देश का कानून : सम्मान एवं भय

आए दिन हम सभी को अखबारों के मुख्य पृष्ठ पर खबरें पढ़ने को मिलती है कहीं डकैती , कहीं दिनदहाड़े गोली मारना ,कहीं बलात्कार , तो कहीं मासूम बच्चियों की जिंदगी से खिलवाड़ कर हैवानियत की हदें पार …यह सब देखकर मन दुःखी ही नहीं कई प्रकार के सवाल ज़हन में उठने लगते हैं आखिर क्यों हमारे देश में कानून के प्रति सम्मान और भय नहीं ?

आए दिन हम सभी को अखबारों के मुख्य पृष्ठ पर खबरें पढ़ने को मिलती है कहीं डकैती , कहीं दिनदहाड़े गोली मारना ,कहीं बलात्कार , तो कहीं मासूम बच्चियों की जिंदगी से खिलवाड़ कर हैवानियत की हदें पार …यह सब देखकर मन दुःखी ही नहीं कई प्रकार के सवाल ज़हन में उठने लगते हैं आखिर क्यों हमारे देश में कानून के प्रति सम्मान और भय नहीं ? हालांकि पुलिस प्रशासन भी अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं ।जब लापता मासूम बच्चों को अपरहणकर्ताओं से सुरक्षित निकाल वो माँ बाप को सौंपते हैं ,उस परिवार के लिए मसीहा से कम नहीं होते है।कहने का तात्पर्य यह है जनसंख्या बढ़ती जा रही है और इसके साथ ही अपराध भी बढ रहें हैं ऐसे में ये जिम्मेदारी सिर्फ पुलिस प्रशासन की ही नहीं हम देश के नागरिक हैं और समाज को सुरक्षित करने की कुछ जिम्मेदारी हम नागरिकों की भी बनती है ।संविधान ने हमें अधिकार बताएं है तो कुछ कर्त्तव्य भी बताए हैं।जब तक हम नागरिक अपना कर्त्तव्य नहीं समझेंगे , कानून के प्रति भय और सम्मान वो नहीं होगा जो होना चाहिए और तब तक लोग जुर्म करने से नहीं डरेंगे।

एक प्रश्न यह भी उठता है क्या हमारे देश के कानून में लोचशीलता है ,क्या यहाँ के सिस्टम में ढिलाई होती है ? क्या इसलिए लोग बेखौफ है….?अन्य देशों में इतने कठोर नियम बनाए गए हैं कानून और व्यवस्था दोनों बनी रहती है और वहां के लोगों को नियमों के पालन की आदत पड़ गई है।”भय बिन होइ न प्रीति” कठोरता होगी तभी अपराध में कमी आ पाएगी। सरकार को कुछ कानून सख्त बनाने होंगे। हम नागरिकों को सरकार और पुलिस पर ही नहीं थोपना है एक सुंदर देश एवं समाज के निर्माण में अपनी जिम्मेदारियों को भी हमें निभाना होगा ।हम परिवार से इसकी शुरुआत करें ,अपने बच्चों को अनुशासन में रहने की शिक्षा दें ,तभी परिवार से निकल आस- पास के वातावरण समाज और देश में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।आपको याद दिलाना चाहूंगी इंदिरा जी के समय किरण बेदी ने एक बार उनकी गाड़ी का चालान काट दिया था क्योंकि वह गाड़ी नियमों का उल्लघंन कर रही थी और उस समय इंदिरा जी देश की प्रधानमंत्री थीं और तब इंदिरा जी किरण बेदी पर क्रोधित और अपनी राजनीतिक शक्ति नहीं दिखाई बल्कि किरण बेदी को बधाई देते हुए अपने घर खानें पर बुलाया क्योंकि किरण बेदी ने कानून एवं कर्तव्य का पालन किया था ।किरण बेदी ने एक इंटरव्यू में स्वयं जनता को यह बताया था ये मेरा सम्मान नहीं देश के कानून का सम्मान है।हर नागरिक में को अपना कर्त्तव्य समझना होगा यदि वो अपराध पर अंकुश लगाना चाहता है एक सुंदर और भयमुक्त समाज का निर्माण करना चाहता है साथ ही सरकार को भी सख्ती दिखानी होगी , सिस्टम में ढिलाई कम करनी होगी , अपराधियों में भय पैदा करना होगा तभी सख्ती से कानून का पालन हो पाएगा ताकि किसी परिवार का चिराग न बुझ पाए , किसी बेटी को दहेज के लिए जलाया न जाए , किसी बेटी की दिनदहाड़े कोई हैवान अस्मत न लूट पाए, ट्रेफिक नियमों का पालन हो पाए ताकि दुर्घटनाएं कुछ हद तक कम हो एवं सामाजिक समरसता एवं सोहाद्र बना रहें।

यहाँ मैं विवेकानंद जी की बात का भी जिक्र करना चाहुंँगी , उन्होंने एक बार कहा था “मर्यादा , ईमानदारी ,मेहनत और आदर्श अनुशासन के बिना किसी का जीवन महान नहीं बन सकता ।” अपनी कलम को विराम देते हुए कहुँगी अपने राष्ट्र के प्रति,देश के कानून के प्रति एवं नैतिकता के प्रति सदैव जागरूक रहें ,सजग रहें।सभ्य राष्ट्र एवं सभ्य समाज के हम नागरिकों की यह जिम्मेदारी बनती हैं भूले भटके राही को सही दिशा, उचित मार्गदर्शन दे एवं स्वयं भी सही पथ पर चलने का भरसक प्रयास करें।यह जिम्मेदारी सिर्फ कानून , सरकार और पुलिस की ही नहीं सभ्य राष्ट्र के सभ्य नागरिकों की भी बनती है।

सुमन राठौड़, झाझड

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