
ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ टीचर्स ऑर्गनाइजेशन (AIFTO) का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में आयोजित ‘एजुकेशन इंटरनेशनल एशिया-पैसिफिक (EIAP) क्षेत्रीय कॉन्फ्रेंस’ के 10वें संस्करण में सफलतापूर्वक भाग लेने के बाद आज भारत लौट आया है। AIFTO के राष्ट्रीय महासचिव श्री सी. एल. रोज के नेतृत्व में एक 8 सदस्यीय दल कॉन्फ्रेंस में भाग लेने जकार्ता गया था जिसमें श्री रोज के साथ श्री एम. सलाहुद्दीन (कार्यकारी अध्यक्ष), श्री मनोज कुमार सिंह (उपाध्यक्ष), डॉ, सोहन सिंह मजीला ( संगठन मंत्री), श्रीमती माधुरी रोज (सचिव, राष्ट्रीय कार्यकारी समिति), श्रीमती सजिना ( उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय महिला समिति), डॉ, पुर्निमा गोस्वामी(सचिव, राष्ट्रीय महिला समिति) एवं श्रीमती लक्ष्मी बनकर (सदस्य) सम्मिलित रहे । जकार्ता के प्रतिष्ठित होटल शांग्री – ला में 13 से 15 अक्टूबर 2026 तक आयोजित इस त्रिदिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 35 के 300 से अधिक शिक्षक संघों के प्रतिनिधियों और शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया।
इस वर्ष की कॉन्फ्रेंस का मुख्य विषय (Theme) “ऑर्गनाइजिंग फॉर पावर : एजुकेशन यूनियंस शेपिंग द फ्यूचर ऑफ एजुकेशन इन द एशिया-पैसिफिक रीजन” (Organising for power: education unions shaping the future of education in the Asia Pacific Region) था। सम्मेलन का आधिकारिक उद्घाटन इंडोनेशिया के बुनियादी और माध्यमिक शिक्षा मंत्री और जकार्ता के गवर्नर की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने कॉन्फ्रेंस के विभिन्न महत्वपूर्ण सत्रों में सक्रिय रूप से भाग लिया और भारत में नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन, शिक्षकों के अधिकारों, सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली को मजबूत करने तथा डिजिटल युग में शिक्षकों की स्वायत्तता जैसे अहम मुद्दों पर देश का पक्ष मजबूती से रखा। भारत की ओर से AIFTO के राष्ट्रीय महासचिव श्री रोज ने “पर्यावरणीय परिवर्तन का भारतीय परिपेक्ष्य में शिक्षा एवं भारतीय शिक्षकों पर प्रभाव एवं की AIFTO कार्ययोजनाओं” विषय पर रिपोर्ट प्रस्तुत की जिसमें उन्होंने भारतीय परिपेक्ष्य में विस्तृत जानकारी सभी प्रतिभागियों के साथ साझा की ।
कॉन्फ्रेंस में मुख्य रूप से निम्नलिखित वैश्विक प्रस्तावों और रणनीतियों पर सहमति बनी, जिसमें AIFTO ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई:
- गो पब्लिक ! फंड एजुकेशन: सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकारों द्वारा बजट बढ़ाने पर जोर ।
- शिक्षकों का कल्याण और कानूनी सुरक्षा: संविदा व मानदेय शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने और शिक्षकों के वेतन व सम्मान की रक्षा करना ।
- शिक्षा में एआई (AI) का विनियमन: यह सुनिश्चित करना कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल शिक्षकों की सहायता के लिए हो, उनका स्थान लेने के लिए नहीं । शिक्षक स्वायत्तता को सर्वोपरि रखा
गया। - जलवायु न्याय और पाठ्यक्रमः पर्यावरण संकट से निपटने के लिए जलवायु शिक्षा को स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल करना ।
भारत लौटने पर हवाई अड्डे पर AIFTO के वरिष्ठ पदाधिकारियों और शिक्षक समुदाय द्वारा प्रतिनिधिमंडल का भव्य स्वागत किया गया। प्रतिनिधिमंडल के नेतृत्वकर्ता ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, “जकार्ता में आयोजित यह 10वीं क्षेत्रीय कॉन्फ्रेंस वैश्विक स्तर पर शिक्षकों की एकजुटता को मजबूत करने वाली रही है। वहाँ हुए मंथन और वैश्विक अनुभवों का लाभ हम भारत में शिक्षक कल्याण और शिक्षा सुधार नीतियों को और बेहतर बनाने के लिए करेंगे।”
यह दौरा न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय शिक्षकों की आवाज को बुलंद करने में मददगार साबित हुआ है, बल्कि इससे एशिया-प्रशांत क्षेत्र के अन्य शिक्षक संगठनों के साथ आपसी सहयोग के नए रास्ते भी खुले हैं।
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