बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के लिए गंगा सिंह जी ने बीकानेर रियासत से सालाना चंदा बांधा- प्रो माथुर

छठे महाराजा गंगा सिंह स्मृति व्याख्यान में एमजीएसयू के इतिहास विभाग को भेंट किए दुर्लभ चित्र

बीकानेर@जागरूक जनता। हम शिक्षा को वह स्थान नहीं दे पाए हैं जो भारतीय परंपरा में उल्लेखित है। आवश्यकता है ज्योतिष शास्त्र, व्याकरण, वेद, संस्कृत और गणित विषयों को बढ़ावा देने की साथ ही शिक्षकों को भर्ती करने से पहले उनके प्रशिक्षण को रियायती बनाया जाना समय की जरूरत है। साहूकार और महाजनों से शिक्षा के लिए धन का दान करने का आग्रह करने की आवश्यकता है, मेरा बस चलेगा तो स्कूली शिक्षा पर प्राथमिक जोर रखूंगा। एमजीएसयू के इतिहास विभाग द्वारा षष्टम महाराजा गंगा सिंह स्मृति व्याख्यान में बोलते हुए इतिहास वेद प्रोफ़ेसर तेज कुमार माथुर ने महाराजा गंगा सिंह जी का शैक्षणिक अवदान विषय पर बोलते हुए गंगा सिंह के बारे में यह विचार व्यक्त किए। उन्होंने यह भी कहा कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना के समय महाराजा गंगा सिंह ने बीकानेर रियासत से 14000 रुपए सालाना चंदे के रूप में भेजने की बात अपनी ओर से की थी।

स्मृति व्याख्यानमाला की संयोजिका इतिहास विभाग की सहायक आचार्य डॉ मेघना शर्मा ने अतिथि परिचय के साथ-साथ बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह को आधुनिक बीकानेर का निर्माता बताया और कहा कि आज मरूभूमि की हरियाली महाराजा गंगा सिंह की ऋणी है।

इससे पूर्व देवी सरस्वती और महाराजा गंगा सिंह के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ। स्वागत भाषण इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष व निदेशक शोध प्रो राजाराम चॉयल ने पढ़ते हुए महाराजा गंगा सिंह पर विस्तृत शोध की जरूरत पर बल दिया।

बीज वक्ता प्रोफेसर तेज कुमार माथुर का मंच से शॉल, श्रीफल, साफा, स्मृति चिन्ह देकर सम्मान भी किया गया। अध्यक्षयीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. विनोद कुमार सिंह ने कहा कि मदन मोहन मालवीय और महाराजा गंगा सिंह जी के प्रयासों से बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का शुभारंभ हुआ किंतु दोनों ने ही कभी भी धर्म को शिक्षा के रास्ते में नहीं आने दिया और हर धर्म के व्यक्ति को उस विश्वविद्यालय से जोड़ने की बात कही।  उदारवादी और सुधारवादी शासकों की अग्रिम पंक्ति में महाराजा गंगा सिंह बीकानेर का नाम लिया जाता है और लिया जाता रहेगा। प्रोफ़ेसर माथुर ने महाराजा गंगा सिंह के कुछ दुर्लभ चित्र इतिहास विभाग को अपने संग्रह में रखने हेतु भेंट किए ।

कार्यक्रम में परीक्षा नियंत्रक डॉ जसवंत खीचड़ और वित्त नियंत्रक संजय धवन के अतिरिक्त शिक्षाविदों में प्रो सुरेश कुमार अग्रवाल, प्रो अनिल कुमार छंगाणी, डॉ सीमा शर्मा, डॉ प्रगति सोबती, श्रीमती संतोष शेखावत, डॉ अभिषेक वशिष्ठ, डॉ गौतम मेघवंशी, डॉ अनिल कुमार दुलार, उपकुलसचिव डॉ बिट्ठल बिस्सा, फौजा सिंह, डूंगर महाविद्यालय के इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ चंद्रशेखर कच्छावा के साथ अजमेर विश्वविद्यालय के डॉ. पी. एम. जैन व भारी संख्या में विद्यार्थी सम्मिलित हुए। अंत में समस्त अतिथियों व आगंतुकों का मंच से औपचारिक धन्यवाद कार्यक्रम संयोजिका डॉ मेघना शर्मा द्वारा दिया गया।

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