सरकार को विदेश में झटका:केयर्न एनर्जी ने पेरिस में भारत सरकार की 20 प्रॉपर्टी को फ्रीज किया, जिसकी कीमत 176 करोड़ रुपये से ज्यादा

मुंबई। ब्रिटेन की पेट्रोलियम कंपनी केयर्न एनर्जी (Cairn Energy) और भारत सरकार के बीच टैक्स विवाद गहराता जा रहा है। केयर्न एनर्जी ने अब भारत सरकार के खिलाफ कार्रवाई करना भी शुरू कर दिया है। लंदन के फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक केयर्न एनर्जी ने पेरिस में भारत सरकार के ओनरशिप वाली 20 संपत्तियों को फ्रीज कर दिया है।

पेरिस में सरकार की 20 प्रॉपर्टी सीज
केयर्न की ये कार्रवाई इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए आदेश के बाद की गई है, जिसमें कहा गया है कि भारत सरकार 1.7 बिलियन डॉलर (करीब 12,600 करोड़ रुपये) का भुगतान करेगी। कंपनी ने कहा कि वह 20 संपत्तियों के ओनरशिप को ट्रांसफर करेगी, जिनकी कीमत 20 मिलियन यूरो (176 करोड़ रुपये) से ज्यादा है। रिपोर्ट के मुताबिक उसने फ्रांस की एक अदालत ने संपत्ति फ्रीज करने की मंजूरी दी है।

न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, 11 जून को एक फ्रांस की अदालत ने केयर्न एनर्जी को भारत सरकार की संपत्तियों का अधिग्रहण करने का आदेश दिया, जिसके बाद फ्रीज करने की कानूनी प्रक्रिया बुधवार शाम को पूरी हो गई है। केयर्न एनर्जी ने मई में एयर इंडिया पर मध्यस्थता लागू करने के लिए मुकदमा दायर किया था, जिसे उसने भारत के खिलाफ टैक्स विवाद में जीता था।

ऑयल ग्रुप ने क्या कहा?
ऑयल ग्रुप का कहना है कि, फ्रांस की अदालत ट्रिब्यूनल ज्यूडिशियरी डी पेरिस ( Judiciaire de Paris) ने संपत्ति फ्रीज को मंजूरी दी है। संपत्तियों की ओनरशिप लेने के लिए एक आवश्यक कदम था।

देवास मल्टीमीडिया में शेयरधारकों ने भारत सरकार के खिलाफ मध्यस्थता पुरस्कारों में जीती गई राशि की वसूली के प्रयास में एयर इंडिया पर मुकदमा दायर किया है और अपने प्रमुख वाहक की विदेशी संपत्ति को जब्त कर लिया है, मीडिया रिपोर्टों ने पिछले महीने कहा था।

पिछले महीने मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि देवास मल्टीमीडिया ने सरकारी एयर लाइन कंपनी एयर इंडिया की विदेश में संपत्ति को सीज करेगी, क्योंकि उसने भारत सरकार के खिलाफ मध्यस्थता अदालत में जीत दर्ज की थी।

केयर्न इन देशों की अदालतों में अपील दायर कर चुकी है
केयर्न 21 दिसंबर के अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण के फैसले को लेकर भारत के खिलाफ अमेरिका, ब्रिटेन, नीदरलैंड, कनाडा, फ्रांस, सिंगापुर और क्यूबेक की अदालतों में पहले ही अपील दायर कर चुकी है। इससे उसके लिए भारत सरकार की विदेशी संपत्तियों को सीज करना और मध्यस्थता न्यायाधिकरण द्वारा तय रकम की वसूली करना आसान हो सकता है।

रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स मामले में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने केयर्न के पक्ष में फैसला सुनाया था और भारत सरकार को केयर्न को भुगतान करने को कहा था। यह फैसला दिसंबर 2020 में आया था। एक तरफ भारत सरकार ने मध्यस्थता न्यायाधिकरण के फैसले को अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में चुनौती दी है, वहीं दूसरी तरफ केयर्न एनर्जी ने विदेशों में भारत सरकार की संपत्ति की पहचान करना शुरू कर दिया है। इनमें सरकारी बैंकों के विदेशी अकाउंट्स भी शामिल हैं। अगर केयर्न और भारत सरकार के बीच सेटलमेंट नहीं हुआ तो कंपनी इन अकाउंट्स को सीज कर सकती है।

केयर्न ने भारत में 1994 में शुरूआत की थी
केयर्न ने भारत में तेल और गैस की खोज और उत्खनन के काम में 1994 में पहली बार कदम रखा था। उसे राजस्थान में तेल का बड़ा भंडार मिला था।

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