बालाजी मंहत ने हरिद्वार में 29 दिन 3.48 लाख  मिट्टी से बने शिवलिंगों से की पार्थेश्वर अनुष्ठान महापूजा

पार्थेश्वर अनुष्ठान व भागवत कथा का हुआ समापन

विश्व शांति व मानव कल्याण के लिए की गई थी महापूजा

प्रदीप बौहरा
मेहंदीपुर बालाजी @जागरूक जनता
मेंहदीपुर बालाजी मंदिर पीठाधीश्वर महंत डॉक्टर नरेश पुरी महाराज द्वारा विश्व शांति व मानव कल्याण के लिए भगवान शिव को खुश करने के लिए 19 जुलाई बुधवार से पार्थेश्वर भगवान की महा पूजा हरिद्वार के गंगा घाट पर प्रारंभ की गई । इस महा पूजा व भागवत कथा का 16 अगस्त बुधवार को महा समापन किया गया, समापन पर  पार्थेश्वर भगवान की पूजा आराधना कर महंत महाराज ने महा आरती की इसमें हजारों लोग शामिल हुए । भगवान शिव के 12 हजार मिट्टी से बने शिवलिंगों की  महा पूजा कर बैंड़ व बाजे के साथ भव्यरूप से मां गंगा के पवित्र जल में विधि-विधान पूर्वक विसर्जन किया। 29 दिन में 3.48 लाख मिट्टी के शिवलिंगों की पूजा की गई और मां गंगा के पवित्र जल में विसर्जन किया गया ।

वही इस दौरान मशहूर भजन गायकों द्वारा  भजनों की सरिता बहती रही । महापूजा के साथ-साथ भागवत कथा चल रही थी इसका भी आरती कर महंत ने समापन किया। पंडितों ने इस महापूजा अनुष्ठान व भागवत के पूर्ण पूजा प्रतिफल को महंत डॉ. नरेशपुरी महाराज को दिया मंहत ने पंडितों द्वारा दीया गया पूजा के प्रतिफल को सहज हृदय से भगवान बालाजी महाराज के चरणों में विश्व शांति व मानव कल्याण के लिए समर्पित कर दीया। यह विशेष पूजा बालाजी मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष महंत कई दशक से कराते आ रहे हैं. पार्थेश्वर पूजा का श्रावण मास में विशेष महत्व बताया गया है। इस दौरान 15 अगस्त को  मंहत महाराज ने हरिद्वार के सभी साधु संतों व महामंडलेश्वरों का महा भंडारा किया जिसमें हजारों की संख्या में साधु -संत पंगत प्रसादी ग्रहण करने पहुंचे महंत ने सभी साधु – संतों का सम्मान कर वस्त्र दक्षिण भेट की वही पार्थेश्वर महा पूजा व भागवत का 16 अगस्त बुधवार समापन हुआ जिसमे भी हजारों लोगों का भंडारा किया गया भंडारे में सभी को प्रेम पूर्वक शुद्ध देसी घी की बनी  प्रसादी पंगत लगाकर  जिमाई गई। कन्याओं को भोजन कराकर मंहत ने वस्त्र  दक्षिणा चरण छूकर दी  वही पार्थेश्वर व भागवत पूजा के विद्वान पंडितों को भोजन कराकर महंत द्वारा सम्मान कर वस्त्र दक्षिणा भेंट की। 29 दिन की विश्व शांति मानव कल्याण की महा पूजा के सफल आयोजन पर महंत को  साधु-संतों व भक्तों ने शुभकामनाएं दी।

29 दिन में 3.48 लाख  मिट्टी बने शिवलिंग से की गई महा पूजा

  प्रतिदिन भगवान शिव के 12 हजार मिट्टी के शिवलिंग मूर्तिकारों द्वारा रोज बनाए जाते थे 31 पंडित विधि विधान से महंत को रोज शिवलिंग का महा अभिषेक व पूजा अर्चना कर गंगा में  विसर्जित कराते थे। 29 दिन की महा पूजा में 3.48  लाख मिट्टी से बने शिवलिंगों की पूजा की गई और गंगा में विसर्जन किया गया इस दौरान 7.50 लाख महामृत्युंजय जप,7 महाशिवपुराण पठन,5 लाख ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप,31 राम रक्षा स्त्रोत पठन,हनुमान चालीसा व सुंदरकांड का पठन,
पार्थेश्वर चिंतामणि अनुष्ठान के अंतर्गत यह सभी अनुष्ठान कीए गए वही पार्थेश्वर पूजा के साथ भागवत कथा का महा आयोजन भी किया गया और उसके साथ भजन संध्या व प्रतिदिन हजारों पैकेट भोजन के जरूरतमंद लोगों को वितरण किए जाते थे।हरिद्वार के गंगा घाट पर  यह महा आयोजन किया गया था ।

मेहंदीपुर बालाजी पीठाधीश्वर महंत डॉ.नरेश पुरी महाराज

मेहंदीपुर बालाजी पीठाधीश्वर महंत डॉ नरेश पुरी महाराज ने कहा – तुलसी या संसार में, सबसे मिलिए धाय! न जाने किस रूप में, नारायण मिल जायें -भावार्थ – तुलसीदास जी कहते हैं कि हे मनुष्य इस संसार में तू किसी से भी मिले तो उससे प्रेम से मिल मैत्री और श्रद्धा-भाव से मिल क्योकि न जाने तेरी परीक्षा लेने के लिए भगवान् किस वेश में आ जाये और उस समय वो तेरे प्रेम भाव को देख कर तुझे अपना लें !

उन्होंने कहा इस कलयुग में भगवान का नाम ही आधार है ।केवल नाम सुनने से , जपने से मानव भव सागर से पार उतर जाता है। नाम जप में किसी विधिविधान , देश , काल , अवस्था की कोई बाधा नहीं है। किसी प्रकार से , कैसी भी अवस्था में , किसी भी परिस्थिति में , कहीं भी , कैसे भी नाम जप किया जा सकता है। इस नाम जप से हर युग में भक्तों का भला हुआ है।  ईश्वर का न रंग है न रूप है और न इसे हम देख सकते है, लेकिन ऐसी कोई न कोई शक्ति है, जो हमारे ब्रम्हांड में विद्यमान है जिसे हमने ईश्वर का नाम दिया है। ईश्वर इतना सर्व शक्तिमान है जिसे किसी धन दौलत की जरूरत नही है वह तो बस एक छोटी सी नाम रूपी प्रार्थना से प्रसन्न हो जाता है। ईश्वर की प्रार्थना में इतनी शक्ति है जो हमारे आत्मविश्वास को बढ़ाती है। ईश्वर की प्रार्थना उस समय हमारे मन को शांति प्रदान करती है । और हमारे दुख  दर्द को कोसों दूर  करती है,

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