योगासनों से बढ़ती है रोग प्रतिरोधक क्षमता–कुलपति डॉ बलराज सिंह

श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस महोत्सव के उपलक्ष पर दिनांक 20 जून, 2024 को योगासन का आयोजन किया गया साथ ही विश्वविद्यालय द्वारा दिनांक 21 जून 2024 को भी वृहद स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस आयोजन किया जाएगा ।

श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ बलराज सिंह की अध्यक्षता में योग दिवस का आयोजन महाविद्यालय परिसर में कुलपति डॉ बलराज सिंह की अध्यक्षता में आयोजन किया गया। डॉ बलराज सिंह ने योग दिवस के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि आज के वयस्तम दौर में तनाव मुक्त जीवन के लिए ऐसे आयोजन महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए योग व ज्ञान जरूरी है और इस प्रकार के आयोजनों से जुड़कर दैनिक दिनचर्या को बदलते हुए नियमित योग को अपनाकर अपनी जीवनचर्या को बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि योग क्रिया हमारे शरीर की आंतरिक व बाह्य शुद्धिकरण का कार्य करती है और हमारी शारीरिक एवं मानसिक चिन्ताओं का निराकरण करते हुए हमें क्रियाशील बनाने में मदद करता है। साथ ही उन्होंने कहा कि इससे कई बीमारियों से निजात मिलती है।योग का महत्व बहुत अधिक है, क्योंकि यह शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य के लिए संतुलन प्रदान करता है। योग करने से हमारे शारीरिक क्षमताएँ बढ़ती हैं, मानसिक चिंताओं को दूर किया जा सकता है और हमारे मानसिक स्थिति में स्थिरता लाता है। योग हमें अपने जीवन को स्वस्थ और खुशहाल बनाने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करता है।

महाविद्यालय के सह अधिष्ठाता डॉ शैलेष मारकर ने इस कार्यक्रम की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान दौर में सुखद, स्वस्थ व तनाव मुक्त जीवन के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें विशेषज्ञों द्वारा निशुल्क आसन, प्राणायाम एवं मुद्रा सहित ध्यान करवाया जाएगा। उन्होंने बताया कि ध्यान में जहां आध्यात्मिक व मानसिक शांति मिलती है। वहीं व्यक्ति शारीरिक रूप से स्वस्थ रहता है और मानसिक तनाव प्रबंधन के साथ उसके एकाग्रता व आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। योग प्रशिक्षक श्री राहुल, प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय वैशाली नगर ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस महोत्सव के अंतर्गत आयुष मंत्रालय द्वारा दिये गए कॉमन योगा प्रोटोकॉल के अनुसार आसन व क्रियाओं का अभ्यास कराया एवं उनके लाभ के बारे में छात्र-छात्राओं व व्याख्याताओं को अवगत कराया। साथ ही उन्होंने कहा कि योग जीवनशैली का एक हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि योग केवल एक एक्सरसाइज का जरिया नहीं है बल्कि जिंदगी का एक अभिन्न अंग है।

बी. के. सुनेहा ने बताया कि योग शब्द संस्कृत शब्द “युज” से निकला है, जिसका अर्थ है ‘जोड़ना या ‘एकजुट करना, तथा यह मन, शरीर और आत्मा में सामंजस्य लाने के दर्शन का प्रतीक है। यह केवल शारीरिक आसनों से कहीं अधिक है क्योंकि यह स्वास्थ्य के प्रति एक समग्र दृष्टिकोण है जो श्वास व्यायाम, ध्यान और नैतिक सिद्धांतों को एकीकृत करता है। साथ ही उन्होंने बताया कि भारतीय योग शास्त्र की विवेचना करते हुए मुख्य रूप से हमारे श्वसन तंत्र से फेफडों (लग्स) एवं रोग प्रतिरोधकता को सही रखने हेतु उपयुक्त योगासनों पर चर्चा की एवं राजयोग का ध्यान अभ्यास व उसके महत्व के बारे में भी बताया ।
इस कार्यक्रम के अवसर पर महाविद्यालय के लगभग 200 शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया।

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