FPO पहले भी हुए वापस, इससे देश की छवि बेअसर:अडाणी मामले पर वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा- सेबी स्वतंत्र रूप से मामले को देख रही

नई दिल्ली। गौतम अडाणी मामले पर आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि नियामक अपना काम कर रहे हैं। सेबी को सरकार ने स्वतंत्र छोड़ दिया है, ताकि वो इस मामले की सही से जांच कर सके। वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकों और LIC ने RBI को अडाणी समूह को लेकर अपने एक्सपोजर के बारे में बताया है। आज हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों को उन्होंने ये जानकारी दी।

अडाणी ग्रुप के FPO वापस लेने पर निर्मला सीतारमण ने कहा कि देश में कई बार FPO वापस लिए गए हैं, और इससे भारत की छवि पर कोई फर्क नहीं पड़ा।

हर बाजार में होते हैं उतार-चढ़ाव
FPO आते हैं और बाहर निकल जाते हैं। उतार-चढ़ाव हर बाजार में होते हैं। तथ्य यह है कि पिछले कुछ दिनों में हमारे पास 8 अरब डॉलर (विदेशी मुद्रा रिजर्व) आया है, यह साबित करता है कि भारत और इसकी ताकत के बारे में धारणा बरकरार है।”

देश का बैंकिंग सिस्टम मजबूत और स्थिर
इससे पहले RBI ने शुक्रवार को कहा था कि देश का बैंकिंग सिस्टम मजबूत और स्थिर है। RBI ने कहा कि वह लगातार बैंकिंग सिस्टम की निगरानी कर रहा है। RBI ने कहा कि उसके पास बड़े कर्जों से संबंधित सूचनाओं का केंद्रीय संग्रह (CRILC) डेटाबेस प्रणाली है, जहां बैंक अपने 5 करोड़ और इससे अधिक के कर्ज की जानकारी देते हैं। इस जानकारी का इस्तेमाल निगरानी के लिए किया जाता है। हालांकि, RBI ने अपने बयान में अडाणी ग्रुप का नाम नहीं लिया।

बैंकों और बीमाकर्ताओं का जोखिम सीमा से बाहर नहीं
नेटवर्क18 को दिए इंटरव्यू में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कहा कि बैंकों और बीमाकर्ताओं का जोखिम “तय लिमिट” के अंदर था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि LIC और SBI दोनों ने ही अडाणी ग्रुप के लिए कुछ स्पेशल व किसी सीमा से बाहर नहीं किया है।

उन्होंने कहा कि LIC और SBI ने अडाणी के लिए अपने जोखिम पर विस्तृत बयान जारी किया है। LIC और SBI ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उनका जोखिम ‘तय सीमा के भीतर है’ और वे मुनाफे में ही हैं।

विपक्ष की मांग- JPC या सुप्रीम कोर्ट पैनल करे जांच
अडाणी ग्रुप में SBI और LIC का पैसा लगाने के मुद्दे पर लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष इसकी जांच जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) या सुप्रीम कोर्ट के पैनल से कराने की मांग कर रहा है। इस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि देश का शेयर मार्केट नियमों के मुताबिक चल रहा है। अडाणी के बिजनेस विवाद की वजह से निवेशकों का भरोसा डगमगाने की आशंका नहीं है।

विपक्ष का आरोप- लोगों की मेहनत का पैसा अडाणी को दिया गया
सरकारी बैंक SBI ने अडाणी ग्रुप को 21.38 हजार करोड़ रुपए का लोन दिया है। वहीं, फाइनेंस और इंश्योरेंस कंपनी LIC ने पिछले कुछ साल में अडाणी ग्रुप में 30,127 करोड़ रुपए का इन्वेस्टमेंट किया है। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने से पहले LIC का ग्रुप के शेयरों से प्रॉफिट 81,000 करोड़ रुपए था, जो 2 फरवरी को 43,000 करोड़ रुपए रह गया। विपक्षी नेताओं का कहना है कि शेयर बाजार का यह अमृतकाल का सबसे बड़ा महाघोटाला है।

ACE इक्विटी के पास अवेलेबल डेटा के मुताबिक, 31 दिसंबर 2022 तक LIC के पास अडाणी ग्रुप में करीब 1% ( 0.975%) हिस्सेदारी है। बीते 6 ट्रेडिंग सेशन में LIC का अडाणी ग्रुप में इन्वेस्टमेंट लगभग आधा रह गया है। विपक्ष का कहना है कि लोगों की मेहनत का पैसा बर्बाद हो रहा है। लोगों का विश्वास SBI और LIC से उठ जाएगा।

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद अडाणी के शेयर्स में गिरावट
24 जनवरी की शाम को हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने से पहले अडाणी एंटरप्राइजेज के शेयर की कीमत 3400 रुपए के करीब थी। शुक्रवार को यह करीब एक हजार रुपए तक नीचे आ गया। फिर रिकवर होकर 1,531 रुपए पर बंद हुआ।

Date:

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

शिक्षा, सेवा और संकल्प का नाम: डॉ. राजकुमार

आबूरोड़. माधव विश्वविद्यालय के चेयरमैन डॉ. राजकुमार उन शिक्षाविदों...

Jagruk Janta Hindi News Paper 25 Febuary 2026

Jagruk Janta 25 Febuary 2026Download जागरूक जनता व्हाट्सएप चैनल को...