जसोल Dham में Somnath ज्योतिर्लिंग के पावन अंश के दिव्य दर्शन

सनातन आस्था, आध्यात्मिक चेतना एवं सांस्कृतिक वैभव का ऐतिहासिक आयोजन

जसोल (बालोतरा) @ जागरूक जनता. भारत की सनातन धार्मिक परंपरा, शाश्वत आध्यात्मिक चेतना तथा गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन एवं प्रसार के उद्देश्य से श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल एवं आर्ट ऑफ लिविंग के संयुक्त तत्वावधान में जसोलधाम में एक अत्यंत पावन, दिव्य एवं ऐतिहासिक आध्यात्मिक आयोजन गरिमामय रूप से संपन्न हुआ। यह आयोजन श्री श्री रविशंकर के मार्गदर्शन में आध्यात्मिक ऊर्जा, शांति एवं सकारात्मक चेतना से ओतप्रोत रहा।

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के पावन अंश का ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्व

इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं को लगभग एक हजार वर्ष प्राचीन सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के पावन अंश के दुर्लभ एवं सौभाग्यपूर्ण दर्शन का अवसर प्राप्त हुआ। धार्मिक मान्यताओं एवं ऐतिहासिक परंपराओं के अनुसार यह दिव्य अंश प्राचीन काल से संत–महात्माओं एवं आचार्यों की परंपरागत देखरेख में विधिपूर्वक संरक्षित रहा है तथा युगों–युगों से शिवभक्ति, आध्यात्मिक चेतना एवं सनातन आस्था का सजीव प्रतीक माना जाता रहा है।

जसोलधाम में निर्धारित समय पर भव्य दर्शन कार्यक्रम

दिनांक 24 दिसंबर 2025, बुधवार को श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल (जसोलधाम) परिसर में यह आयोजन सायं 04:00 बजे से 06:30 बजे तक शांत, सुव्यवस्थित एवं अत्यंत मर्यादित वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवधि में हजारों श्रद्धालुओं ने अनुशासनपूर्वक दिव्य ज्योतिर्लिंग अंश के दर्शन किए तथा आत्मिक शांति, संतोष एवं आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति प्राप्त की।

संस्थान अध्यक्ष एवं समिति सदस्यों द्वारा पारंपरिक स्वागत

ज्योतिर्लिंग अंश के जसोलधाम आगमन पर संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह, जसोल एवं संस्थान समिति सदस्यों द्वारा पारंपरिक राजस्थानी रीति–रिवाजों के साथ भव्य एवं गरिमामय स्वागत किया गया। इस अवसर पर गैर नृत्य, दमामी एवं मांगणियार लोक कलाकारों की प्रभावशाली प्रस्तुतियों ने वातावरण को श्रद्धा, उल्लास एवं राजस्थानी सांस्कृतिक वैभव से सराबोर कर दिया।

रावलगढ़, जसोल में ऐतिहासिक एवं वैदिक स्वागत

जसोलधाम में दर्शन कार्यक्रम संपन्न होने के उपरांत ज्योतिर्लिंग अंश को संस्थान अध्यक्ष के निज निवास रावलगढ़, जसोल ले जाया गया, जहाँ वैदिक मंत्रोच्चार, पारंपरिक राजस्थानी परंपराओं एवं सांस्कृतिक आयोजनों के साथ अत्यंत भव्य एवं ऐतिहासिक स्वागत संपन्न हुआ।

आर्ट ऑफ लिविंग के सदस्यों की गरिमामयी उपस्थिति एवं ऐतिहासिक उद्बोधन

इस ऐतिहासिक आयोजन में आर्ट ऑफ लिविंग के स्वामी प्रमानंद जी सहित जयपुर, जोधपुर एवं बालोतरा क्षेत्र के वरिष्ठ आचार्यगण की विशेष उपस्थिति रही।

स्वामी प्रमानंद जी ने अपने प्रेरणादायी एवं तथ्यपरक उद्बोधन में बताया कि वर्ष 1025 ईस्वी में महमूद गजनवी द्वारा सोमनाथ ज्योतिर्लिंग पर आक्रमण कर उसे खंडित कर दिया गया था। उस समय कुछ अग्निहोत्री ब्राह्मणों ने खंडित ज्योतिर्लिंग के पावन अंशों को सुरक्षित करते हुए दक्षिण भारत ले जाया तथा उन्हें छोटे–छोटे शिवलिंगों का स्वरूप देकर लगातार लगभग नौ सौ (900) वर्षों तक गुप्त रूप से विधिपूर्वक पूजा–अर्चना करते रहे।

