संपादक कॉलम

इधर से उधर भटकता रहा ब्राह्मण का शव! क्यों मर रही हैं संवेदनाएं!

शिव दयाल मिश्राइस संसार में जो जन्म लेता है वह निश्चित रूप से एक दिन मृत्यु को प्राप्त होता है। असल में जीवन को...

नव संवत्सर 2078

शिव दयाल मिश्राहिन्दू नववर्ष विक्रम संवत्सर 2078 की सभी जागरूक जनता के सुधि पाठकों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं। भारत वर्ष का सर्वमान्य संवत विक्रम संवत...

लम्बी दूरी की बसों में तो टॉयलेट होने ही चाहिए!

शिव दयाल मिश्राआज जमाने में मनुष्य के लिए हर तरह की सुविधा मिल रही है और ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं देने के प्रयास किए...

अमीरों की फैलाई गंदगी को गरीब समेट रहे हैं!

शिव दयाल मिश्रासरकार हमेशा गरीबी मिटाने की बात करती है। अमीरी की नहीं। क्योंकि गरीबी को दया की दृष्टि से देखा जाता है। जबकि...

भारतीय संस्कृति के गीत गाते हम कर क्या रहे हैं! (4)

शिव दयाल मिश्राभारतीय संस्कृति सनातन संस्कृति कहलाती है। आज उस संस्कृति का अविभाज्य कर्म मंदिर में जाकर प्रभु की पूजा-अर्चना तो आम आदमी लगभग...

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