प्रधानमंत्री बनते ही मोदी को बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने का प्रस्ताव दिया, कामयाबी नहीं मिली-इमरान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान दो दिन के श्रीलंका दौरे पर मंगलवार को कोलंबो पहुंचे। यहां उन्होंने प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के साथ गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया।

कोलंबो। दो दिन के श्रीलंका दौरे पर गए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारत से रिश्तों को लेकर एक नया खुलासा किया। बुधवार को दौरे के आखिरी दिन इमरान ने कहा- ‘जब मैं सत्ता में आया तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संपर्क किया। मोदी से कहा कि दोनों देशों के बीच जो मुद्दे हैं, उन्हें बातचीत से सुलझाया जाना चाहिए, लेकिन इसमें कामयाबी नहीं मिली।’ इमरान ने उम्मीद जताई कि भविष्य में इस मुद्दे पर उनकी कोशिशें कामयाब होंगी। इस दौरान उन्होंने कश्मीर मुद्दे का भी जिक्र किया।

फ्रांस और जर्मनी की मिसाल
कोलंबो में ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट कॉन्फ्रेंस में इमरान ने कहा- जर्मनी और फ्रांस में कई बार झगड़ा हुआ। आज आप उस तरह के हालात के बारे में सोच भी नहीं सकते। वे आपसी कारोबार की वजह से जुड़े। इसी तरह मेरा भी सपना है कि उपमहाद्वीप में मतभेद और विवाद खत्म हों। कश्मीर विवाद हमें UN सिक्योरिटी काउंसिल के रिजॉल्यूशन्स के हिसाब से हल करना होगा। इसके लिए बस एक ही रास्ता है कि हम बातचीत करें।

इमरान के तीन कार्यक्रम रद्द किए गए थे
पाकिस्तान के ARY टीवी चैनल के मुताबिक, श्रीलंका सरकार ने इमरान के श्रीलंका आने से पहले उनके तीन अहम कार्यक्रम शेड्यूल से हटा दिए थे। पहला- संसद में भाषण। दूसरा- मुस्लिम सांसदों से मुलाकात। तीसरा- स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स विजिट। आखिरी दो कार्यक्रमों को कथित तौर पर सुरक्षा का हवाला देकर टाला गया है।

भारत के दबाव का आरोप
पाकिस्तान की कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि श्रीलंका ने भारत की नाराजगी के डर और उसके दबाव की वजह से इमरान के शेड्यूल में बदलाव किया था। इसी तरह की बातें श्रीलंकाई मीडिया में भी सामने आईं। कोलंबो गैजेटी ने सोमवार को अपने आर्टिकल में लिखा था- कोविड-19 के दौर में भारत ने श्रीलंका की काफी मदद की। जब वैक्सीन तैयार हुई तो भारत सरकार ने दो खेपों में करीब पांच लाख वैक्सीन कोलंबो को गिफ्ट कीं। श्रीलंका किसी भी कीमत पर भारत को नाराज करने का जोखिम नहीं ले सकता।

35 साल बाद कोलंबो में इमरान
इमरान खान 1986 में आखिरी बार श्रीलंका गए थे। उस वक्त वे पाकिस्तान की क्रिकेट टीम के कप्तान थे। इस दौरे में उन्होंने श्रीलंकाई अंपायरों पर पक्षपात का आरोप लगाया था।

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