इसके पश्चात वर्ष 1924 ईस्वी में कांची के शंकराचार्य जी द्वारा यह निर्देश दिया गया कि भारत की स्वतंत्रता एवं श्रीराम मंदिर की भव्य प्राण–प्रतिष्ठा के पश्चात, सौ (100) वर्षों के उपरांत इन पावन ज्योतिर्लिंग अंशों को उस समय के एक तमिल संत जिनका नाम शंकर होगा, उन्हें यह सुपुर्द कर दे। तथा तब तक इन्हें पूर्णतः गुप्त एवं संरक्षित रखा जाए।

इसी परंपरा के अंतर्गत दक्षिण भारत के शंकराचार्य के मार्गदर्शन में पंडित सीतारमन शास्त्री द्वारा ये पवित्र ज्योतिर्लिंग अंश आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर जी को विधिवत रूप से सुपुर्द किए गए।

इन शिवलिंगों पर कराए गए भूवैज्ञानिक एवं वैज्ञानिक अध्ययनों से यह तथ्य सामने आया कि इनमें दिव्य चुंबकीय शक्ति विद्यमान है, जो सामान्यतः पत्थरों में किनारों पर पाई जाती है, जबकि इन ज्योतिर्लिंग अंशों में यह शक्ति मध्य भाग में केंद्रित पाई गई। उल्लेखनीय है कि इनमें लोहे की मात्रा दो प्रतिशत से भी कम है, जबकि इतनी अल्प लौह मात्रा में किसी पदार्थ का चुंबकीय होना वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यंत असाधारण माना जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी पर इस प्रकार के पत्थर का न तो पूर्व में कोई उदाहरण मिला है और न ही किसी शोध में इसका उल्लेख प्राप्त हुआ है।

यह भी निर्णय लिया गया है कि इन पावन ज्योतिर्लिंग अंशों को भारत के उन राजपरिवारों के यहाँ दर्शनार्थ ले जाया जाएगा, जिन्होंने इतिहास में विध्वंसकारी शक्तियों के विरुद्ध युद्ध कर धर्म, संस्कृति एवं सनातन परंपरा की रक्षा की। यह यात्रा शौर्य, त्याग एवं सनातन मूल्यों के प्रति सम्मान की जीवंत अभिव्यक्ति होगी।

श्री नर्बदेश्वर महादेव मंदिर में विशेष पूजन

कार्यक्रम की अगली कड़ी में गुरुवार को ज्योतिर्लिंग अंश को श्री नर्बदेश्वर महादेव मंदिर में दर्शनार्थ ले जाया गया, जहाँ विधिपूर्वक विशेष पूजन, वेद मंत्रोच्चार, अभिषेक एवं महाआरती संपन्न हुई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह, जसोल का संदेश

इस पावन अवसर पर संस्थान अध्यक्ष, रावल श्री मल्लीनाथ जी के 25वें गादीपति एवं उनके वंशज रावल किशन सिंह, जसोल ने कहा— “सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के पावन अंश का जसोल आगमन संपूर्ण क्षेत्र के लिए गौरव, सौभाग्य एवं आध्यात्मिक चेतना का विषय है। जसोलधाम, रावलगढ़ एवं श्री नर्बदेश्वर महादेव मंदिर में संपन्न कार्यक्रमों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक रूप से एक सूत्र में बाँधते हुए जनमानस में आस्था, सकारात्मकता एवं आत्मिक बल का विस्तार किया है।”

75वें जन्मदिवस का पावन एवं ऐतिहासिक संयोग

यह दिव्य आयोजन संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह, जसोल के 75वें जन्मदिवस के पावन अवसर से जुड़ा एक अत्यंत शुभ, स्मरणीय एवं ऐतिहासिक संयोग भी रहा। इस अवसर पर न्यायिक विभाग, जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं हजारों श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति रही तथा आयोजन अत्यंत सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल में संपन्न यह दिव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन सनातन संस्कृति की निरंतरता, आध्यात्मिक मूल्यों की दृढ़ता, सांस्कृतिक चेतना के संरक्षण तथा सामाजिक समरसता का सशक्त संदेश देने वाला सिद्ध हुआ। यह आयोजन श्रद्धालुओं के हृदय में आस्था, श्रद्धा एवं आध्यात्मिक चेतना को और अधिक प्रबल करने वाला, दीर्घकाल तक स्मरणीय अध्याय बन गया।

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