कभी दिवाली तो कभी होली अलग अलग, अब नही होगा !पंचागकर्ताओ ने लिया बड़ा निर्णय

नीमच @ Jagruk Janta. भारत की सनातन परंपरा में पंचांग का विशेष स्थान है। व्रत, पर्व और त्योहारों की तिथियों का निर्धारण पंचांग के आधार पर ही किया जाता है। लेकिन विभिन्न पंचांगों में तिथियों के अंतर के कारण कई बार एक ही त्योहार अलग-अलग दिनों में मनाए जाते हैं। इस असमानता को दूर करने और पूरे भारत में एकरूपता लाने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय सनातन दृक पंचांग समिति द्वारा एक महत्वपूर्ण सम्मेलन आयोजित किया गया। (Bundi News) बुंदी के श्री साकेत पंचांग गणितकर्ता आचार्य अक्षय शास्त्री ने बताया कि यह एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय पंचांग कर्ताओं का सम्मेलन 9 मार्च को मध्यप्रदेश के भादवा माता, नीमच में संपन्न हुआ।

आयोजन समिति के संयोजक एवं भादवा माता पंचांग कर्ता, ज्योतिषाचार्य पंडित भागीरथ जोशी ने बताया कि इस सम्मेलन में भारत के विभिन्न प्रदेशों के पंचांग कर्ताओं ने भाग लिया। इसमें विक्रम संवत् 2083 के व्रत एवं पर्वों की तिथियों के एकीकरण पर विचार-विमर्श किया गया।

सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि पूरे भारत में सभी व्रत और पर्व एक ही दिन मनाए जाएं। इस विषय पर गहन मंथन किया गया, जिससे सनातन परंपराओं में समरसता और एकरूपता स्थापित की जा सके।

सम्मेलन में रही विद्वानों की गरिमामयी उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण सम्मेलन की अध्यक्षता महामंडलेश्वर व्यासाचार्य उज्जैन ने की। मुख्य अतिथि पंडित मोहन दाते (सोलापुर-दाते पंचांग) तथा विशिष्ट अतिथि पंडित रमन शर्मा (कांची कामकोटि पीठ) रहे।इसके अलावा देशभर के प्रमुख पंचांग कर्ताओं की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल थे:

पंडित सुरेश गौड़ (सुमेरपुर- सनातन ज्योतिष पंचांग)
दीपक जोशी (नैनीताल – उत्तराखंड श्री गणेश मार्तंड पंचांग)
अरुण जेटली (पप्पी पंचांग, दिल्ली)
आचार्य अक्षय शास्त्री (श्री साकेत पंचांग, बुंदी)
पंडित दीनदयाल शास्त्री (श्री रामेश्वरम पंचांग, बुंदी)
पंडित नवराज शुक्ल (अपराजिता पंचांग, बूंदी)
लखबीर तिवारी (अमलोह, पंजाब- नैनादेवी पंचांग)
डॉ. श्याममनोहर चतुर्वेदी (सागर- सिया भवानी पंचांग)
रमेश पंड्या (राजोद धार- कालचक्र पंचांग)
पंडित कौशल किशोर कौशिक (श्री राजधानी पंचांग, दिल्ली)
डॉ. श्रीकांत तिवारी (अन्नपूर्णा पंचांग, काशी)
कन्नू भाई पुरोहित (गुजरात संदेश पंचांग)
सुब्रह्मण्यम सिद्धांति (कांची कामकोटि पीठम, तेलुगु पंचांग)
डॉ. अजय कुमार पांडेय (सह संपादक, विश्व पंचांग वाराणसी)
डॉ. अशोक शर्मा (श्री बद्री काशी पंचांग, अशोक नगर)
प्रो. विनय कुमार पांडेय (वाराणसी)
पंडित भागीरथ जोशी (श्री भादवामाता पंचांग, नीमच)
इसके अलावा देश के विभिन्न राज्यों के सैकड़ों विद्वान पंचांग कर्ताओं ने इस सभा में भाग लिया।

संस्कारिक शुभारंभ एवं समापन
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ, जिसमें श्री राज राजेश्वरी संस्कृत वेद विद्यालय भादवामाता के विद्यार्थियों ने वेद मंत्रों से मंगलाचरण किया। कार्यक्रम के समापन पर कार्यक्रम प्रभारी पंडित ऋतु राज जोशी ने सभी विद्वानों का आभार प्रकट किया। इस सम्मेलन में पंचांगों की एकरूपता और व्रत-त्योहारों की तिथियों के एकीकरण पर गहन मंथन किया गया। विद्वानों ने निर्णय लिया कि आने वाले वर्षों में एकमत होकर पंचांग निर्माण किया जाए, जिससे संपूर्ण भारत में सभी पर्व एक ही दिन मनाए जा सकें। इस सम्मेलन के माध्यम से सनातन धर्म की अखंडता एवं परंपराओं की पवित्रता को बनाए रखने का संकल्प लिया गया, जिससे धार्मिक आस्थाओं में और अधिक मजबूती आए।

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