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केवलादेव से लेकर सांभर तक राज्य पक्षियों के लिए स्वर्ग

  • राष्ट्रीय पक्षी दिवस आज
  • सार्वजनिक जागरूकता के साथ प्रवासी एवं स्थानीय पक्षियों के संवर्धन एवं संरक्षण के लिए संकल्पबद्ध राज्य सरकार

जयपुर। वर्ष 2002 से संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा प्रतिवर्ष 5 जनवरी को राष्ट्रीय पक्षी दिवस के रूप में इसलिए मनाया जाता है ताकि आमजन में पक्षियों की प्रजातियों की सुरक्षा एवं संवर्धन को लेकर जागरूकता पैदा की जा सके। इस दिन का विशेष महत्व इसलिए भी है कि विश्व भर में पक्षियों की पाए जाने वाली प्रजातियों एवं विलुप्त होती प्रजातियों को वर्तमान परिपेक्ष्य में खतरे की सम्भावना एवं बचाव के संभावित रास्तों पर चर्चा कर कोई हल निकाला जा सके। इस वर्ष राष्ट्रीय पक्षी दिवस का विषय ‘राइट तो फ्लाइट’ है। जो की पक्षी की उड़ान से सम्बंधित है साथ ही पक्षियों की आजाद उड़ान का भी प्रतीक है।।

एक ओर जहाँ जलवायु परिवर्तन और बदलते परिवेश की वजह से वन्य जीवों और पक्षियों की प्रजातियों के साथ प्राकृतिक संतुलन पर खतरा मंडरा रहा है वही राजस्थान में केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी विहार, सांभर झील, खींचन, मानसागर, आनासागर, फतेहसागर कुछ ऐसी जगह है ,जहाँ पक्षियों के लिए भोजन एवं आवश्यक वातावरण की उपलब्धता की वजह से ये स्थान पक्षियों स्वर्ग के नाम से जाने जाते है और यही कारण है कि प्रतिवर्ष सर्दियों के मौसम में यहाँ हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षी हजारों किलोमीटर की लंबी यात्रा तय करके पहुंचते है।

  • 400 से अधिक पक्षियों की प्रजातियों का स्वर्ग है केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी उद्यान, वही फ्लेमिंगो के लिए प्रसिद्ध है सांभर झील राज्य में भरतपुर जिला स्थित यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट एवं रामसर वेटलैंड साइट केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी उद्यान एक ऐसा स्थान है जहाँ देश विदेशों से स्पूनबिल, पेंटेड स्ट्रोक, ओपन बिल स्टॉर्क , ग्रे हेरॉन, कोरमोरेंट्स, इबिस जैसी प्रजातियों के पक्षी अफगानिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, चाइना, साइबेरिया जैसे देशों से चलकर सितंबर-नवंबर माह में यहां पहुंचते है एवं फरवरी माह तक यही रुक कर प्रजनन का कार्य करते है। ऐसे में यहां के प्राकृतिक वातावरण एवं भोजन की सुलभ उपलब्धता हजारों की संख्या में पक्षियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहता है।

केवलादेव न केवल पक्षियों एवं वन्यजीवों के लिए स्वर्ग है बल्कि स्थानीय निवासियों के लिए एक रोजगार का बड़ा साधन है। देशी विदेशियों पक्षियों की वजह से प्रति वर्ष हजारों की संख्या में आने वाले देशी विदेशी प्रयटकों से गुलजार होता भरतपुर यहाँ की होटल इंडस्ट्री एवं टूरिज्म इंडस्ट्री के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।वहीं राज्य सरकार की जीव कल्याण की प्रतिबद्धता एवं वन विभाग की सतर्कता के चलते अब केवलादेव में पूर्णतया प्लास्टिक के उपयोग पर रोक लगा दी गयी है ताकि केवलादेव को प्लास्टिक प्रदूषण मुक्त बनाया जा सके।

इसी के साथ राज्य के जयपुर जिला स्थित सांभर एक ऐसी झील है जहाँ देश भर में सबसे बड़ा नमक का स्रोत है तो साथ में पक्षियों एवं वन्यजीवों का घर भी। सांभर रामसर साइट (अंतर्राष्ट्रीय महत्व की मान्यता प्राप्त आर्द्रभूमि) के साथ उत्तरी एशिया और साइबेरिया से प्रवास करने वाले हजारों फ्लेमिंगो और अन्य पक्षियों के लिए एक प्रमुख शीतकालीन क्षेत्र है।

  • जागरूकता से ही बचाव संभव, मकर संक्रांति पर पक्षियों का रखें विशेष ख्याल

पक्षीविद एवं पक्षी रोग विशेषज्ञ डॉ. ऋतुजा का कहना है कि जिस तरह से पक्षियों की प्रजातियां विलुप्त हो रही है और संख्या में लगातार कमी आ रही है ऐसे में कैप्टिव प्रजनन हो या फिर सतत निगरानी के साथ आमजन में पक्षियों की भूमिका को लकर जागरूकता बेहद आवश्यक है। जिसके परिणामस्वरूप निश्चित तौर पर विलुप्त होती प्रजातियों को बचाया जा सकेगा एवं आने वाली पीढ़ी को पक्षियों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए जागरूक भी किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति जैसे पावन पर्व पर पतंगबाजी की वजह सैंकड़ों की संख्या में पक्षी घायल हो जाते है ऐसे में पतंगबाजी से भी बचे और घायल पक्षियों की मदद के लिए सदैव तत्पर रहने का प्रयास करें।

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