जोबनर: अधिनियम उल्लंघन और अनुशासनहीनता के आरोप में कार्यवाहक कुल सचिव देवेंद्र चौहान पद से बेदख़ल, परिवाद दर्ज

जोबनर. श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनर में प्रशासनिक अनुशासन को लेकर एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया गया है। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बलराज सिंह ने कार्यवाहक कुल सचिव देवेंद्र चौहान को विश्वविद्यालय अधिनियम 2013 की धारा 27(1) के उल्लंघन और गंभीर अनुशासनहीनता के आरोप में तत्काल प्रभाव से कार्य से बेदख़ल कर दिया है।

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, देवेंद्र चौहान ने 26 मई 2025 को कार्यवाहक कुल सचिव का कार्यभार ग्रहण किया था। लेकिन इसके तुरंत बाद उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन में बिना वैधानिक अनुमति के हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया।

चौहान पर आरोप है कि उन्होंने विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव डॉ. देवाराम बाजिया को रात्रि में व्हाट्सऐप कॉल कर धमकी दी, विजिलेंस कमेटी के बोर्ड द्वारा लिए गए सर्वसम्मत निर्णय को स्वयं निरस्त कर आदेश जारी कर दिए, और रात के समय बिना अधिकृत अनुमति के कुलसचिव कार्यालय से फाइलें मंगवाईं।

यह तथ्य अत्यंत गंभीर है क्योंकि विजिलेंस कमेटी का बोर्ड विश्वविद्यालय की सर्वोच्च वैधानिक इकाई है, और उसके निर्णय को केवल माननीय राज्यपाल द्वारा ही निरस्त किया जा सकता है। चौहान द्वारा बोर्ड की शक्तियों का अतिक्रमण स्पष्ट रूप से अधिनियम की अवहेलना है।

जैसे ही यह जानकारी कुलपति डॉ. बलराज सिंह को प्राप्त हुई, उन्होंने तत्काल एक जांच समिति गठित कर रिकॉर्ड का निरीक्षण करवाया। समिति की रिपोर्ट में चौहान द्वारा की गई कई प्रशासनिक अनियमितताओं की पुष्टि हुई।

विश्वविद्यालय अधिनियम 2013 की धारा 27(1) के अनुसार:

“कुल सचिव कुलपति की पूर्वानुमति के बिना कोई भी प्रशासनिक आदेश जारी नहीं कर सकता।”

उक्त अधिनियम के स्पष्ट उल्लंघन, प्रशासनिक अनुशासन भंग करने, और कार्य में बाधा डालने जैसे कृत्यों के चलते कुलपति डॉ. बलराज सिंह ने देवेंद्र चौहान को तत्काल प्रभाव से कार्य से बेदख़ल के आदेश जारी किया।

इसके साथ ही सरकारी कार्य में बाधा डालने एवं अधिनियम की अवहेलना के मामलों में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा देवेंद्र चौहान के विरुद्ध परिवाद कराई गई है।

यह भी महत्वपूर्ण है कि विश्वविद्यालय अधिनियम के अनुसार प्रोबेशन पर कार्यरत अधिकारी को कुल सचिव जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकता, किंतु इसके बावजूद चौहान को कार्यवाहक कुल सचिव बनाए जाने पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।

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