बाजार में मिलेगा कर्ण श्रीखंड

  • “तेलीय पदार्थ की बजाय करें गुणवत्ता युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन – डॉ बलराज सिंह
  • *विश्वविद्यालय द्वारा विकसित कर्ण श्रीखंड वजन कम करने में सहायक ” – डॉ बलराज सिंह *
  • “कर्ण श्रीखंड जैसे उत्पादो से भविष्य में छात्रों को व्यवसाय शुरू करने में मिलेगी मदद” – डॉ बलराज सिंह *

जोबनेर . डेयरी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, जोबनेर का “कर्ण श्रीखंड” के नाम से नया डेयरी उत्पाद विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ बलराज सिंह द्वारा लॉन्च किया गया। डॉ बलराज सिंह ने कहा कि छात्रों को कचोरी, समोसे जैसे तेलीय पदार्थ की जगह विश्वविद्यालय द्वारा बनाए गए “कर्ण श्रीखंड ” का उपयोग करने की सलाह दी। इस महाविद्यालय की प्रायोगिक डेयरी इकाई के अन्तगर्त ग्रीष्मकालिन अवकाश के दौरान छात्र एवं छात्राओं के प्रायोगिक कौशल के विकास हेतु “कर्ण श्रीखंड” का उत्पादन शुरू किया गया। जिससे भविष्य में छात्र स्वयं का व्यवसाय भी शुरू कर सकते है।
इस अवसर पर डॉ बलराज सिंह ने लोगों के स्वास्थ्य के सुधार हेतु डेयरी उत्पादों के उत्पादन एवं डेयरी उत्पादों के उपभोग पर बल दिया। इसके साथ ही डेयरी उत्पादों के पौष्टिक एवं औषधिय गुण बढ़ाकर मूल्यवर्धन करने का भी सुझाव दिया। डेयरी उत्पादों के उत्पादन से राजस्व उत्त्पति होगी तथा क्षेत्र के लोगों का स्वास्थ्य भी अच्छा होगा। डॉ बलराज सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित कर्ण श्रीखंड वजन कम करने में भी सहायक है।

अधिष्ठाता एवं संकाय अध्यक्ष डॉ एम आर चौधरी ने बताया कि महाविद्यालय में मिल्क पैकिंग का काम भी दोबारा शुरू किया जाएगा व साथ ही जैम ,जेली, मुरब्बा आदि उत्पादों पर भी काम किया जाएगा। डॉ एम आर चौधरी ने बताया कि विद्यार्थियों को दूध, दही, छाछ आदि दिनचर्या के उत्पाद भी महाविद्यालय के परिसर में ही उपलब्ध करवाने के प्रयास किए जाएंगे जिससे विद्यार्थियों को बाजार में न जाना पड़े ।
डेयरी महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो महेश दत्त ने महाविद्यालय मे विद्यार्थीओं के लिए विभिन्न प्रायोगिक डेयरी विषयों के बारे में विस्तार से बताया तथा दुग्ध एवं डेयरी उत्पादों के ऐतिहासिक पहलुओं पर भी प्रकाश डाला तथा डेयरी उत्पादों के उत्पादन में वृद्धि करने की अनुशंसा की। सहायक आचार्य डॉ. उर्मिला चौधरी के मार्गदर्शन में “कर्ण श्रीखंड” का निर्माण किया गया जिसमें मानसी राठौड़ तकनीकि सहायक ने सहयोग किया। कार्यक्रम के अन्त में प्रो जुनैद अख्तर ने सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के समस्त अधिष्ठाता, निदेशक एवं विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष उपस्थित रहे। अन्त में प्रो. जुनैद अख्तर ने सभी का धन्यवाद किया।

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