लैंड स्कैम: यू-टर्न, रिटायर्ड IAS अधिकारी समेत तीन से मामला वापस लेने के लिए कोर्ट में गहलोत सरकार ने दायर की अर्जी

एक पूर्व IAS अधिकारी और दो अन्य नौकरशाहों के खिलाफ कथित भूमि घोटाले (लैंड स्कैम) के एक मामले में यू-टर्न लेते हुए, राजस्थान की गहलोत सरकार ने उनके खिलाफ मामला वापस लेने के लिए अदालत में एक आवेदन दिया है। उनके खिलाफ चार साल पहले (2016) चार्जशीट दायर की गई थी।

जयपुर। एक पूर्व IAS अधिकारी और दो अन्य नौकरशाहों के खिलाफ कथित भूमि घोटाले (लैंड स्कैम) के एक मामले में यू-टर्न लेते हुए, राजस्थान की गहलोत सरकार ने उनके खिलाफ मामला वापस लेने के लिए अदालत में एक आवेदन दिया है। उनके खिलाफ चार साल पहले (2016) चार्जशीट दायर की गई थी। एसीबी ने तीन अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी – जीएस संधू जोकि एक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी और वर्तमान में राजस्थान क्रिकेट संघ के अध्यक्ष वैभव गहलोत के सलाहकार हैं; निश्काम दिवाकर (रिटायर्ड राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) अधिकारी) और ओंकारमल सैनी जोकि 2016 में बीजेपी की सत्ता के दौरान आरएएस अधिकारी थे।

एसीबी ने 3 दिसंबर, 2014 को भूमि घोटाले में एक एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें 2011 में कांग्रेस सरकार ने 2005 की वसुंधरा राजे सरकार के एक फैसले को रद्द कर दिया था। इसमें जयपुर के जगतपुरा इलाके में एक निजी फर्म को तीन खसरा कृषि भूमि दी गई थी। जुलाई 2016 में दायर एसीबी की चार्जशीट में बताया गया था कि संधू जो 2010-11 में प्रमुख सचिव यूडीएच थे; दिवाकर तब यूडीएच में उप-सचिव थे और जयपुर विकास प्राधिकरण के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर सैनी कथित रूप से जमीन आवंटित करने में आपराधिक साजिश का हिस्सा थे।

इसी वजह से सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा 409, 420, 120-बी समेत अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। तीनों की गिरफ्तारी भी हुई थी, लेकिन बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। जुलाई, 2019 में संधू और दिवाकर ने सरकार के पास मामले की समीक्ष करने और केस को वापस लेने का आग्रह किया था। इसके बाद, सरकार ने तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया, जिसने केस को वापस लिए जाने की सिफारिश की। 19 जनवरी, 2021 को मामले को वापस लेने के लिए कोर्ट में एक आवेदन दिया गया।

कोर्ट में अपने आवेदन में गहलोत सरकार ने बताया है कि जांच में एसीबी को सरकार और जेडीए के राजस्व का कोई नुकसान नहीं मिला है। विवादित भूमि सरकार की नहीं थी और लीज डीड के मालिक ने इसकी शिकायत जेडीए या एसीबी से नहीं की है। इसके अलावा, कहा गया है कि जांच में कहीं नहीं पाया गया कि विभाग के अधिकारी या कर्मचारी को लाभ हुआ या वे किसी साजिश में शामिल थे।

नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर एसीबी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सरकार सार्वजनिक हित में सीआरपीसी की धारा 321 के तहत मामले को वापस ले सकती है। इस मामले में एक कमेटी बनाई गई, जिसने मामले को वापस लेने की सिफारिश की और बताया कि कोई गलत फायदे के सबूत नहीं मिले हैं। इस मामले पर टिप्पणी करते हुए संधू ने कहा कि यह पूरी तरह से सरकार के स्तर पर और अच्छे मन में लिया गया एक प्रशासनिक निर्णय था, जिसे दुर्भावनापूर्ण इरादों के साथ आपराधिक साजिश में बदल दिया गया। वहीं, एडिशनल एडवोकेट जनरल विभूति भूषण शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार को मामलों को वापस लेने का अधिकार है। इस मामले की अगली सुनवाई 12 फरवरी को होगी।

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