आसाराम रात करीब 10:15 बजे एयर एंबुलेंस से जोधपुर पहुंचा था, लेकिन रात को नियमनुसार बंदी को जेल में प्रवेश नहीं दिया गया.

जोधपुर : पैरोल पर रिहा होने के बाद तय समय पर जेल नहीं पहुंचने पर रातानाड़ा थाने में आसाराम के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. थानाधिकारी जुल्फिकार ने बताया कि जेल से मिली रिपोर्ट पर आसाराम के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. जोधपुर केंद्रीय कारागार के प्रहरी बनवारीलाल की ओर से मंगलवार रात को रिपोर्ट दी गई, जिसमें बताया गया कि बंदी आसाराम को हाईकोर्ट के आदेश पर 50000 के निजी मुचलके पर 20 दिन की पैरोल पर छोड़ा गया था. 27 अक्टूबर की शाम 5 तक जेल में आकर उसे वापस समर्पण करना था, लेकिन बंदी तय समय पर जेल नहीं पहुंचा. ऐसे में बंदी आसाराम के विरुद्ध कारागार अधिनियम की धारा 58 (ख) के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार करें.
मामले के अनुसार आसाराम उपचार के लिए उज्जैन के अस्पताल में भर्ती था. उसे मंगलवार शाम को जेल में आना था. उसे उम्मीद थी कि सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट से राहत मिल जाएगी, लेकिन दोनों जगह पर उसे राहत नहीं मिली. इसके बाद उसके वकील शाम को जेल पहुंचे और सरेंडर करने के लिए मोहलत मांगी. इसके तहत आसाराम रात करीब 10:15 बजे एयर एंबुलेंस से जोधपुर पहुंचा था, लेकिन रात को नियमनुसार बंदी को प्रवेश नहीं दिया जा सकता है. इसके चलते उसे अंदर नहीं लिया गया था, जिसके बाद वह आरोग्य अस्पताल चला गया था. इस दौरान उसके खिलाफ रिपोर्ट दी गई गई, जिस पर मामला दर्ज हुआ है. आसाराम आज सरेंडर कर सकता है. इसके चलते उसके भक्त भी जेल के आस पास एकत्र होने लगे हैं.
तीन साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान : राजस्थान सरकार ने वर्ष 2015 में राजस्थान कारागार अधिनियम की धाराओं में संशोधन किया था. इसके तहत धारा 58 में पैरोल की शर्तें और बंदी के वापस नहीं आने पर दिए जाने वाले दंड का प्रावधान भी किया गया. धारा 58 की उपधारा (ख) के तहत बंदी निर्धारित समय पर जेल में वापस नहीं आता या पैरोल पर रिहाई की अन्य शर्तों का पालन नहीं करता तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती है. ऐसी स्थिति में, पुलिस अधिकारी उसे गिरफ्तार कर सकता है. दोषसिद्ध होने पर उसे तीन वर्ष तक के कारावास की सजा हो सकती है. अधिकतम 3,000 रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है. कारावास और जुर्माना, दोनों की सजा भी दी जा सकती है.
दोबारा पैरोल मिलना होगा मुश्किल : पैरोल मिलने के बाद अगर बंदी नियमों की पालना नहीं करता है तो उसे दोबारा पैरोल मिलने में काफी परेशानी आती है. आसाराम को पहली बार राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देश पर 20 दिन की पैरोल मिली थी, लेकिन वह सही समय पर वापस नहीं आया. ऐसे में दोबारा पैरोल लेने के लिए काफी परेशानी हो सकती है. गुजरात हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट में आसाराम की इसको लेकर याचिकाएं भी लंबित हैं.
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