संपादक कॉलम

गणतंत्र में नए संदर्भ की जरूरत

शिव दयाल मिश्रासभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ। आज हम अपना गणतंत्र का 73वां उत्सव मना रहे हैं। हमारे पुरखों की संघर्ष-चेतना के...

रिश्वत तेरे रूप अनेक!

शिव दयाल मिश्राएक कहावत है जिसे मौके-बे-मौके किसी को भी कहते सुना जा सकता है। रिश्वत भी गिरगिट की तरह रंग बदलती रहती है।...

चुनाव लडऩे के बजाए अगर खेला जाए तो!

शिव दयाल मिश्रापांच राज्यों के चुनावों की तारीखों की घोषणा हो चुकी है। पांच राज्यों में दो महीनों तक सियासी घमासान चलने वाला है।...

परिस्थिति का फायदा उठाना भी कोई नैतिकता है!

शिव दयाल मिश्रापिछले कोई पौने दो वर्षों से पूरा विश्व कोरोना की मार झेल रहा है। इस कोरोना की मार में कई लोग और...

दुनिया से जुड़कर भी मोबाइल माला से हम हो रहे अकेले!

शिव दयाल मिश्रामोबाइल ने आज माला को गायब कर दिया है। एक जमाना था तब भगवान में अटूट विश्वास रहता था। हर समय इंसान...

Popular

Subscribe

spot_imgspot_img