान का प्रचार में जान लगा देना
    कर्नाटक में कांग्रेस की जीत के पीछे राहुल गांधी भारत जोड़ो यात्रा का भी बड़ा असर रहा। इस यात्रा के दौरान राहुल गांधी और उनकी टीम कर्नाटक के सात जिलों की 51 विधानसभा सीटों से होकर गुजरी थी। इन 51 विधानसभा सीटों में से 37 सीटों पर कांग्रेस आगे चल रही है,जेडीएस 9 और बीजेपी सिर्फ़ 4 पर आगे है। भारत जोड़ो यात्रा के बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे सहित अन्य नेता कर्नाटक में धुआंधार प्रचार करते नजर आए। जिसका असर आज नतीजे के रूप में देखने को मिल रहा है।
    कर्नाटक की जीत पर राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने ट्वीट करते हुए लिखा राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान कर्नाटक में जो माहौल दिखा था आज उसी का नतीजा कर्नाटक के चुनाव परिणाम में स्पष्ट दिख रहा है।

राजस्थान, एमपी, सीजी और तेलंगाना में होगी पुनरावृतिः गहलोत
कर्नाटक के नतीजों पर राजस्थान सीएम अशोक गहलोत ने लिखा, यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी एवं प्रियंका गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं ने शानदार कैंपेन किया। कर्नाटक ने सांप्रदायिक राजनीति को नकार कर विकास की राजनीति को चुना है। आने वाले राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना विधानसभा चुनाव में भी इसकी पुनरावृत्ति होगी।

  1. बजरंग दल पर बैन लगाने का आश्वासन, बाद में फिर यू-टर्न
    कर्नाटक चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस ने घोषणा पत्र में बजरंग दल, पीएफआई जैसे संगठनों को बैन करने की घोषणा की। कांग्रेस का घोषणा पत्र सामने आते ही यह बड़ा चुनावी मुद्दा बन गया। पीएम मोदी ने इसे भगवान बजरंग बली का अपमान क़रार दिया और इसके बाद बीजेपी की ओर से इसे प्रमुख मुद्दा बनाया गया। तिम दिनों में चुनाव प्रचार का मुख्य मुद्दा बजरंग बली के इर्द-गिर्द बना रहा।
    भाजपा द्वारा इस बजरंग दल के मुद्दे को लपकने के बाद पहले तो कांग्रेस ने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। पार्टी ने साफ कहा कि बजरंग बली हमारे आराध्य है। बात बजरंग दल पर बैन लगाने की हो रही है। लेकिन इसके बाद भाजपा द्वारा बजरंग बली के मुद्दे को उठाने रहने पर कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने यू-टर्न लेते हुए कहा कांग्रेस सत्ता में आई तो जगह-जगह हनुमान जी की मंदिर बनवाएंगी। इससे भाजपा का बजरंग बली दांव भी फेल हो गया।

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