कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर का 14वां स्थापना दिवस आयोजित: उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रगतिशील किसान, एंटरप्रेन्योर, व वैज्ञानिक सम्मानित

जोधपुर। कृषि विश्वविद्यालय के 14 वें स्थापना दिवस समारोह का आयोजन सोमवार को किया गया। विश्वविद्यालय के पी जोशी ऑडिटोरियम में आयोजित भव्य समारोह में अध्यक्षता कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह जैतावत ने की। समारोह में मुख्य अतिथि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, आईआईटी, जोधपुर के निदेशक, प्रोफेसर अविनाश कुमार अग्रवाल रहे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रोफेसर पवन कुमार शर्मा, कुलगुरु, जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, प्रोफेसर (वैद्य) गोविंद सहाय शुक्ला, कुलगुरु, डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर, प्रोफेसर अजय कुमार शर्मा, कुलगुरु एमबीएम विश्वविद्यालय, डॉ एल एन हर्ष, संस्थापक कुलगुरु, कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर, श्री अनिल कुमार, कार्यकारी निदेशक, एफडीडीआई, जोधपुर एवं श्री गजेंद्र सिंह पोषाण, सदस्य प्रबंध मंडल रहे।
समारोह के दौरान अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए कलगुरु प्रोफेसर जैतावत ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय आज नवाचार, प्रसार, तकनीकी विकास, अनुसंधान एवं किसान सेवा में नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय की विभिन्न उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि हमारा संकल्प है कि शिक्षा खेत से जुड़े, अनुसंधान किसान से जुड़े, तकनीक गांवों तक पहुंचे, एवं स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिले ताकि किसान की समृद्धि के द्वार खुले।
कृषि में तकनीकी समावेश की आवश्यकता
समारोह में प्रोफेसर अविनाश कुमार अग्रवाल ने कहा कि राजस्थान की कृषि, ग्लोबल वार्मिंग, शुष्क जलवायु, पानी की कमी, बढ़ती लागत सीमित संसाधनों जैसी चुनौतियों से घिरी हुई है ऐसे में पारंपरिक कृषि तक सीमित नहीं रहा जा सकता। किसान को स्मार्ट एवं डिजिटल कृषि की आवश्यकता है। अतएव कृषि में तकनीकी का समावेश करने के लिए आवश्यक है कि कृषि विश्वविद्यालय एवं आईआईटी जोधपुर मिलकर कार्य करें। इस मौके पर कुलगुरु प्रोफेसर पवन कुमार शर्मा ने कहा की जीवन को आसान बनाने एवं आगे बढ़ने के लिए तकनीकी सहायक हो सकती है लेकिन जीवन शुरू करने के लिए अन्न सर्वोच्च है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कृषि के साथ तकनीकी का समावेश इस तरह किया जाए कि स्वास्थ्य से जुड़ी विभिन्न समस्याओं का निदान हो। उन्होंने कहा कि बेहद गौरवपूर्ण है कि कृषि विश्वविद्यालय सिर्फ क्षेत्रीय ही नहीं अपितु राष्ट्रीय स्तर पर नवाचार व अनुसंधान में परचम लहरा रही है।
समृद्धि का आधार कृषि
इस दौरान कुलगुरु प्रोफेसर गोविंद सहाय शुक्ला ने कहा कि जीवन की समृद्धि और आरोग्य दोनों कृषि से जुड़े हैं, साथ ही अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार कृषि है। उन्होंने विद्यार्थियों व वैज्ञानिकों से कहा कि संकल्प लेवें की राष्ट्र हित में नवाचार एवं कृषक हित में निरंतर बेहतरीन कार्य करेंगे। इस दौरान संस्थापक कुलगुरु डॉ हर्ष ने कहा कि सीमित संसाधनों से शुरू किया गया कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर आज प्रदेश के पांचो कृषि विश्वविद्यालयों में अग्रणी है। उन्होंने कहा कि खाद्यान्न उत्पादन में सिर्फ मात्रा बढाना ही मकसद ना हो अपितु गुणवत्ता बढ़ाने पर कार्य हो।
कृषक हित सर्वोपरि
समारोह में कुलगुरु डॉ अजय कुमार शर्मा ने कहा कि स्थापना दिवस के मौके पर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक एवं विद्यार्थी संकल्प लेवें की राष्ट्र को कृषि क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए दुगुनी मेहनत करेंगे, साथ ही कृषक हित को सर्वोपरि रखेंगे। कार्यकारी निदेशक श्री अनिल कुमार ने कहा यह दौर कृत्रिम बुद्धिमत्ता का है लेकिन अपनी भाषा एवं अपनी संस्कृति को सर्वोपरि रखें, अपनी जड़ों से जुड़े रहे। इस दौरान श्री गजेंद्र सिंह पोषणा ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया।
विभिन्न पाठ्य सामग्रियों का विमोचन
समारोह के दौरान विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों एवं शैक्षणिक सदस्यों की ओर से तैयार पाठ्य सामग्री, इनफॉरमेशन बुलेटिन, फोल्डर एवं लैब मैनुएल्स व ई बुक का विमोचन किया गया। इस मौके पर कृषि विज्ञान केंद्र के रियल टाइम रिर्पोटिंग सिस्टम का उद्घाटन भी किया गया।
उत्कृष्ट कार्य करने पर सम्मानित-
समारोह में प्रगतिशील किसान श्री श्रवण सिंह व श्री प्रेमाराम, डेयरी क्षेत्र में श्रेयांश मेहता, स्टार्टअप के लिए पूरण सिंह भाटी, पूर्व निदेशक अनुसंधान, डॉ जी एन परिहार , बाजरे की किस्म विकसित करने में सहयोगी, डॉ विकास खंडेलवाल सहित विश्वविद्यालय के डॉ सुरेश चंद मीणा, डॉ रूपल धूत, डॉ प्रकाश चंद यादव, कोच लक्ष्मण राठौड़, क्लर्क ग्रेड फर्स्ट, प्रवीण कुमार, फार्म मैनेजर, अनीता टोडावत, प्रयोगशाला सहायक, सोनू मेहता व कृषि पर्यवेक्षक हेमंत अमेठा को सम्मानित किया गया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां –
समारोह के दौरान विद्यार्थियों की ओर से विभिन्न रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गई साथ ही नाट्य के माध्यम से विश्वविद्यालय की विकास यात्रा को उकेरा गया। कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन डॉ प्रदीप पगारिया ने दिया वही विश्वविद्यालय का संक्षिप्त इतिहास डॉ नलिनी रामावत ने बताया। कार्यक्रम में आभार डॉ महेंद्र कुमार ने जताया। समारोह का सफल आयोजन नोडल अधिकारी व निदेशक पीएम ई, डॉ रामदेव सुतालिया के निर्देशन में किया गया। समारोह के दौरान विश्वविद्यालय के प्रबंध मंडल व विद्या परिषद के सदस्य, सेवानिवृत अधिष्ठाता, निदेशक, सरकारी व गैर सरकारी, संस्थाओं के सदस्य किसान व विद्यार्थी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
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