फिर से कोरोना? JN.1 वैरिएंट का पहला मामला आने के बाद केंद्र अलर्ट, राज्यों को जारी की एडवाइजरी

देश में कोरोना का एक नया वेरिएंट सामने आया है। कोरोना के नए वेरिएंट जेएन.1 का पहला मामला केरल में सामने आया है। इसके बाद से सर्दियों के मौसम में कोरोना के फिर से फैलने का डर सता रहा है। हालांकि, राज्य सरकार का कहना है कि अभी चिंता की कोई बात नहीं है। इसके बीच केंद्र सरकार अलर्ट हो गई है।

नई दिल्ली : देश में कोरोना का खतरा फिर से बढ़ने का डर सता रहा है। भारत में कोरोना का नया वेरिएंट JN.1 का पहला मामला सामने आ चुका है। इसके बाद केंद्र ने सोमवार को राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से निरंतर निगरानी बनाए रखने को कहा। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव सुधांश पंत ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लिखे एक पत्र में रेखांकित किया कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच लगातार और सहयोगात्मक कार्यों के कारण हम (कोविड-19 के) मामलों की संख्या कम करने में सक्षम हुए। वहीं, पिछले तीन दिन के भीतर 15 और 17 दिसंबर को कोविड-19 के 300-300 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं। पिछले 24 घंटे में कोरोना के 235 मामले दर्ज किए गए हैं।

8 दिसंबर को केरल में JN1 का पहला केस
उन्होंने कहा कि हालांकि, कोविड-19 वायरस का प्रकोप जारी है… इसलिए सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए गति को बनाए रखना महत्वपूर्ण है। पंत ने कहा कि हाल में केरल जैसे कुछ राज्यों में कोविड-19 के मामलों की संख्या में मामूली वृद्धि हुई है। भारत में कोविड-19 के उप स्वरूप जेएन.1 का पहला मामला आठ दिसंबर को केरल में सामने आया था। हालांकि, पीड़ित महिला रोगी अब पूरी तरह से ठीक हो चुकी है। उन्होंने कहा कि आगामी त्योहारी मौसम को ध्यान में रखते हुए राज्यों को बीमारी के प्रसार के जोखिम को कम करने के लिए अपेक्षित सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय और अन्य व्यवस्थाएं करनी चाहिए।

दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील
पंत ने कहा कि राज्यों से आग्रह किया गया है कि वे केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा कोविड-19 के लिए साझा की गई संशोधित निगरानी रणनीति को लेकर विस्तृत दिशानिर्देशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करें। उन्होंने मामलों का जल्द पता लगाने के लिए सभी स्वास्थ्य सुविधाओं में इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी (आईएलआई) और गंभीर तीव्र श्वसन बीमारी (एसएआरआई) के जिला आधारित मामलों की नियमित आधार पर निगरानी और रिपोर्ट करने को कहा है। राज्यों को यह भी सलाह दी गई है कि वे सभी जिलों में कोविड-19 जांच दिशानिर्देशों के अनुसार पर्याप्त परीक्षण सुनिश्चित करें और आरटी-पीसीआर और एंटीजन जांच की अनुशंसित हिस्सेदारी बनाए रखें।

क्या है जेएन.1 वेरिएंट
केरल में एक महिला में कोरोना वायरस के जेएन.1 नामक नए सब-वेरिएंट की पहचान की गई है। इसके बाद से चिंता बढ़ गई है। केंद्र ने 16 दिसंबर को केरल के एक मरीज में कोविड-19 के जेएन.1 सबवेरिएंट की उपस्थिति की पुष्टि की। यह भारत में इस तरह का पहला मामला था। जेएन.1, बीए.2.86 वैरिएंट से निकटता से संबंधित है। इसे पिरोला भी कहा जाता है, जो कि हाल ही में अमेरिका और चीन में इसका पता चला है। कोविड-19 के उप-स्वरूप जेएन.1 की पहचान पहली बार लक्जमबर्ग में की गई थी। कई देशों फैला यह संक्रमण पिरोलो स्वरूप (बीए.2.86) से संबंधित है।

नए वेरिएंट से कितना खतरा?
केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने रविवार को कहा कि राज्य में मिला कोविड-19 का नया उपस्वरूप ‘जेएन.1’ चिंता का कारण नहीं है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को बताया कि भारतीय सार्स-कोव-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (आईएनएसएसीओजी) की नियमित निगरानी गतिविधि के तहत नया मामला मिला है। वैश्विक स्तर पर, बीए.2.86 और इसके सब-वेरिएंट के 3,608 मामले सामने आए हैं। इनमें से ज्यादातर यूरोप और उत्तरी अमेरिका से हैं। हालांकि, यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने कहा कि शुरुआती आंकड़ों से पता चलता है कि अपडेट कोविड-19 वैक्सीन जेएन.1 सब-वेरिएंट से सुरक्षा प्रदान करने में कारगर हैं। प्रारंभिक आंकड़ों से सामने आया है कि अपडेट वैक्सीन और इलाज अभी भी जेएन.1 सब-वेरिएंट के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करेंगे।

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